UP Police

थाना मदनपुर: न्याय चाहिए तो निकालो मनी!

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– थाने में एनसीआर से लेकर एफआईआर तक के दाम फ़िक्स…

– पीड़ितों को आईजीआरएस पोर्टल और मुख्यमंत्री के टोलफ्री नम्बर 1076 का सहारा…

– पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाने को मजबूर फरियादी…

– पुलिस अधीक्षक के आदेश पर भी नही होती यहां सुनवाई…

Priyesh Kumar "Prince"

प्रियेश शुक्ला की रिपोर्ट,

देवरिया (उत्तर प्रदेश)। हुजूर हम पीड़ितों की कौन सुनेगा? यहां थाने में बिना पैसे के कोई सुनवाई नहीं होती। पीड़ितों को अमानवीय व्यवहार और अभद्रता के साथ थाने से बस इस लिए खदेड़ दिया जाता है कि मुक़दमा लिखाने के लिए पास में मोटी रकम नहीं होती है। ऐसे में मायूस और निराश फरियादी को पुलिस कप्तान से न्याय की गुहार लगानी पड़ती है।

Thana Madanpur

Janmanchnews.com

जनपद देवरिया के थाना मदनपुर ने पीड़ितों को न्याय देने की नई परम्परा खोज निकाली है। अगर आप पीड़ित है और आपके पास पैसा है तो आपकी सुनवाई पहले होगी। आप को न्याय के लिए भटकना नही पड़ेगा। लेकिन पीड़ित होने के बावजूद अगर आपके पास मोटी रकम नही है तो बस यह मान लीजिए कि थाने के चक्कर लगाते रह जाएंगे पर आपकी सुनवाई नहीं होगी। भले ही आपके प्रार्थना पत्र पर किसी उच्च प्रशासनिक अधिकारी का आदेश ही क्यों न हो।

मदनपुर थाने ने एनसीआर से लेकर एफआईआर तक की कीमत तय कर रखी है। जिस कारण पीड़ित को न्याय के लिए पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खट खटाना पड़ रहा है। यही वजह है कि थाने में समय पर मुक़द्दमा न पंजीकृत होने पर पीड़ित आईजीआरएस और 1076 जैसे जनसुनवाई पोर्टल व नम्बरों के सहारे न्याय पाने का रास्ता निकाल रहे हैं।

कई पीड़ित ऐसे भी है जो न्याय के लिए न्यायालय पर भरोसा जता रहे है तो कइयों को उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ रही है। जब कि थानों में पड़े फरियादियों के प्रार्थना पत्र पर महीनों तक किसी की नजर नही जाती है।

थाना मदनपुर में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि हर केस के पीछे एक बिचौलिया लगा रहता है जो मोटी रकम वसूल कर पहुँचाता है। फिर भी कोई शिकायत करने की स्थिति में नहीं रहता क्योंकि एक डर है कि कन्हीं साहब पुलिसिया जंजाल में फंसा न दें। लेकिन सोशल मीडिया से लेकर आम आदमी तक थाना मदनपुर के भ्रष्टाचार के क़िस्से आये दिन चर्चा में बने रहते है।

थाने में पीड़ितों को सुनने का कोई सिस्टम विकसित नहीं है। जिससे पीड़ित थाने से संतुष्ट हो कर जा सके। पीड़ितों से कम्युनिकेशन न होने के चलते भी पीड़ित अपने को थाने के दहलीज पर भी असहाय पाता है।

पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री और मंत्री तक के आदेश को ताख पर रख कर थाना अपने भ्रष्टाचार तंत्र की जड़ को सींच रहा है। जब कि असहाय गरीब और दर्द से कराहता पीड़ित न्याय के उम्मीद में टकटकी लगाए थाने में बैठा रहता है कि शायद अबकी बार न्याय मिल जाये। लेकिन इस थाने का बस यही एक मंत्र बन गया है कि “न्याय चाहिए तो निकालो मनी”।