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इंट्रेपेड डिवाईस महिलाओं को बनाएगा ‘निडर’ और ऐसिड अटैक के बाद भी अब चेहरे बोलेंगे “ब्यूटीफुल मी”

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– एम आई टी छात्रा मनीषा मोहन ने बनाया “इंट्रेपेड” डिवाईस…

– भारतीय बाजारों में एक डिवाईस की क़ीमत सिर्फ सात सौ रुपये होगा…

– ऐसिड अटैक को बेअसर बनाएगा “ब्यूटीफुल मी” क्रीम…

– देवरिया के लोकल ब्रांड “देवरिया डिज़ाइन” को मिला मनीषा मोहन का साथ…

– जागृति यात्रा की यात्री रह चुकी है मनीषा मोहन

Priyesh Kumar "Prince"

प्रियेश कुमार “प्रिंस”

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। अमेरिका के एक युवा वैज्ञानिक का देवरिया के गाँव देहात की गलियों और पगडंडियों में घूमना सोचने पर मजबूर करता है। ऐसे में जब पता चला कि अमेरिका के मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी से एमआईटी की छात्रा मनीषा मोहन देवरिया के सुरौली – पैकौली चौराहे पर दर्जन भर महिलाओं को स्वालम्बन और सुरक्षा के गुर सीखा रही है। मौके पर जाकर देखा तो भीड़ के बीच टाटपट्टी पर बैठी एक साधारण कद काठी की युवा वैज्ञानिक मनीषा मोहन महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के साथ साथ स्वरोजगार के उपाय को बता रही थी।

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फोटो: देवरिया डिजाइन के टीम के साथ मनीषा मोहन

बातचीत के दौरान पता चला कि मनीषा मोहन पड़ोसी राज्य बिहार के दानापुर जनपद की रहने वाली है। इनके पिता प्रो. कृष्ण मोहन पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर है और माँ डॉ. निशि मोहन जानी मानी लेखिका है। लेकिन मनीषा मोहन जब 2014 में जब पहली बार 15 दिन के जागृति यात्रा पर थी तो इनका जुड़ाव देवरिया जनपद से हो गया। एक युवा वैज्ञानिक होने के चलते मनीषा मोहन ने महिलाओं के सुरक्षा को लेकर तमाम खोज कर रही है जिसमें सबसे बड़ी पहचान और उपलब्धि “इंट्रेपेड” डिवाईस को बनाने के बाद 2017 में मिली।

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फोटो: युवा वैज्ञानिक मनीषा मोहन

आये दिन महिलाओं के साथ जिस तरह से आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं, उसे ध्यान में रखते हुए एमआइटी के युवा साइंटिस्ट मनीषा मोहन ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जो ऐसी किसी विषम परिस्थिति में महिलाओं के लिए मददगार साबित हो सकता है। इस डिवाइस का नाम है- इंट्रेपेड यानी ‘निडर’। इस डिवाइस के साथ एक स्टिकर अटैच है, जिसे अपने कपड़े पर लगाना होता है।

कैसे काम करता है इंट्रेपेड डिवाइस…

जब किसी महिला के वस्त्र उसकी इच्छा के विरुद्ध उतारे जाते हैं, तो इस स्टिकर पर लगा अलार्म बज उठता है। दरअसल, इस स्टिकर में ऐसी व्यवस्था है कि वह जबरदस्ती की प्रक्रिया को समझ सकता है। इस सेंसर में चार लेयर लगे हैं, जो कपड़े उतारने की प्रक्रिया में हुई जबर्दस्ती और सहमति को समझ सकते हैं।

ऐसी व्यवस्था भी है कि अगर महिला बेहोश हो, लाचार हो या नशे में चूर हो, तो वह समझ सके। इसके अंदर एक ब्लूटूथ है, जिसे स्मार्टफोन से अटैच करना होता है। जब महिला खतरे में होती है, तो उसके रिश्तेदारों, दोस्तों और घरवालों को तेज आवाज में अलर्ट जाता है। यह डिवाइस दो मोड में काम करता है, एक्टिव और पैसिव।

अगर कोई अन्य व्यक्ति किसी महिला के कपड़े उतारने की कोशिश करता है, तो स्मार्टफोन पर एक अलर्ट आता है कि इसमें उसकी सहमति है या नहीं। अगर महिला 30 सेकेंड के अंदर रेस्पॉन्ड नहीं करती, तो यह अलर्ट मैसेज फोन में इस एप्प के साथ सेव किये गये रिश्तेदारों और दोस्तों को के फोन पर फॉरवर्ड हो जाता है। साथ ही उसका लोकेशन भी बता दिया जाता है, ताकि वे तुरंत उसकी मदद कर सकें।

