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ऐसी भी क्या जल्दी थी इरफान भाई…अभिनेता इरफान के निधन पर विशेष

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Naveen Sharma

नवीन शर्मा की कलम से…,

जनमंच विशेष। कल शाम को दफ्तर में काम के दौरान किसी का पोस्ट पढ़ कर सूचना मिली थी कि अभिनेता इरफान की तबीयत खराब है और वो इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल हुए हैं।

मैं दो साल पहले उनको हुए गले के कैंसर तथा उसके खिलाफ चली उनकी लंबी लड़ाई के बारे में जानता था। इसलिए उस सूचना को उतनी गंभीरता से नहीं लिया था। मैंने सोचा वे फाइटर हैं दो चार दिन इलाज के बाद वापस लौट आएंगे।

मैंने बुरे सपने में भी नहीं सोचा था कि वे इस बार वापस लौटने के लिए नहीं बल्कि हमेशा के लिए अलविदा कह कर जा रहे हैं। मैं फिर से काम में लग गया। सुबह भी रोजमर्रा के काम के बीच कुछ पढ़ लिख रहा था। इसी बीच दोपहर में सूचना मिली कि इरफान की मौत हो गई है। एकबारगी यकीन नहीं हुआ तो कुछ वेबसाइट देखीं तो खबर सही निकली।

इनटेंस और प्रतिभावान…

इरफान बॉलीवुड के सबसे इनटेंस और प्रतिभावान अभिनेताओं में शुमार हैं। इरफान करीब दो दशक से फिल्म इंडस्ट्री में हैं। पहली बार इरफान ने लाइफ इन मेट्रो फिल्म में अपने स्वभाविक अभिनय से मेरा ध्यान खींचा था।

सबसे बेहतरीन अभिनय पान सिंह तोमर में…

इरफान की सबसे लाजवाब फिल्म पान सिंह तोमर है। फिल्म डाकू पान सिंह तोमर की बॉयोपिक है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक अव्वल खिलाड़ी और सैनिक परिस्थितियों के दवाब में डाकू बन जाता है। इसमें हमारी शासन व्यवस्था की खामियों को बहुत ही बेहतरीन ढंग से पेश की है। इरफान का अभिनय तो बेहतरीन है।

irafan khan

Photo: इरफान खान

इस कहानी की पृष्ठभूमि चंबल का इलाका है। यह मप्र, राजस्थान और यूपी का बार्डर है। यहां ब्रज भाषा बोली जाती है। इरफान ने मुरैना व भिंड में जो बिहड़ का इलाका है उसकी बोली को बहुत ही सहज ढंग से अपनाया है। इरफान ने एक सैनिक के परिस्थितियों के दवाब में डाकू बनने की मजबूरी को बहुत अच्छे ढंग से दिखाया है।

गमांशु धुलिया के निर्देशन में बनी फिल्म में इरफान एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के डेडिकेशन और उसके दौड़ने के प्रति जुनून को बहुत ही विश्वसनीय ढंग से पेश करते हैं। इसके बाद डाकू की भूमिका में भी वे जान डाल देते हैं। इरफान की डॉयलॉग डिलीवरी कमाल की हैं। वे अपनी बड़ी बड़ी आंखों से भी बहुत कुछ बयान कर देते हैं।

इरफ़ान को 60वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में पान सिंह तोमर में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया।

पिकू में अलग अंदाज…

वैसे तो पिकू में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण लीड रोल में हैं लेकिन इरफान कम स्क्रीन स्पेस मिलने के बाद भी अपने सहज अभिनय के बल पर छाप छोड़ने में सफल रहे हैं।irfan khan in piku

इसमें वे एक टैक्सी सर्विस प्रोवाइडर के रोल में हैं जो पिकू और उसके पिता को टैक्सी से दिल्ली से कोलकाता ले जाता है। इस सफर में इन तीनों कलाकारों की केमिस्ट्री कमाल करती है।

लंच बॉक्स…

इरफान की एक और बढ़िया फिल्म लंच बॉक्स है। इसमें एक आफिस में काम करने वाले कर्मचारी की भूमिका इरफान ने बहुत अच्छे ढंग से निभाई।lunch box irfan khan

मदारी भ्रष्टाचार को बेनकाब करने की इंटेनस स्टोरी…

भ्रष्टाचार का जहर हमारे जीवन में काफी गहरे तक समा गया है। यह कैंसर जैसे असाध्य रोग का रूप ले चुका है। इसमें नेता, सरकारी अधिकारी, ठीकेदार, व्यवसायी,पुलिस और बिचौलियों की एक लंबी श्रृंखला बन गई है। मदारी फिल्म इसी भ्रष्टाचार की चपेट में आए एक आम आदमी के संघर्ष की संवेदनशील कहानी है। मुंबई के रहने वाले एक आम शहरी निर्मल (इरफान) का सात साल का बच्चा फ्लाइओवर गिरने से मलबे में दबकर मर जाता है।madari irfan khan

