BREAKING NEWS
Search
Diwali 2020

शुक्रवार शाम को करें यम पूजा और दीपदान, शनिवार को सुबह होगा औषधि स्नान

357
Share this news...

New Delhi: कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को रूप चतुर्दशी या नरक चौदस के रूप में मनाया जाता है। स्कंद पुराण के मुताबिक, इस तिथि में शाम को यमराज के लिए दीपदान देने से अकाल मृत्यु नहीं होती। वहीं, भविष्य और पद्म पुराण का कहना है कि चतुर्दशी तिथि में सूर्योदय से पहले उठकर अभ्यंग यानी तेल मालिश कर के औषधि स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से बीमारियां खत्म होती हैं और उम्र बढ़ती हैं।

ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि चतुर्दशी तिथि 13 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे से शुरू होकर 14 की दोपहर 2 तक रहेगी। इसलिए यम दीपदान शुक्रवार की शाम को करना चाहिए और औषधि स्नान 14 नवंबर को सूर्योदय से पहले करना शुभ रहेगा।

दीपदान और यम पूजन

Yama puja

कार्तिक महीने की चतुर्दशी तिथि पर यमराज को प्रसन्न करने के लिए सूर्यास्त के बाद दक्षिण दिशा में दीपदान करने से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है और जाने-अनजाने में किए गए हर तरह के पाप भी खत्म हो जाते हैं। प्रसन्न होकर यम आरोग्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद देते हैं। इससे परिवार में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आती।

अभ्यंग और औषधि स्नान

 Aushadhi Sanaan

भविष्यपुराण के मुताबिक, कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को नहाने से पहले तिल के तेल की मालिश करनी चाहिए। तिल के तेल में लक्ष्मीजी और जल में गंगाजी का निवास माना गया है। इससे रूप बढ़ता है और सेहत अच्छी रहती है। पद्मपुराण में लिखा है कि जो सूर्योदय से पहले नहाता है, वो यमलोक नहीं जाता। इसलिए इस दिन सूरज उदय होने से पहले औषधियों से नहाना चाहिए।

Share this news...