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टीकाकरण की रफ़्तार बढ़ाने के लिए वैक्सीन पर आयात शुल्क माफ करेगा भारत

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नई दिल्ली। भारत में कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। देश में अबतक कुल 12.71 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जी चुकी है। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने विदेशी वैक्सीन को भी मंजूरी दी है। इस बीच खबर यह है की सरकार ने वैक्सीन पर लगने वाले अपने सीमा शुल्क को माफ करने का फैसला किया है।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को रायटर को बताया कि देश में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी को देखते हुए और टीकाकरण की रफ्तार को बढ़ाने के लिए केंद्र आयातित कोरोना वैक्सीन पर अपने 10 फीसद सीमा शुल्क को माफ करने का फैसला लिया है। वहीं, देश में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी जल्द ही आने वाली है और सरकार ने फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन को भी भारत में अपने उत्पाद बेचने की इजाजत दी है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार निजी संस्थाओं को सरकारी हस्तक्षेप के बिना खुले बाजार में वैक्सीन की बिक्री के लिए अनुमति देने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही कंपनियों को टीकों का मूल्य निर्धारण करने की स्वतंत्रता भी दी जा सकती है। भारत सरकार वर्तमान में देश में सभी वैक्सीन की बिक्री और खरीद को नियंत्रित करती है। बता दें कि नेपाल, पाकिस्तान सहित अन्य दक्षिण एशियाई देशों साथ अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे लैटिन अमेरिकी देशों ने 10 फीसद से 20 फीसद के बीच वैक्सीन आयात शुल्क लगाया है।

 सरकार ने अब एक मई से 18 साल से उपर के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू करने का फैसला किया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में टीकाकरण का दायरा बढ़ाने पर मुहर लगी। अब वैक्सीन उत्पादक कंपनियां सीधे बाजार में भी वैक्सीन बेच सकेंगी। इसके साथ ही पुरानी व्यवस्था भी चलती रहेगी। केंद्र सरकार की ओर से पहले से तय 45 साल से अधिक उम्र के लोगों, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण सरकारी केंद्रों पर निशुल्क और निजी केंद्रों पर 250 रुपये में होता रहेगा।
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