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हाईकोर्ट के इस आदेश से काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की दादागिरी पर लगा विराम

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मुख्य सचिव यूपी शासन, डीएम, एसएसपी, कमिश्नर, विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह को तीन सप्ताह के अंदर दाखिल करना होगा शपथपत्र…

Tabish Ahmed

ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण योजना को तगड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति यूसी त्रिपाठी की डबल बेंच ने किरायेदार मुन्नी तिवारी आदि की तरफ  से दाखिल याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

साथ ही, मामले में पक्षकार बनाए गए मुख्य सचिव यूपी शासन, डीएम, एसएसपी, कमिश्नर, विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह को तीन सप्ताह के अंदर शपथपत्र और याचीगण को उसके बाद दो सप्ताह में प्रतिशपथ दाखिल करने का आदेश दिया है।

याचिका में कहा गया था कि मकान मालिकों से सांठगांठ करके मंदिर और जिला प्रशासन पहले विश्वनाथ मंदिर के अगल-बगल के मकानों को विस्तारीकरण के नाम पर क्रय कर रहा है, फिर वर्षों से उन मकानों में रह रहे किरायेदारों को जबरन बेदखल कर मकानों का ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। यहां तक की मकान के दूसरे माले पर किरायेदार साड़ी के गद्दीदार व्यापार में मसरूफ होते और ठेकेदार दिलीप यादव तीसरे माले के ध्वस्तीकरण में लगा रहता। इसी कड़ी में एक गद्दीदार की गद्दी पर छत से एक भारी-भरकम पटिया (पत्थर का टुकड़ा) टूटकर नीचे कारीगर के बिल्कुल बगल में गिरा था, किस्तम ही थी कि कारीगर की जान बच गई, लेकिन दबंग ठेकेदार नें काम नहीं रोका।

 

देखिए यह रिपोर्ट…

 

इससे उनका जीवन यापन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ज्ञानवापी मोड़ स्थित विट्ठल भवन की खरीद के बाद प्रशासन की ओर से उसमें रह रहे 18 किरायेदारों को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए बेदखल कर मकान ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा था।

इसी से प्रभावित होकर किरायेदार मुन्नी तिवारी और अन्य ने अपने अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ के जरिये हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका पर सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल अजित सिंह और विश्वनाथ मंदिर की तरफ से विनीत संकल्प और याची की तरफ  से आशीष सिंह की दलीलें सुनने के बाद 31 मई को हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया।