Back Pain

अगर आपको है कमर दर्द की शिकायत, तो इसे अनदेखा न करें, नहीं तो हो सकती है यह बीमारी

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हेल्थ। हालांकि कमर दर्द को तो कलयुग की आम बीमारी माना जाता है। पुरुष व महिलाएं सभी इसका बराबरी से शिकार रहे हैं। अमेरिका में किए गए एक शोध से पता चलता है कि न्यूरो संबंधित समस्याओं में सिरदर्द के बाद कमर दर्द सबसे अधिक देखने को मिलता है। कार्यस्थल से संबंधित यह सबसे बड़ी समस्या है।

कमजोरी हो तो कमर में दर्द, कमर में कहीं चोट लग जाए तो कमर में दर्द, गलत पोस्चर का सीधा असर हमारी कमर पर होता है और कमर दर्द होने लगता है। रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या हो जाए तो कमर में दर्द हो जाता है।

हालांकि यह सभी कारण तो जाने बूझे व समझ में आते हैं। लेकिन एक और ऐसा कारण है जो कि कमर दर्द की उत्पत्ति भी करता है और बढ़ावा भी देता है। वैसे जब आप उस कारण के बारे में जानेंगे, तो आप को लगेगा कि इसका कमर से क्या लेना-देना?

किसी-किसी केस में कमर दर्द की वजह किडनी यानी गुर्दों में समस्या भी हो सकती है। सबसे दुखद बात तो यह है कि लोगों को इस बात का पता ही नहीं है कि गुर्दों में समस्या हो तो कमर दर्द होना उसका एक बड़ा लक्षण हो सकता है। यदि समय रहते इसका सही कारण का पता न चल पाए, तो आगे चलकर यह बड़ा भयानक रूप ले सकता है।

दरअसल, कमर दर्द को मामूली सा मानकर लोग बिना कारण जाने दर्द निवारक दवाइयां लेते रहते हैं, जिसका एक बुरा असर उनके गुर्दों पर होता रहता है और वे इससे अनजान रहते हैं कि वे कितनी बड़ी समस्या को न्यौता दे रहे हैं?

क्या करें ऐसे कमर दर्द के केस में-

यदि आप को ऐसा कमर दर्द हो, जिसमें आप की नियमित दिनचर्या दुष्प्रभावित हो रही हो, एडियों व मांसपेशियों में सुन्नपन के साथ कमजोरी महसूस हो रही हो, तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। कोई भी दर्द निवारक लेने से पहले डाक्टर से पूछ लें कि ये कहीं आप की किडनी को तो नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

यदि आप को पेशाब या शौच करने में कोई भी समस्या हो या अवरोध हो, पेशाब या शौच के साथ रक्त आए तो भी तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। कम उम्र में ही मधुमेह या हाइपरटेंशन का शिकार या रेनल फेल्योर और रेनल स्टोन का इतिहास रखने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की दवा का सेवन करने से पहले डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए।

फिट व ऐक्टिव रहें-

रोजाना की दिनचर्या में अधिक गतिविधियों व शारीरिक श्रम को शामिल करें, जिससे आप का रक्तचाप बराबर बना रहे व किडनी पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाए।

अपने डायबिटीज को नियंत्रण में रखें-

वे लोग जो कि डायबिटीज के मरीज हैं, उनमें से लगभग आधे लोग किडनी समस्या से पीड़ित हैं। इन लोगों के लिए आवश्यक है कि वे अपनी नियमित जांच कराएं और किडनी जांच पर विशेष तौर पर ध्यान दें। डायबिटीज से होने वाली किडनी समस्या का उपचार उपलब्ध है, बशर्ते समय रहते उसका निदान किया जा सके। अपने शुगर लेवल को नियंत्रण में ही रखें।

अपने रक्तचाप पर निगरानी रखें-

आप का रक्तचाप जितना कम होगा आप की किडनी की कार्यशैली भी उतनी देर से ही दुष्प्रभावित होगी। हालांकि बहुत से लोगों को यह पता है कि उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक हो सकता है लेकिन बहुत कम लोगों को ही यह मालूम है कि इससे किडनी को भी नुकसान पहुंच सकता हैै, विशेषकर उन केसों में जहां पीडित दिल की समस्या व डायबिटीज से पीडि़त होता है।

स्वस्थ खाएं लेकिन वजन पर भी रखें नजर-

यदि आप अपने खाने या आहार पर ध्यान देते हैं तो आप अपनी आधी समस्या पर तो ऐसे ही काबू पा सकते हैं। अपने नमक सेवन को कम करें। एक दिन में केवल 5-6 ग्राम नमक का ही सेवन करें। बाहर के खाने की मात्रा को कम करें और खाने में अलग से नमक का इस्तेमाल न करें। यदि आप ताजी सामग्री से अपने लिए खुद खाना बनाएंगे तो आप आसानी से ऐहतियात रख सकते हैं।

धूम्रपान न करें- 

धूम्रपान करने से किडनी तक पहुंचने वाले रक्तप्रवाह की मात्रा कम होने का खतरा रहता है। धूम्रपान से किडनी कैंसर होने का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसलिए धूम्रपान त्याग दें।

दवाइयों का अधिक सेवन-

कुछ दवाइयां जैसे ब्रुफेन आदि का सेवन नियमित तौर पर न करें, क्योंकि ये दवाइयां कहीं न कहीं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि आप के लिए ऐसी दर्दनाशक दवाइयां लेना मजबूरी है, तो डाक्टर से बात करके ऐसी दवाइयों का सेवन करें जो कि किडनी को नुकसान न पहुंचाए।