यह डिवाइस ब्लूटूथ के जरिये फोन से कनेक्ट होता है। स्टिकर को महिला के ड्रेस में अटैच किया जाता है। डिवाइस को यूज करने के लिए स्टिकर को पहननेवाली महिला को संबंधित एप्प डाउनलोड करना होता है, जो डिवाइस और स्टिकर को आपस में कनेक्ट करता है। तभी यह डिवाइस काम करता है। मनीषा ने बताया कि शुरुआती दौर में डिवाईस के निर्माण के समय कुल 40 डालर का ख़र्च लगा था। लेकिन आज के समय इंट्रेपेड यानी निडर डिवाईस की कीमत 8 से 10 डॉलर यानी लगभग सात सौ रुपये तक मे उपलब्ध होगी।

मनीषा की कोशिश है कि इंट्रेपेड यानी निडर डिवाईस अधिक से अधिक आम महिलाओं तक पहुँचे ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। फिलहाल भारतीय महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत में ही इसका उपयोग शुरुआती दौर में किया जाएगा। भारत में यह डिवाईस लगभग एक साल के अंदर देश के आम से खास महिलाओं तक उपलब्ध हो जाएगा।

क्या है “ब्यूटीफुल मी” क्रीम…

जब दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था तब मनीषा मोहन चंडीगढ़ में ही थी और चेन्नई से ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी। लेकिन निर्भया कांड ने मनीषा को अंदर तक झकझोर दिया था। तभी से महिला सुरक्षा का सवाल अहम हो गया था। इंट्रेपेड यानी निडर डिवाईस के बाद मनीषा मोहन महिलाओं के ऊपर होने वाली ऐसिड अटैक जैसी घटनाओं से बचाने के लिए एक विशेष तरह के क्रीम का निर्माण 2016 से ही कर रही है। इस क्रीम को “ब्यूटीफुल मी” नाम दिया गया है। यह क्रीम ऐसिड अटैक होने पर ऐसिड के प्रभाव को निष्क्रिय कर देता है। क्रीम साधारण तरीके से ही चेहरे पर लगाई जाती है। लेकिन भारतीय बाजारों में अभी ब्यूटीफुल मी उपलब्ध नहीं है। सफ़ल प्रयोग हो जाने के बाद दुनिया के आम महिलाओं के पहुँच तक हो जाएगी।

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फोटो: महिलाओं के बीच इंट्रेपेड डिवाईस के साथ मनीषा मोहन

देवरिया डिज़ाइन से सजेगी दुनिया…

जाते-जाते मनीषा मोहन ने देवरिया के प्रति अपने लगाव और जुड़ाव को बताया कि 2015 में मैं पहली बार 15 दिन के लिए जागृति यात्रा पर थी। उसी यात्रा के दौरान यात्री रही “देवरिया डिज़ाइन” की संस्थापक पूजा शाही और प्रीति करंडिकर से हुई। पूजा और प्रीति देवरिया के लोकल ब्राण्ड देवरिया डिज़ाइन के माध्यम से 40 महिलाओं के समूह के साथ मिलकर आर्टिफिशियल ज्यूलरी का निर्माण करती है। आज देवरिया डिज़ाइन के कामयाबी का आलम यह है कि पूरे हिंदुस्तान में 50 से अधिक रिटेल स्टोर पर देवरिया की चमक दिखती है। जबकि हिंदुस्तान के बाहर अमेरिका और दुबई तक देवरिया डिज़ाइन की बनी ज्यूलरी की डिमाण्ड होने लगी है। आने वाले समय में देवरिया में बनी ज्यूलरी से पूरी दुनिया सजेगी और देवरिया की खूबसूरत नक्कासी हर चेहरे में चार चांद लगाएगी।

देवरिया डिज़ाइन को युवा वैज्ञानिक मनीषा मोहन का साथ मिलने पर पूजा शाही काफी खुश है। पूजा का कहना है कि अभी तक हमे जागृति सेवा संस्थान और शशांक मणि त्रिपाठी का सहयोग मिल रहा था, लेकिन मनीषा जैसे प्रबुद्ध और तकनीकी विचार की महिला का देवरिया डिज़ाइन को सपोर्ट करना हमारे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

मनीषा मोहन की उपलब्धियां…

गाँधीयन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवॉर्ड (2013)

एन सी डब्लू टीआई (2017)

वोमेन्स एक्सीलेंस अचीवमेंट अवार्ड (2017)

सोशल इम्पेक्ट कैटेगरी (2018)