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गुजरात राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस को करारा झटका, अहमद पटेल की जीत लगभग नामुमकिन

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विद्रोही कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला और उनके छह समर्थकों ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला। वाघेला ने कहा, “मैंने अपना वोट कांग्रेस नेता अहमद पटेल को नहीं दिया। उनकी जीत की कोई संभावना नहीं है।”

राजनीतिक विश्लेषण,

गांधीनगर: गुजरात राज्यसभा चुनावों में मतदान समाप्त हो गया है जिसमें कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के प्रभावशाली राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और भाजपा के अमित शाह, स्मृति ईरानी और बलवंतसिंह राजपूत मैदान में हैं।

भाजपा प्रमुख अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सभी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के अहमद पटेल की प्रतिष्ठा यहॉं दांव पर लग गई है, कारण पार्टी का अंदरूनी विवाद और इस्तीफों के सिलसिलो को माना जा रहा है।

क्रॉस-वोटिंग शुरुआती घंटों से ही मतदान पर छाई रही, क्योंकि विद्रोही कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला और उनके छह समर्थकों ने भाजपा उम्मीदवार बलवंतसिंह राजपूत के पक्ष में मतदान किया था, जिन्होंने हाल ही में भगवा पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

वाघेला ने अपना वोट देने के बाद संवाददाताओं से कहा, “चूंकि अहमद पटेल हार रहे हैं इसलिए मैंने उन्हें अपना वोट नहीं दिया।”

राघवजी पटेल, विद्रोही कांग्रेस के विधायक और वाघेला समर्थक, जो 44 विधायकों के ग्रुप के साथ बेंगलुरु नहीं गए, ने कहा, “मैंने बलवंत सिंह राजपूत के पक्ष में मतदान किया है। कांग्रेस की जीत की कोई संभावना नहीं है। “एक अन्य विद्रोही कांग्रेस के विधायक और वाघेला के समर्थक धर्मेंद्र सिंह जडेजा ने कहा, “मेरा वोट बलवंत सिंह राजपूत के पास गया।”

सबसे दिलचस्प बात यह है कि वाघेला के बेटे महेंद्रसिंह वाघेला ने यह नहीं बताया कि उन्होनें किसके लिए वोट दिया। हालांकि, उन्होंने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए भाजपा के राजपूत को वोट देने का ईशारा किया।

एक अन्य विद्रोही कांग्रेस के विधायक और वाघेला के समर्थक धर्मेंद्र सिंह जडेजा ने कहा, “मेरा वोट बलवंत सिंह राजपूत के पास गया।”

दिलचस्प है कि वाघेला के बेटे महेंद्रसिंह वाघेला ने यह नहीं बताया कि किसके लिए उन्होंने वोट दिया। हालांकि, उन्होंने अपने पिता की अगुवाई करने के लिए कहा और भाजपा के राजपूत के लिए वोट दिया।

इससे पहले, आज सुबह एक रिज़ार्ट में ठहरे 44 कांग्रेस विधायकों को लेकर एक बस स्वार्णिम संकुल राज्य सचिवालय में पहुंची। मतदान केंद्र के अंदर जाने के दौरान विधायकों ने उंगलियों से वी निशान दिखाकर जीत के संकेत दिए।

दो एनसीपी विधायक- कंधल जडेजा और जयंत पटेल- भी शुरुआती घंटों में मतदान में आए, लेकिन उन्होनें नें अपनी पसंद को प्रकट नहीं किया, न ही यह संकेत दिए कि वो किसे वोट करेगें।

एनसीपी के विधायक जडेजा ने कहा, “मतदान के बाद आपको पता चल जाएगा कि मैनें किसे वोट दिया है। “जद (यू) के नेता चुटूभाई वसावा ने भी नहीं बताया कि उन्होंने किसे वोट दिया। वसावा ने संवाददाताओं को बताया, “मैंने अपने वोट को राष्ट्रीय हित में डाल दिया है।”

बीजेपी की विधानसभा में 121 सीटों होने के चलते शाह और ईरानी के चुनाव का पहले से निष्कर्ष निकल चुका है। तीसरी सीट के लिए अहमद पटेल और भाजपा के बलवंतसिंह राजपूत के बीच खीचतान चली, लेकिन पूरी संभावना है कि अहमद पटेल कांफ्रेस के अंदर बैठे सांपों द्वारा डस लिए जाएगे।

पटेल को अपने पांचवें राज्यसभा चुनाव को जीतने के लिए आवश्यक 45 मत कम मिले हैं जबकि मतदान शुरू होने से पहले, कांग्रेस को 44 विधायकों का स्पष्ट समर्थन मिला। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस से सानंद के विधायक करम्सी पटेल नें अहमद पटेल के लिए सबसे बड़ी परेशानी उस समय खड़ी कर दी जब उन्होनें क्रासवोटिंग करते हुए अपना वोट भाजपा के बलवंत सिंह राजपूत को दे दिया।

राघवजी पटेल और धर्मेंद्र सिंह जडेजा जैसे कुछ अन्य कांग्रेस विधायक भी बाहर आ गए हैं और कहा है कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया है।

शाह और ईरानी को जीतानें के लिए जरूरी 90 वोटों को निकाल दिया जाए तो भी भाजपा के पास 31 सरप्लस वोट बचते हैं जो राजपूत के खाते में जाएगें, जीत के लिए राजपूत को विद्रोही कांग्रेस विधायकों के वोट की जरूरत थी जो उन्हे मिला, इसके अतिरिक्त कुछ छोटी पार्टियों के विधायकों का साथ लेकर बलवंत सिंह राजपूत निर्वाचित हो जाएगे।

यह लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद है, जिसमें गुजरात में राज्यसभा चुनाव में एक प्रतियोगिता हो रही है, जहां प्रमुख दलों के आधिकारिक नामित उम्मीदवार निर्वाचित हुए थे।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, किसी उम्मीदवार को जीत के लिए कुल वोटों का एक चौथाई भाग हासिल करके मात्र एक और वोट चाहिए, जिसका मतलब प्रत्याशी को 45 वोट जीत के चाहिए।

चुनाव आयोग के अधिकारियों नें बताया  कि विधायकों को वोट देने लिए उन्हे तमाम प्रत्याशियों में से अपनी पहली पसंद, दूसरी पसंद, तीसरी पसंद, चौथी (उम्मीदवारों की संख्या के अनुसार) या फिर नोटा का चयन करना होगा।

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