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Pappu Yadav

बिहार में 1990 से सभी शिक्षा घोटालों की हो जांच- पप्पू यादव

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बेताब अहमद,

पटना : जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय संरक्षक व मधेपुरा सांसद पप्‍पू यादव ने कहा है कि राज्य के शिक्षा विभाग में 1990 से अबतक जितने भी घोटाले हुए हैं , उनकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार एक ऐसा राज्‍य है, जहां सरकारी नौकरियों की बहाली के लिए आयोजित प्रतियोगिता परीक्षाओं में पिछले 27 सालों से खुलेआम भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है.

इसमें सत्ता में बैठे राजनेता, उनके परिजन, विश्‍वस्‍त सहयोगी व उनके चाटुकार भ्रष्‍ट अधिकारियों तक की संलिप्‍तता रही है. नियुक्तियों की सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में जम कर लूट खसोट हुआ है। चाहे वह 1994 का दारोगा बहाली हो, या फिर आज 2017 में बीएसएससी में प्रश्‍नपत्रों की खुलेआम निलामी.

राजधानी पटना में आज एक संवाददाता सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने इन घोटालों के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को भी जिम्मेदार ठहराया एवं इनपर भ्रष्‍ट अधिकारियों से लगाव रखने का आरोप लगाया. सांसद ने कहा कि वर्तमान सरकार के शासन में परमेश्‍वर राम, मेवालाल चौधरी, लालकेश्‍वर एवं उनकी पत्नी तो लालू प्रसाद के समय में लक्ष्‍मी राय, जयप्रकाश यादव इत्यादि लोगों ने बहालियों में लगातार भ्रष्टाचार किया.

ऐसे ही घोटाले आज भी बदस्‍तूर जारी हैं. कार्रवाई के नाम पर तो खानापूर्ति होती है, लेकिन सत्ता शीर्ष से जो इन घोटालों को संरक्षण देते हैं. आज तक ना तो उन पर कार्रवाई हुई और न की सजा मिली..

जब सुप्रीमो ने बिहार की शिक्षा व्‍यवस्‍था को खस्‍ताहाल बताते हुए कहा कि राज्‍य में प्राथमिक और उच्‍च शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि बिहार की शिक्षा व्‍यवस्‍था को लालू – नीतीश की लूट ने संसत में भेज दिया है. दोनों भाईयों ने मिलकर राज्‍य में शिक्षा माफियाओं को सींचा है. इन्होने बिहार के प्रतिभाशाली छात्रों को ना सिर्फ ठगा, बल्कि प्रतिभा को जलील किया.

विकास की बात करने वाले नीतीश कुमार और बिहार को बर्बादी के राह ले जाने वाले लालू यादव आज भी लोगों को गुमराह कर अपनी दुकान चला रहे हैं.

उन्होंने कहा कि नीतीश व लालू ने मिलकर राज्‍य के संसाधनों को लूटा है. लेकिन अब नही. जन अधिकार पार्टी दोनों भाईयों के कारनामों को जनता के सामने रख बेनकाब करेगी. हम अब राज्‍य के प्रतिभाओं से ऐसे को खेलने का मौका नहीं देंगे.