अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर ‘फर्टिलिटी शिक्षा अभियान‘ शुरू किया गया

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Hariom Kumar

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नई दिल्ली। इस अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर डॉ. ज्योति बाली, मेडिकल डायरेक्टर, बेबीसून फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर और सेके्रटरी, दिल्ली गायनकोलाॅजी फोरम एवं ज्वांइट सेके्रटरी, डाॅक्टर वुमन विंग, इंडियन मेडिकल असोसिएशन द्वारा एक खास ‘फर्टिलिटी एजुकेशन अभियान‘ की शुरूआत की गई हैै।

इस अभियान का उद्देश्य इनफिर्टिलिटी पर शैक्षिक कार्यक्रम चलाकर युवाओं में तेजी से बढ़ रही इनफर्टिलिटी की समस्या को रोकना है। इस अभियान के तहत डाॅ ज्योति बाली, स्कूलों एवं संस्थानों में फर्टिलिटी अवेयरनेस पर विशेष वर्कशाॅप का आयोजन करेंगी।

‘फर्टिलिटी शिक्षा अभियान’ के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. ज्योति बाली ने कहा कि जैसे सेक्स और रिलेशनशिप एजुकेशन बच्चों के वर्तमान के लिए महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार फर्टिलिटी एजुकेशन उनके भविष्य के लिए भी जरूरी है। इसलिए अगर हम बांझपन को रोकने में एक बड़ा प्रभाव डालना चाहते हैं, तो फर्टिलिटी शिक्षा को एजुकेशन एजेंडा में सबसे ऊपर रखना होगा।

बच्चे को जन्म देना एक ऐसा मूलभूत मानवीय अधिकार है और इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए लड़के और लडकियों में भविष्य की उर्वरता को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जानकारी प्रदान करना आवश्यक है।

‘फर्टिलिटी शिक्षा अभियान‘ के द्वारा हम सरकार से यह अनुशंसा करते हैं कि प्रजनन शिक्षा एक अनिवार्य मॉड्यूल होना चाहिए, जिसमें यह शामिल होना चाहिएः-

1. यौन व्यवहार, एसटीआई और गर्भपात के परिणामस्वरूप ट्यूबल क्षति आदि

2. एक महिला के ओवम रिजर्व में उम्र के साथ होने वाले परिवर्तन।

3. प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक।

4. पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारक।

5. प्रेगनेंसी में देर करने की समय सीमा। उन्हें बताया जाना चाहिए कि यदि वे 1 बच्चा चाहते हैं तो उन्हें 35 वर्ष की आयु से पहले गर्भ धारण करने की कोशिश करनी चाहिए और दो बच्चों के लिए 31 वर्ष की उम्र की समय सीमा तक पहला बच्चा हो जाना चाहिए।

6. फर्टिलिटी जांच और उपचार के विकल्प की जानकारी भी आवश्यक है।

7. यदि किसी कारण वश कोई प्रेग्नेंसी को 35 के बाद करना चाहता है तो इस स्थिति में उन्हें अण्डाणु और शुक्राणुओं की फ्रीजिंग के बारे में जानकारी भी अवश्य दी जानी चाहिए।

आगे डाॅ ज्योति बाली ने कहा कि मेरा मानना है, इनफर्टिलिटी के बारे में जागरूकता के द्वारा ही हम, देश में तेजी से बढ़ रही इनफर्टिलिटी की समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं।