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माँ गंगा का आस्तित्व खतरे में

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निलेश पराशर,

साहेबगंज। साहेबगंज झारखंड का एकमात्र जिला है जहाँ गंगा नदी प्रवाहित होती है। जिले की पहचान गंगा नदी के रूप में ही की जाती है। जिले को पहचान दिलाने वाली माँ गंगा का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। अगर इस मामले में सरकार गंभीरता से ध्यान नहीं देती है तो वो दिन दूर नहीं जब जिले में गंगा नदी विलुप्त हो जाएगी।

जिले में गंगा नदी के जलस्तर कम होने का मुख्य कारण गाद है। ये जमा होकर स्थल का रूप ले लेते हैं जिस कारण से गंगा नदी तेजी से सँकरी होती जा रही है।

गंगा की स्थिति को देखते हुए रोने का मन करता है। पश्चिम बंगाल में गंगा नदी में फरक्का बराज के निर्माण के कारण नदी में भारी मात्रा में गाद जमा हो गया है और उसका असर अब पटना तक हो रहा है। फरक्का बराज के निर्माण के समय कहा गया था कि इससे नदी में गाद जमा नहीं होगा। लेकिन अब देखा जा रहा है कि यह एक गंभीर समस्या हो गई है। बराज के निर्माण के पूर्व गंगा में तेज प्रवाह था और पानी के तेज बहाव के कारण गाद समुद्र में चला जाता था।

बराज बनने के बाद गंगा नदी में पानी का प्रवाह कम हुआ है। अब इस बराज का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और इसके दुष्प्रभाव पर सोचा जाना चाहिए। बराज हटाना यदि कठिन कार्य है तो गाद प्रबंधन किया जाना चाहिए। 

अब गंगा की अविरलता प्रभावित होगी क्योंकि इसकी गहराई पहले जैसी नहीं रह गई है। नदी में जल ग्रहण की क्षमता नहीं रह गई है और इसके उथले होने के कारण पानी अधिक क्षेत्र में फैल रहा है।


इस बार राज्य में बहुत अधिक वर्षा नहीं हुई है फिर भी बाढ़ आ गई है। गंगा बेसिन प्राधिकरण में पिछले कई वर्षो से गंगा नदी में जमा गाद का मुद्दा उठा रहा है लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।


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