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Gopi The Short Film

बिहार के लाल ने अपनी बेवकूफाना हरकतों से सभी लोगों का शॉर्ट फिल्म ‘गोपी’ से दिल जीता…

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Nikhil Vidyarthi

निखिल विद्यार्थी

पटना। हमलोग अपने जीवन में अक्सर कुछ ऐसें हरकतों को देखते हैं जो बहुत ही अजीब तरीके के होते हैं। उनके रोज की जिंदगी में कुछ भी नयापन जैसा नही होता।

ऐसे लोगों को हमारे समाज में निट्ठल्ला, मूर्ख न जाने क्या-क्या शब्दों से अलंकृत किया जाता है। मुमकिन है कि इन लोगों की फेहरिस्त में हम, आप कोई भी हो सकते हैं। लेकिन क्या कभी आपने ऐसा महसूस किया, आखिर वह शख्स ऐसा क्यों है?

जी हाँ, मैं आज बात कर रहा हूँ राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में सुर्खियों बटोर चूंकि शॉर्ट फिल्म ‘गोपी’ की। जो अपने रोज़मर्रा की जिंदगी में सिर्फ बेवकूफियों को दुहराने में माहिर है। गोपी का किरदार गाहे-बगाहे महान अभिनेता चार्ली चैपलिन से प्रभावित है।

‘गोपी’ को अबतक कई बड़े राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में दिखाया जा चुका है। जिसमें ‘स्क्रिप्ट इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ (सोशल एंड कॉर्पोरेट रेस्पोंसिबिलिटी इंटरनेशनल प्रमोशनल थिएटर, कोच्ची), ‘काला घोडा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’, ‘संकल्प इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’, ‘7th सिनेमा रेजिस्टेंस’ आदि। इसके अलावे एनडीटीवी के प्राइम टाल्कीस में शॉर्ट लिस्टेड की गयी।

Gopi The Short Film

File Photo: Gopi | The Short Film

2014 में बनी इस शॉर्ट फिल्म को पटना के युवा फिल्म-मेकर और फोटोग्राफर शिव कुमार सिंह ने निर्देशित किया है। शिव ने इसे अपने ही स्टूडियो-प्रोडक्शन ‘फोटोग्राफिया स्टूडियो’ से निर्माण किया है।

फिल्म में गोपी का टाइटल किरदार निभाया है पटना के युवा अभिनेता विक्रांत चौहान ने। विक्रांत इस फिल्म में कुछ ख़ास होने की बात पर कहते हैं, ‘बिहार में ऐसे फिल्मों की प्रोडक्शन कम देखी गयी है, जिसमें किसी किरदार को डबल रोल में फिल्माया गया हो। इसलिए हमने इसे शॉर्ट फिल्म होते हुए भी किरदार को और प्रभावशाली बनाने के मकसद से गोपी का दोहरा किरदार गढ़ा।’

‘गोपी’ इस बात के लिए भी ख़ास है कि इस सीरीज के प्रस्तावित 10 फिल्मों के शुरूआती तीन फ़िल्में काफी सराही गयी हैं। पटना के कई शैक्षणिक संस्थानों में भी गोपी की स्पेशल स्क्रीनिंग कराई गयी ताकि बच्चें उसकी बेवकूफियों से कुछ समझें कुछ सीखें, जिसमे बहुत हद तक फिल्म के निर्देशक और अभिनेता विक्रांत सफल भी रहे। यह बिहार में बनी पहली शॉर्ट फिल्म है जिसमें एक ही किरदार की दोहरी भूमिका गढ़ी गयी।

फिल्म में एडिटिंग का ज़िम्मा मयूरी सिन्हा को था। जिसने बखूबी गोपी को जीवंत दिखाने में काफी अच्छे तरीके से वीएफएक्स कंट्रोल का प्रयोग किया है।

गोपी एक बेवकूफ किरदार है लेकिन स्मार्ट फूल है। वह समाज को अपने नज़रिए से देखता है। वह मूर्ख है लेकिन समाज को आइना दिखाता है। इस शॉर्ट फिल्म के और दिलचस्प पहलुओं को जानने के लिए इस लिंक पर देखें…

‘गोपी’ की बेबकूफियों को देखें…..

‘गोपी’ को 10 मई से शुरू हो रहे ‘पटना शॉर्ट एंड डाक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल’ में चयनित भी किया गया है।

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