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देश में 3-4 महीनें में होता है अफवाहों का बाजार गर्म, हकीकत या फसाने में उलझा मामला!

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Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। आखिरकार अफवाह फैलाने का मकसद क्या होता है? आये दिन कोई न कोई अफवाह वायरल होती ही रहती है। आज हर व्यक्ति के हाथों में मोबाइल है जिसके जरिये अफवाहों को फैलाना बहुत आसान हो गया है।

परंतु एक दसक पूर्व जब मोबाइल की संख्या गिनी चुनी थी तब भी अफवाहें फैलती थी। आप यह न समझें कि प्रचार के लिए टेलीविजन, अखबार, होर्डिंग आदि ही होते हैं।

अगर यह सब मिलकर किसी का प्रचार करते हैं तो वह मात्र 50 से 60 प्रतिशत लोगों तक ही पहुंचता है। भारत एक ऐसा देश हैं जहां पर लोग फ्री में माउथ एडवरटीजमेंट करते हैं जो 50-60 नही 100% कारगर होता हैं।

एक उदाहरण लेते हैं लगभग एक दशक पूर्व अफवाह उड़ाई गयी कि मुंह नोचवा आया है। यह उन लोगों को शिकार बनाता था जो गर्मियों में अपनी छतों पर या खुले में सोते थे। लोगों के अनुसार एक तेज़ रोशनी आती हैं और वह सीधे मुंह पर हमला करती हैं। लोगों ने इसका नाम रखा मुँहनोचवा। हालांकि कुछ मामले सामने भी आये लेकिन डॉक्टरों ने और वैज्ञानिकों ने उसे एक कीड़े के रूप में बताया, जिसके चलते लोगों के चेहरों पर तेज़ जलन होती थी। धीरे धीरे न मुँहनोचवा रह गया न उसका आतंक।

आज के लगभग 8 वर्ष पूर्व आधी रात को कड़ाके की ठंडी के दिनों में यह अफवाह उड़ी की जो सो रहा है वह पत्थर का हो जाएगा। और देखते ही देखते इस अफवाह ने करोड़ों सो रहे लोगों को जगाकर आधी रात को सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया। छोटे शहरों और गांव की बात छोड़िये महानगरों में भी लोगों ने जग कर पूरी रात सड़कों पर गुजार दी। क्या जो नही जगा सोता ही रह गया वह पत्थर का हुआ, जबाब है नही हुआ ऐसी कोई खबर कहीं से भी नही मिली कि कोई जिंदा व्यक्ति पत्थर का हुआ हो।

3 साल पूर्व देर शाम को हल्ला हुआ कि भगवान शिव की सवारी नन्दी महाराज दूध पीने लगे हैं, देखते ही देखते मंदिरों में देर रात तक भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने कई कुंतल दूध नन्दी के अलावा अन्य कई भगवान को पिला डाला। देर रात में मंदिरों में भारी भींड़ उमड़ने के कारण प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और चारों तरफ पुलिस ही पुलिस सुरक्षा और लोगों को समझने में जुट गई। यह प्रकिया कई दिनों तक चलती रही आखिरकार यह अफवाह भी कुछ दिनों में शांत पड़ गई।

समय की बात करें तो उस समय अफवाह उड़ाई गई कि नमक की कीमत बहुत बढ़ गयी है, देखते ही देखते रात 10 बजे के बाद लोग सड़कों पर आ गए और दुकानों से जिसका जो सामर्थ्य था उस हिसाब से नमक खरीदने लगा। देखते ही देखते दुकानों पर नमक खत्म हो गया। दुकानदार दुकान बंद कर भाग खड़े हुए। प्रशासन हरकत में आया कई जगहों पर रात को ही अलाउंस कराया गया, लोगों को खदेड़ा गया तब जाकर यह मामला शांत हो सका।

अब और आज चोटी काटने की बात सामने आ रही है। कहीं पर महिलाएं सोने से पहले हेलमेट का प्रयोग करती हैं, तो कहीं महिलाएं अपने सर में नीबूं और हरी मिर्च बांध रही हैं। अगर यह सही तो किसी मर्द के बाल क्यों नही कट रहें हैं इसका जबाब किसी के पास नही है। शहर दर शहर यह मामला बढ़ता ही जा रहा है। वह समय दूर नही जब इसे भी लोग भूल जाएंगे और शुरू होगी एक नयी अफवाह…जिसका अन्दाजा लगा पाना मुश्किल ही नही नामुनकिन हैं।

आखिर क्या कारण हो सकते हैं ऐसे मामलों को फैलाने के…इससे किसका फायदा होता है। यह सब सोचने की जरूरत है तभी ऐसे अफवाहों से अपना कीमती समय और पैसा बचाया जा सकता है।

वहीं आगामी 12 अगस्त के लिये अफवाह फैलाई जा रही है कि इस दिन रात को अंधेरा नहीं होगा, दिन जैसा उजाला ही रहेगा। यह हकीकत है या महज अफवाह यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

जिले में चोटी कटने का पहला मामला सामने आया है। 35 वर्षीय महिला गुड़िया की सोते वक्त चोटी कट गई। जिसके पश्चात महिला बेहोश हो गयी। जिसको उपचार के बाद होश आया। किन्तु इस घटना के पश्चात इलाके में हड़कम्प मचा हुआ है। मौके पर पहुंचे सी ओ और एस ओ अफवाह या हकीकत की कर रहे हैं जांच पड़ताल। यह मामला इकौना थाना क्षेत्र के भगवानपुर बनकट गांव का है।

देखें वीडियो…


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