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बक्सर में उद्योग-धंधे ठप्प, नहरों में नहीं है पानी: अनिल कुमार

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वर्तमान सांसद ने बक्सर में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का कर दिया बुरा हाल…

बक्सर- जनतांत्रिक विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने बुधवार को बक्सर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित आमसभा में क्षेत्र के वर्तमान सांसद और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और कई वाजिब सवाल उठाए. अनिल कुमार ने बक्सर के राजपुर, हरिवंशपुर, तेनुअज, बलिया, सराव, करहंसी, करंज, भानपुर एवं लीलवछ में जनसंपर्क किया.

अनिल कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार के पिछले 5 साल के कार्यकाल में आयुष्मान भारत सहित स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाओं को अत्यंत बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित किया गया है. इन योजनाओं के प्रचार में करोड़ों-करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए गए. इसी भाजपा के बक्सर के वर्तमान सांसद स्वास्थ्य मंत्री हैं. वे बताएं कि उनके कार्यकाल में बक्सर में स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहतरी के लिए कौन से कार्य किए गए?

आज बक्सर में एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं है. यहां तक कि एक भी इस तरह का अस्पताल नहीं है, जहां सभी तरह का इलाज संभव हो सके. बक्सर के लोग अपने इलाज के लिए बक्सर ही नहीं, बल्कि बिहार के बाहर जाने को मजबूर हैं. उनके लिए बक्सर में उचित दवाइयां भी नहीं उपलब्ध हैं.

साथ ही अत्यंत महंगा होने के कारण आज इलाज बक्सर की आम जनता के बजट से बहुत बाहर की चीज हो गई है. बक्सर के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था चरम पर है और इलाज के अभाव में लोगों की मृत्यु हो रही है. अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने के कारण इलाज के दौरान लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है. ऐसे में वर्तमान सांसद के स्वास्थ्य मंत्री होने का क्या मतलब है?

किसान और कृषि के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी समय धान का कटोरा कहलाने वाला शाहाबाद आज खाली कटोरा बनकर रह गया है. यहां के किसानों को उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. आज यहां के सैकड़ों नहरों में पानी नहीं है. जबकि यहीं के पूर्व सांसद सालों तक सिंचाई मंत्री रहे हैं. उनके सिंचाई मंत्री रहते हुए भी यहां के किसानों के खेतों में पानी नहीं आया. पैदावार घटती चली है और किसानों की समस्याएं भी.

पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बक्सर के वर्तमान सांसद बताएं कि वे किस तरह के महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं जबकि बक्सर में आज एक भी महिला कॉलेज नहीं है. बक्सर की बेटियां पढ़ने के लिए कहां जाएं? क्या यहां की बेटियां किसी तरह सिर्फ इंटर तक कि शिक्षा प्राप्त करें? उनके किए उच्च शिक्षा की बात महज दिवास्वप्न बनकर रह गई है. ऐसे में बेटी पढ़ाने की बात कहां सार्थक रह गई हैं?

अनिल कुमार ने कहा कि दिनारा के वर्तमान विधायक उद्योग मंत्री हैं मगर क्षेत्र में उद्योग-धंधे का हाल चौपट है. पूर्व में बक्सर में चीनी मिल चालू था. इसी तरह कपड़े की फैक्ट्री, पेपर मिल सहित तमाम उद्योग-धंधे आज सिर्फ सपना बनकर रह गई है. बक्सर में रोजगार के किसी भी तरह के कोई अवसर पैदा ही नहीं हुए और ना हो रहे हैं.

क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. मगर वर्तमान सांसद, बिहार सरकार और केंद्र सरकार द्वारा लगातार इसकी उपेक्षा की जाती रही है जो आज भी बदस्तूर जारी है. नए उद्योग-धंधे लग नहीं रहे हैं और पुराने को चालू करने का प्रयास तक नहीं किया जा रहा है. ऐसे में क्ष्रेत्र की जनता खासकर युवाओं का रहन-सहन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है.