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25 सालों से गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए मसीहा बन चुके हैं कैलाश यादव

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Anshu Sharma

अंशु शर्मा की रिपोर्ट-

बांका। काश बनाने वाले ने थोड़ी सी होशियारी और दिखाई होती तो, इंसान थोड़े कम और इंसानियत ज्यादा बनाई होती। दरअसल, हमारा समाज इतना स्वार्थी हो गया है कि उसे किसी के दर्द से कोई हमदर्दी ही नहीं रह गई है। लेकिन इसी स्वार्थी समाज में इंसानियत आज भी जिंदा है।

जी हां आज हम एक ऐसे दया की मूर्ती और एक वरिष्ठ समाजसेवी बात करने जा रहे है। जिसे जानकर हैरानी ही नहीं होगी, बल्कि इस स्वार्थी समाज के लोगों को खुद पर शर्म भी महसूस होगा। हम जिस दया की मूर्ती के बारे में चर्चा करने जा रहे है, वो बांका के धरती पर गरीब, असहाय, निर्धन, दलित-महादलित तथा जरूरतमंद लोगों को केस मुकदमे से बचाने, कानूनी सलाह तथा अन्य सामाजिक सरोकार कार्य का काम कर रहे हैं।

गरीब तथा कमजोर लोगों की भलाई के लिए अपनी पूरी जिन्दगी समर्पित कर चुके एक वरिष्ठ समाजसेवी कैलाश यादव की है। जो विगत 25 सालों से फुल्लीडुमर प्रखंड के नरहा गांव के रहने वाले है। गरीब, कमजोर, दलित तथा जरूरतमंद और बाल श्रमिक बच्चों और लोगों को बिना किसी अनुदान लिए ही मुफ्त में पंचायत में होने वाले हर सामाजिक क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं।

मालूम हो कि कैलाश यादव के अंदर ये सोच बचपन से ही इनके दिल और दिमाग पर अपना कब्जा जमा रखी थी। गरीब लोगों के लिए दिल में प्यार लिए कैलाश ने जिस जज्बे को मुक्कमल किया वो आज के वक्त में शायद ही किसी के अंदर दिखेगा। ज्ञात हो कि कैलाश यादव के द्वारा लगातार घूम-घूमकर लोगों को न्याय दिलाने प्रति अलख जगाने का काम कर रहे हैं।

कैलाश 25 सालों से गरीब तथा जरूरतमंद लोगों को मुफ्त में मदद कर रहे हैं। बातचीत के क्रम में कैलाश यादव ने बताया कि मेरे पिताजी भितिया पंचायत में तीन दशक से अधिक समय तक सरपंच रहे। उनकी पंचायत इलाके में प्रसिद्ध थी। उनके साथ में भी कभी-कभार साथ चले जाते थे।

वर्ष 1997 में पिताजी के निधन के बाद गांव के सभी लोग पंचायत में किसी प्रकार की विवाद या कोई घटना घटने पर मुझे बुलाने लगे। हालत आज के दिन में यह है कि रोज दो से तीन पंचायत गांव में रोज होती हैं। बताते चलें कि कैलाश की इस कार्य को देखते हुए पूरे जिला में एक चर्चा की विषय बन चुके हैं वरिष्ठ समाजसेवी कैलाश यादव।

जिस दिन गांव में पंचायत की कोई कार्यक्रम तय रहता है, तो सुबह होते ही हर घर से लोग निकल पड़ते हैं और उनके पंचायती के लिए कैलाश यादव के पास पहुंच जाते हैं। आज के युग में सभी लोग पैसे के लिए किसी को कोई मुफ्त में सलाह तक नहीं देते। लेकिन आज कैलाश यादव जैसे लोग समाज में एक सूर्य की रौशनी की तरह नि:शुल्क समाज के लिए कार्य कर रहे हैं।

समझ जाइए यदि ऐसा ही होता रहा तो समाज को कितना न्याय मिलेगा। अब तक न जाने 10,000 से भी अधिक को मुफ्त में न्याय दिलाने का काम कर चूकें है।