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गुजरात राज्यसभा चुनाव: देर रात तक चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद कांग्रेस के अहमद पटेल नें जीती बाजी

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चुनाव आयोग ने टीवी फुटेज में कांग्रेस छोड़ बीजेपी से जुड़े दो विधायकों को निर्वाचन नियमों का उल्लंघन करते देख उनके मतों को किया खारिज…

राजनीतिक विश्लेषण,

गांधीनगर: कांग्रेस के उम्मीदवार अहमद पटेल ने गुजरात के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को देर रात तक चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद आखिर पटखनी दे दी, जबकि दिनभर चले विधायकों के ड्रामेबाजी के बाद ये बात लगभय तय लग रही थी कि बीजेपी के बलवंत सिंह राजपूत कांग्रेस के अहमद पटेल को हरा देगें। लेकिन कांग्रेस के दो बागी विधायकों की अति चतुराई बीजेपी को ही भारी पड़ गई और कांग्रेस की गुजरात में प्रतिष्ठा बच गई और लगभग जीत का ताज पहन चुके बलवंत सिंह को हार का अति कड़वा स्वाद चखना पड़ा।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव ने बलवंतसिंह राजपूत को हराकर साबित कर दिया कि छल से भी जीत हासिल करनें के लिए अक्ल की जरूरत होती है। गुजरात राज्यसभा चुनाव में इस बार 44 वोटों का मतदान हुआ था, गुजरात में दो दशकों में राज्यसभा चुनाव में आधिकारिक प्रमुख दलों के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो रहे हैं। राजपूत को 38 मत मिले।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने निर्विरोध राज्यसभा में प्रवेश किया और इसी तरह पार्टी की उम्मीदवार और सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने 46 मतों के साथ चुनाव जीता।

पटेल ने अपनी जीत के बाद ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए कहा, “यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है। यह पैसे की शक्ति, बाहुबल और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग के सबसे ज़बरदस्त इस्तेमाल की हार है,” पटेल, जो कठिन चुनावी लड़ाई के बाद पांचवीं बार राज्यसभा का टिकट हासिल कर चुके हैं, उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं और मैं अपनी पार्टी नेतृत्व, मेरे विधायकों, पार्टी के हर रैंक के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करता हूं जो एक परिवार की तरह काम करता हैं, यह एक कठिन चुनाव था जिसे हम जीते थे।”



पटेल की हार, सोनिया के लिए निजी झटके के रूप में देखे जाने के अलावा, कांग्रेस में बेहद हताशा घर कर सकती थी, जहां विधानसभा चुनाव करीब हैं।

दो कांग्रेस विधायकों के मतों को रद्द करने के चुनाव आयोग के फैसले नें एक उम्मीदवार के लिए जीतने के लिए जरूरी 45 मतों को कम करकेे 44 कर दिया था। अहमद पटेल ने 44 प्राप्त किए, राजपूत केवल 38 मत पा सके जोकि इस राज्यसभा चुनाव में 6 मतों का अंतर काफी बड़ा माना जा सकता है।

मुख्यमंत्री विजय रुपाानी ने कहा कि भाजपा ने दो कांग्रेस विधायकों के वोटों को खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती दी है, जिन्होंने अपनी पार्टी का समर्थन किया था।

चुनाव आयोग के आदेश के बाद भोलाभाई गोहिल और राघवजीभाई पटेल के मतों को खारिज कर दिया गया, जिन पर अमित शाह को नियमों का उल्लंघन करते हुए अपना मत दिखाने का आरोप था। यह मामला नई दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय में सामने आया। टीवी फुटेज दिखाते हैं कि पटेल ने मतदाता हॉल में एक अज्ञात व्यक्ति के लिए अपनी मतपत्र प्रदर्शित किया था।

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने पहले दावा किया था कि असंतुष्ट विधायकों ने शाह को अपना मत दिखाया था।

मतदान समिति ने मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि दोनों मतदाताओं ने “मतदान प्रक्रिया और मतपत्रों का गोपनीयता का उल्लंघन किया।”

कांग्रेस के अधिकृत प्रतिनिधियों के अलावा अन्य लोगों को मतपत्र दिखाए जाने के लिए कांग्रेस ने गोहिल और पटेल के मतों को रद्द करने की मांग करते हुए चुनाव आयोग से संपर्क किया था।

तीन प्रतिनिधिमंडल, कांग्रेस और भाजपा में से प्रत्येक ने दो घंटों के भीतर ‘निर्वाचन सदन’ में मांग किया। कांग्रेस नें मांग की कि गोहिल और पटेल के वोटों को अमान्य घोषित किया जाए, जबकि बाद में भाजपा नें जोर देकर कहा कि गिनती तुरंत शुरू कराई जाये।

अंत में चुनाव आयोग ने कांग्रेस के तर्क को स्वीकार कर लिया और रिटर्निंग ऑफिसर को दो विधायकों के मतों को अस्वीकार करने और गिनती के साथ आगे बढ़ने के लिए कहा।

अभी के हालात यह है कि गुजरात राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का हाई वोल्टेज ड्रामा बंद होने के नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी की तमाम कोशिशों को धराशाई करते हुए कांग्रेस ने अपने ही आठ विधायकों को निष्काषित कर दिया है। पार्टी ने जिन आठ विधायकों पर कार्रवाई की है उनपर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान व्हिप को नहीं माना था। जिस वजह से पार्टी आलाकमान ने आठ विधायकों को 6 साल के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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