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Nirbhaya case accused

पढ़िए- मौत करीब देख निर्भया के चारों आरोपियों के व्यवहार में आया बदलाव

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New Delhi: Nirbhaya Case 2012 डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया के चारों दोषियों की नींद उड़ी हुई है, लेकिन सबसे ज्यादा विनय परेशान है। जेल सूत्रों का कहना है कि उसके चेहरे पर मौत का खौफ साफ नजर आता है। उसे मामूली बात पर भी गुस्सा आ जाता है। जेल प्रशासन विनय के व्यवहार पर नजर रख रहा है। जेल अधिकारी व कर्मचारी बातचीत के दौरान उसे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में विशेषज्ञों से उसकी काउंसिलिंग भी कराई जा सकती है, ताकि 22 जनवरी तक वह सामान्य रहे। बता दें कि विनय ही वह दोषी है, जिसने करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व जेल संख्या आठ में आत्महत्या की कोशिश की थी। संयोग से उसपर ड्यूटी पर तैनात तमिलनाडु पुलिस की नजर पड़ गई और उसे बचा लिया गया।

मंगलवार को विनय के पिता ने की मुलाकात

मंगलवार को जेल संख्या-चार में बंद दोषी विनय से मुलाकात करने उसके पिता पहुंचे। दोनों की मुलाकात जेल अधीक्षक कार्यालय परिसर में कराई गई। करीब एक घंटे तक दोनों मिले। मुलाकात के बाद विनय पहले की तुलना में कुछ कम परेशान दिख रहा था। आने वाले समय में इसके अन्य रिश्तेदारों के मुलाकात के लिए आने की संभावना है।

मुकेश से मिल चुकी है उसकी मां

इससे पहले मुकेश से मुलाकात के लिए उसकी मां शुक्रवार को जेल संख्या दो में आई थी। यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली। पवन से भी समय समय पर उसके रिश्तेदार मिलने आते रहते हैं। जेल सूत्रों के अनुसार जेल संख्या दो में बंद दोषी अक्षय से नवंबर के बाद से अब तक किसी ने मुलाकात नहीं की है। हालांकि अक्षय ने जेल प्रशासन को अपने परिवार से अब तक किसी को बुलाने की बात नहीं कही है। जेल सूत्रों का कहना है कि मुलाकात के लिए उसके परिजन भले ही न आते हों, लेकिन फोन से वह परिवार के संपर्क में रहता है।

अंतिम फाइल के लिए रिकॉर्ड खंगाल रहा जेल प्रशासन

निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने की तिथि नजदीक आ रही है, जेल प्रशासन इनके रिकॉर्ड को खंगाल रहा है ताकि इनकी एक अंतिम फाइल तैयार की जा सके। जेल सूत्रों का कहना है कि दोषियों में मुकेश ऐसा है जिसने जेल में कोई काम नहीं किया है। अक्षय, पवन व विनय ने जेल में समय-समय पर कार्य किए। इस एवज में इन्हें जेल प्रशासन की ओर से मेहनताना भी दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अक्षय ने करीब 69 हजार रुपये बतौर मेहनताना कमाए। वहीं पवन ने 29 हजार तो विनय ने करीब 39 हजार रुपये कमाए। कैदियों की कमाई को जिस खाते में रखा जाता है, उसे कैदी कल्याण खाता कहा जाता है। इस खाते में जमा रुपयों का दोषी क्या करेंगे, इस बाबत इन्होंने जेल प्रशासन से अभी तक कुछ नहीं कहा है। जेल सूत्रों का कहना है कि ये जिस व्यक्ति के खाते में रुपये जमा करने को कहेंगे, उसके खाते में उतने पैसे डाल दिए जाएंगे। ये चाहें तो ये पैसे खुद भी खर्च कर सकते हैं। यदि इन्होंने कुछ नहीं कहा तो फांसी के बाद इनके पैसे पर परिजनों का हक होगा। जेल सूत्रों का कहना है कि जल्द ही जेल प्रशासन इस बाबत दोषियों से बात करेगा।

पढ़ाई-लिखाई में फिसड्डी

जेल सूत्रों के अनुसार, 2016 में मुकेश, पवन व अक्षय ने ओपन स्कूल में दसवीं कक्षा में दाखिला लिया था। परीक्षा भी दी थी, लेकिन ये उत्तीर्ण नहीं हो सके। इसी तरह विनय ने बीए में दाखिला कराया, लेकिन इसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई।