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लोकसभा चुनाव: सपा-बसपा गठबंधन से जौनपुर लोकसभा सीट खो सकती है बीजेपी

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बसपा के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को यदि गठबंधन जौनपुर लोकसभा सीट से उतारता है तो बीजेपी को संभवता यह सीट खोना पड़ेगा, ऐसे में कांग्रेस का कदम भी काफी मायने रखता है क्योकि जौनपुर सीट पर कांग्रेस 1984 के बाद कभी वापसी नही कर पायी है…

जौनपुर: लोकसभा क्षेत्र जौनपुर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में है, इसकी ज्यादातर सीमा प्रतापगढ़ और इलाहाबाद जिले से लगी हुई है। जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में दो पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), दो पर समाजवादी पार्टी (एसपी) और एक सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का कब्जा है। यहां के वर्तमान सांसद कृष्ण प्रताप बीजेपी से हैं।

पिछले कई लोकसभा चुनावों से यह सीट ऐसी रही है कि यहां जीत के लिए बीजेपी और कांग्रेस को अच्छा-खासा संघर्ष करना पड़ता है। ऐतिहासिक महत्व देखें तो जौनपुर का किला आज भी चर्चा का विषय है और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग अकसर यहां आते रहते हैं। यहां पारसनाथ यादव (समाजवादी पार्टी) ऐसे नेता रहे हैं, जो लगातार कई बार से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। वह दो बार जौनपुर से सांसद भी रह चुके हैं और वर्तमान में मलहनी विधानसभा सीट से एसपी के ही विधायक भी हैं।

राजनीतिक समीकरण
2019 लोकसभा चुनाव के लिए एसपी-बीएसपी ने हाथ मिला लिया है और जौनपुर सीट बीएसपी के हिस्से में आई है। 2014 के चुनाव में बीएसपी ही दूसरे नंबर पर रही थी और हार-जीत का अंतर लगभग डेढ़ लाख वोटों का था। यहीं एसपी के पारसनाथ यादव को एक लाख 80 हजार वोट मिले थे। ऐसी स्थिति में अगर एसपी-बीएसपी के वोट मिल जाते हैं तो गठबंधन के लिए बात बन सकती है। 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीएसपी के सुभाष पांडेय बीजेपी के कृष्ण प्रताप उर्फ केपी से 1,46,310 वोटों से हार गए थे।

रोचक बात है कि 1984 के चुनाव के बाद कांग्रेस यहां से कभी लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाई है। 2014 में बॉलीवुड और भोजपुरी स्टार रविकिशन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में उतरे थे लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी से भी कम वोट मिले और वह छठें स्थान पर रहे थे। अभी तक यहां बीजेपी, बीएसपी और एसपी में त्रिकोणीय मुकाबला होता रहा है, ऐसे में अगर गठबंधन बनने के बाद बीजेपी के लिये यह सीट जीतना काफी मुश्किल हो सकती है बशर्ते सपा-बसपा दोनो के वोट गठबंधन के उम्मीदवार को मिले।

जीत के लिये कुछ भी करेगी बीजेपी

इसके लिये सपा अध्यक्ष और स्टार प्रचारक अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह के साथ-साथ बसपा सुप्रीमों मायावती को भी जौनपुर लोकसभा सीट के लिए मेहनत करनी चाहिए। 2014 के मुकाबले 2019 में मोदी लहर विपरीत दिशा में है, हमारे एक सर्वे के अनुसार बीजेपी को अधिक से अधिक 180-185 सीटें मिलेगीं यह आंकड़ा कम तो हो सकता है लेकिन बढ़ने की उम्मीद नही है। यह बात बीजेपी आलाकमान भी जानती है इसलिए बीजेपी जीत के लिये धरती-आकाश एक कर रही है। चुनाव से पहले बीजेपी की ओर से जीत के लिये कुछ भी किया जा सकता है, उदाहरण के लिये एयर स्ट्राईक, लोकायुक्त की नियुक्ति, ए-सैट परिक्षण जैसे काम हो चुके हैं, लेकिन मोदी लहर फिर भी नही बन पा रही है, सो पूरी उम्मीद करना चाहिए कि आने वाले समय में भाजपा की ओर से कुछ और ‘बड़ा’ किया जायेगा क्योकि संघ और कॉरपोरेट बैकिंग वाले प्रधानमंत्री का हटना एक बड़े और पूँजीपति तबको परेशानी में डाल सकता है।

धनंजय सिंह होंगे काफी महत्वपूर्ण
बीएसपी के टिकट पर जौनपुर से पूर्व सांसद रह चुके धनंजय सिंह को भी यहां से संयुक्त गठबंधन का उम्मीदवार बनाए जाने की बात चल रही है। जौनपुर का जातीय गणित देखें तो यहां सबसे ज्यादा वोटर्स में यादव, पासी और ठाकुर जाति की प्रमुखता है। धनंजय सिंह, पारसनाथ यादव पहले से ही यहां काफी मजबूत हैं और उनकी अपनी-अपनी जातियों में अच्छी पकड़ भी मानी जाती है। ओबीसी वोटों की बाहुल्यता के चलते बीएसपी और एसपी इस सीट को किसी भी हालत में जाने नहीं देना चाहेंगी। वहीं राज्य में फिर से 73 प्लस सीटों का दावा कर रही बीजेपी को फिर से इस सीट पर जीत हासिल करना भी बड़ी चुनौती होगी।

2011 की जनगणना के अनुसार जौनपुर जिले की कुल जनसंख्या 44,94,204 है, जिसमें लगभग 10 लाख लोग अनुसूचित जातियों और 4,736 लोग जनजातीय समुदाय के भी हैं। यहां हिंदू लगभग 90 पर्सेंट और मुस्लिम जनसंख्या लगभग 10 पर्सेंट है। 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकडों को देखें तो यहां मतदाताओं की कुल संख्या 18,48842 थी, जिसमें से 10,07,235 वोट पड़े। जौनपुर जिले में दो लोकसभा सीटें हैं-जिसमें दूसरी का नाम मछलीशहर है और वह अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। जौनपुर का शाही पुल, जौनपुर का किला आदि ऐसी चीजें हैं, जिनके लिए इसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रही है। पिछले कुछ सालों में बाहुबली धनंजय सिंह का अपनी नौकरानी की हत्या में पत्नी की मदद करने का मामला चर्चा में रहा है।

जौनपुर के अब तक के सांसद:
1951:गणपत राम और बीरबल सिंह
1957: गणपत राम और बीरबल सिंह
1962: ब्रह्मजीत
1967: आर देव
1971: राजदेव सिंह
1977: यादवेंद्र दत्त दुबे
1980: अजीजुल्ला
1984: कमला प्रसाद सिंह
1989: राजा यादवेंद्र दत्त
1991: अर्जुन सिंह यादव
1996: राज शेखर
1998: पारस नाथ यादव
1999: चिन्मयानंद
2004: पारसनाथ यादव
2009: धनंजय सिंह
2014: कृष्ण प्रताप उर्फ केपी