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महान गणितज्ञ डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह “सीज़ोफ्रेनिक” बीमारी से हैं ग्रसित, बीता रहें जीवन गुमनामी में

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भारत के महान गणितज्ञ डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह के बारें में जर्नालिस्ट सुधांशु आनंद की स्पेशल रिपोर्ट…. 

Sudhanshu Aanand

सुधांशु आनंद

जनमंच विशेष: आज हम बिहार के अत्यंत ही प्रभावशाली व्यक्तित्व डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह के विषय में जानेंगे। कभी इनका लोहा अमेरिका ने भी माना था। आज भी वहाँ के छात्र इनके शोध-कार्य का अध्ययन करते हैं।

इन्होंने अपनी प्रतिभा से नासा तथा आईआईटी को भी चौंका दिया। हमारे लिए यह अत्यंत ही दुःख की बात है कि आज वह हमारे बीच होते हुए भी, गुमनामी का जीवन जीने के लिए विवश हैं।

मानसिक बीमारी “सीज़ोफ्रेनिया” से ग्रसित बिहार के डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह आज भी गणित के सूत्रों में मग्न रहते हैं। लोग इन्हें ‘गणित का भगवान’ कहते थे। पूरी दुनिया में इन्होंने गणित के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाई थी। पर आज अपने लिए कुछ भी कर पाने में वे असमर्थ हैं।

डॉ. वशिष्ठ जी का जन्म 2 अप्रैल 1942 को, बिहार के, भोजपुर जिले के अंतर्गत बसंतपुर गाँव में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा नेतरहाट विद्यालय से सम्पन्न हुई। पटना साइंस कॉलेज से बीएससी के तीन वर्ष के स्नातक को इन्होंने मात्र एक साल में ही पूरा कर लिया।

तत्पश्चात अमेरिका से मिले निमंत्रण पर उन्होंने 1969 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कली से “Reproducing kernels and operators with a cyclic vector” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

Dr. Vashishtha Narayan Singh

Dr. Vashishtha Narayan Singh, Photo credit: BBC

इसके बाद वे नासा के ‘असोसिएट साइंटिस्ट प्रोफेसर’ के पद पर आसीन हुए। 1972 में भारत वापस आकर आईआईटी कानपुर, टीआईएफआर मुंबई तथा आईएसआई कोलकाता के लेक्चरर बने।

1977 में डॉ सिंह ‘सीज़ोफ्रेनिया’ के शिकार हो गए। इलाज के लिए उन्हें कांके अस्पताल में भर्ती कराया गया। परंतु उचित इलाज न मिलने पर, किसी को बिना कुछ बताए वो चले गए। वर्षों बाद, 1992 में सिवान में ये दयनीय स्थिति में मिले।

इनकी उपलब्धियों की बात करें तो इन्होंने ‘आइंस्टीन एनर्जी मास इक्वेशन ( E = MC Square)’ को चैलेंज किया। इतना ही नहीं, गणित में रेयरेस्ट जीनियस माने जाने वाले ‘गैसियस थ्योरी ( pV= NRT)’ को भी चैलेंज किया। ऐसी प्रतिभा आज अपने घर में विक्षिप्त स्थिति में… कभी अखबार, कॉपी, दीवार तो कभी रेलिंग पर सूत्रों से खेलते रहते हैं।

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