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जिला प्रशासन के गले की हड्डी बनी शस्त्र आवेदन की अस्वीकृति

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बेताब अहमद की रिपोर्ट-

रोहतास। बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के बंगाई गांव निवासी उमाशंकर सिंह का शस्त्र लाइसेंस आवेदन की अस्वीकृति जिला प्रशासन के लिए गले की हड्डी साबित हो सकती है। आवेदन 12 साल पहले वर्ष 2007 में दिया गया था।

जिसका निष्पादन जिला प्रशासन द्वारा संवैधानिक तरीके से समय सीमा के भीतर नहीं किया गया। आवेदक उमाशंकर सिंह ने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को निष्पादित करने के लिए वर्ष 2011 में माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 19470/2011 दायर की थी।

याचिका आलोक में जिला प्रशासन द्वारा आवेदक के शस्त्र लाइसेंस को जान माल का खतरा नहीं होने और लघु किसान होने सहित शस्त्र प्रशिक्षण प्रमाण पत्र न होने का हवाला देते हुए आवेदन को शस्त्र अधिनियम की धारा 13 के तहत अस्वीकृत कर दिया गया।

इस मामले में आवेदक ने पुनः आवेदक द्वारा शस्त्र लाइसेंस आवेदन के निष्पादन प्रकिया को विधि सम्मत न होना बताते हुए माननीय उच्च न्यायालय में एम जे सी 530/2017 दायर किया गया।

आवेदक के अधिवक्ता विशाल सौरभ के अनुसार एम.जे.सी की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपाध्याय की एकल खंडपीठ ने आवेदक के पक्ष में कठोर फैसला सुनाते दूसरे पक्ष के सभी पक्षकारों को 25- 25 हजार अपने पाॅकेट से देने का फैसला सुनाया है। अगली सुनवाई माननीय 5 जुलाई को होगी।