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योगी सरकार करेगी हजारों रिक्त पदों पर भर्ती का ऐलान, पर क्या यह भर्तियां भ्रष्टाचार मुक्त होगी?

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जनमंच विशेष,

विशेष: सरकारी मशीनरी को सुचारु रूप से चलानें के लिए कार्यपालिका व न्यायपालिका का अहम योगदान होता है। इस सिस्टम को ठीक ढ़ग से चलानें के लिए काबिल लोगों की महत्ता से इंकार नही किया जा सकता। आवश्यकता अनुरूप समय-समय पर लोक सेवा आयोग अपनें मानकों के अनुसार कर्मचारियों की भर्तियां करता है।

आज की तारीख में हजारों सरकारी पद खाली पड़े है जिन पर भर्तियों के लिए यूपी सरकार जल्दी ही आवेदन आमंत्रित करेगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल क्या होने वाली भर्तियां पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त होगीं?

एक समय था जब लोग नौकरी करना पसंद ही नही करते थे। फौज-पुलिस आदि में जबर्दस्ती लोगों को पकड़ कर भर्ती किया जाता था और नौकरी देने के नाम पर रिश्वतखोरी नहीं की जाती थी। इधर नौकरियों में रिश्वतखोरी एक रिवाज सा बन गया है। भ्रष्टाचार की शुरुआत सत्तर के दशक में हुयी थी जो आज भी यथावत जारी है। इधर चार दशकों से तो भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप धारण कर लिया है और अब पुलिस कर्मी हो या सफाई कर्मी, या स्वीपर हो, या फिर शिक्षक ही हो। सभी जगहों पर भ्रष्टाचार का बोलबाला रहता है।

चाहे सिपाही की भर्ती हो चाहे, दरोगा की हो, चाहे बाबू हो बिना रिश्वत नौकरी मिलना संभव नहीं रह गया है, और रिश्वत भी कोई हल्की-फुल्की नही। खुला रेट होता है सिपाही 10-12 लाख, दरोगा 15-18 लाख। इसी तरह चाहे जिस विभाग में भर्ती का मामला हो बिना रिश्वत लिये नहीं की जाती।

इसमें जिला स्तर के ही नहीं बल्कि शासन स्तर तक के अधिकारी शामिल होते हैं। जब नौकरियों में रिश्वत का बोलबाला हो जाता है तो पद की योग्यता का मानक शिथिल हो जाता है। जो रिश्वत नहीं दे पाता है उसे अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है और अंत में मानक विपरीत बताकर उसे भर्ती प्रक्रिया से अलग कर दिया जाता है।

पिछली सरकारों में तो नौकरियों की नीलामी की जाती थी और मुँह, जाति और धन देखकर नौकरी दी जाती थी। यहीं कारण था कि अदालतों को समय समय पर हस्तक्षेप करके इन भर्तियों पर रोक लगानी पड़ी। इधर काफी दिनों से भर्ती पर रोक लगी थी जिसे वर्तमान सरकार खोलने जा रही है।

अभी दो दिन पहले सरकार के मुख्य सचिव ने बम्पर भर्ती करने का ऐलान किया है। इसके लिये सभी विभागों से रिक्त पदों का ब्यौरा माँगा गया है। संभवता लोकसभा चुनाव से पहले सरकार मतदाताओं को एक बार पुनः अपनी ओर आकृष्ट कराने के लिये बम्पर भर्ती करने का मन बना रही है।

अगर मैं यह कहुँ कि यह नौकरियां ही सरकार को बदनाम करती है क्योंकि लूटपाट मंत्री, सचिव व अधिकारी करते हैं और खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ता है। सपा सरकार में गुनाह किसी ने किया और सजा सरकार के मुखिया को मिली। वर्तमान योगी सरकार इस बार होने जा रही भर्तियों को क्या भ्रष्टाचार मुक्त कर पायेगा यह यक्ष प्रश्न सामने मुँह बाये खड़ा है। योगी आदित्यनाथ को खुद अहसास होगा कि इन बेलगाम अधिकारियों की मनमानी व रिश्वतखोरी पर रोक लगा पाना कितना कठिन हो गया है। सब कुछ इतने सिस्टमैटिक एंव आर्गनाईज्ड तरीके से होता है कि शासन को कानो-कान खबर नही होती।

अगर पिछली सरकारों की तरह नौकरियों में मंत्री सचिव व अधिकारियों की लूटखसोट हुयी तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। योगी के तमाम प्रयासों के बावजूद घूसखोरी पर लगाम नहीं लग पा रही है। अगर यहीं स्थिति इन नौकरियों में हुयी तो सरकार की छवि भी भ्रष्टाचारी हो सकती है। वैसे नौकरियों में भ्रष्टाचार ही सरकारी तंत्र को भ्रष्ट घूसखोर हरामखोर बनाता है।

जो व्यक्ति लाख दस लाख रूपये खर्च करके नौकरी पाता है वह पहले अपनी लागत निकालता है फिर ब्याज निकालता है तथा उसके बाद नौकरी में हरामखोरी ही उसके जीवन यापन का माध्यम बन जाती है। अब नौकरी देने के समय योग्यता को कम धन को अधिक को अधिक महत्व दिया जाने लगा है। पहले लोग चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिये भर्ती करने के लिये पैसा नहीं लेते थे और इसे नीच कृत्य मानते थे।

अब तो बड़े अस्पातालों में मरे हुये व्यक्ति के नाम पर भी पैसा ले लिया जाता है। सफाई कर्मी जैसे नाली नाबदान साफ करने के लिये भी लाखों रूपये लिये जाने लगे हैं। नौकरियां देकर बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना सरकार का धर्म बनता है। अगर भ्रष्टाचार पर रोक लगानी है तो सबसे पहले भर्तियों को भ्रष्टाचार से मुक्त करना होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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