निर्मल बस इतना चाहता है कि घटिया पुल निर्माण में शामिल तथा इसमें घूसखोरी की रकम डकारनेवालों का नाम सामने आए। इस पुल निर्माण में सत्तारूढ़ दल का महत्वपूर्ण नेता तथा पार्टी फंड के नाम से पैसे लेने में गृहमंत्री तक शामिल हैै। ऐसे में फ्लाइओवर गिरने के दोषी लोगों के नाम सामने आने मुमकिन नहीं थे। इस वजह से बाध्य होकर निर्मल अनोखा और हिंसक कदम उठाता है। वह गृहमंत्री के बेटे को अगवा कर लेता है।

निर्मल बने इरफान ने बेटा खोने के दर्द को बड़े ही इंटेनस तरीके से एक्टिंग से बयां किया है। वे अपने चेहरे के दर्द गहरे डूबे भाव और बड़ी और डबडबाई आंखों से अपना सार दुख दर्शकों तक पहुंचा देने में पूरी तरह सफल रहे हैं। उनकी आंसूओं से भीगी आंखे दर्शकों की भी आंखें नम कर जाती हैंं।

फिल्म के शुरू में इरफान का एक डायलॉग है बाज चुजे पर झपटे तो ये कहानी सच लगती है, चुजा पलटवार करे ये कहानी झूठ सही पर अच्छी लगती है। मदारी भी एक आम आदमी के बेबस होकर व्यवस्था पर काबिज बाज जैसे ताकतवर लोगों के खिलाफ एक चुजे के पलटवार की दास्तां है। ये सच्ची भले नहीं लगे पर अच्छी जरूर लगती है।

तलवार और जज्बा…

ifran khan films talvar and jajwa

इरफान की बेहतरीन अदाकारी का नमूना तलवार और जज्बा फिल्मों में भी देखा जा सकता सकता है। तलवार दिल्ली के चर्चित आरूषि हत्याकांड पर आधारित मेधना गुलजार की फिल्म है। वहीं जज्बा में इरफान पुलिस वाले की भूमिका में हैं जो अपनी दोस्त ऐश्वर्या राय की बेटी के अगवा होने पर उसकी मदद करता है।

हिंदी मीडियम…

इरफान की कुल फिल्मों में से बहुत कम फिल्में हैं जिनमें वो लीड रोल में हैं या कहें पूरी फिल्म उनके कंधे पर हो। ऐसी ही एक फिल्म है हिंदी मीडियम। इसमें वो चांदनी चौक की साड़ी की दुकान की भूमिका में हैं जो अपनी पत्नी के दवाब में अपने बच्चे को नामी इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए काफी पापड़ बेलता नजर आता है।

Hindi Medium

File Photo: Hindi Medium

चांदनी चौक के दुकानदार की भूमिका निभाते हुए जिस तरह वो महिला ग्राहकों को साड़ियां दिखाते हैं वो बहुत ओथेंटिक लगता है। इइरफान डॉयलॉग बोलने और चेहरे के हावभाव इतने सहज तरीके से व्यक्त करते हैं कि लगता ही नहीं की वो एक्टिंग कर रहे हैं। यही उनकी सबसे बड़ी खासियत है।

हॉलीवुड की भी फिल्मों में भी काम किया…

इरफान ने बॉलीवुड के साथ साथ हॉलीवुड की कई फिल्मों में भी काम किया। इन फिल्मों में ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर, द अमेजिंग स्पाइडर मैन, हिस्स आदि हैं।Irfan Khan a mighty heart

जीवन यात्रा…

शाहबजादे इरफान अली खान का जन्मः 7 जनवरी 1967 को हुआ था। इरफान को पढ़ने से अधिक क्रिकेट खेलने में मजा आता था। वे अच्छे क्रिकेट खिलाड़ी थे लेकिन परिवार के दवाब में उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा। किसी तरह ग्रेजुएशन किया। इसके बाद नेशनल स्कूल आफ ड्रामा से अभिनय की ट्रेनिंग ली। इइसके बाद मुंबई का रुख किया।

IRFAN KHAN

पुरस्कार व सम्मान…

2004 – हासिल फिल्म के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
2008 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार – लाइफ़ इन ए मेट्रो
2011 – भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया।