हिंदु धर्म, उसकी संस्कृति और विरासत को अद्भुत कलात्मक रूप में संजोये काशीधाम में आपका स्वागत है

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती, राजकुमारी कृष्णप्रिया ने किया काशीधाम का उद्घाटन…

–वाराणसी ब्यूरो

वाराणसी: धर्म, संस्कृति और विरासत का दर्शन कराने वाला बूंदी परकोटा घाट के ऊपर ब्रह्माघाट के समीप स्थित अनूठा संग्रहालय काशी धाम आज जनसामान्य के लिए खुल गया। काशी धाम का उद्घाटन शनिवार को जगतगुरु स्वामी स्वरूपानन्द के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, महाराज बनारस की राजकुमारी कृष्णप्रिया, काशी धाम की आधारशिला रखने वाले मुम्बई हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश किणी, अंतर्राष्टीय एथलीट नीलू मिश्रा और स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर ऋतु गर्ग ने किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द के द्वारा काशी धाम में स्थित 350 वर्ष पूर्व लालेश्वर महादेव के वैदिक मंत्रोच्चार से सविधि पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

तत्पश्चात स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती और राजकुमारी कृष्णप्रिया संग मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्ववलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बात अतिथियों द्वारा शिलापट्ट का अनावरण किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथियों ने संग्रहालय का अवलोकन किया और इसमें संग्रहित सनातनी संस्कृति और धर्म की संचित निधि को सराहा। पाणिनी कन्या विद्यालय की छात्राओं द्वारा वैदिक मंत्रों के मंगल गान के बाद कार्यक्रम में पधारे सभी प्रमुख अतिथियों का स्वागत काशी धाम के आधारशिला रखने वाले मुंबई हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जय किणी और उनकी धर्मपत्नी राधिका किणी को माल्यार्पण और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया किया गया।

Bhagat Singh

Shaheed Raj Guru, Bhagat Singh and Sukhdev’s idols are also on display in Kashi Dham besides dozens of artifacts related to Sanatan dharm…

उन्होंने कहा कि कार्य डोर से ज्यादा सुख लोगों को काशी धाम में मिलेगा। ऐसा मुझे आशा नहीं बल्कि पूरा विश्वास है। राजकुमारी कृष्ण प्रिया ने कहा कि काशी धाम सनातन धर्म और संस्कृति का अनूठा धाम है। काशी धाम ने हिंदू संस्कार और संस्कृति से सबको परिचित कराया है इसको देखने के बाद हमारी आने वाली पीढ़ियों की धर्म के प्रति रुचि बढ़ेगी।

काशी धाम के आधारशिला रखने वाले जय किणी ने कहा कि मेरा भाग्य है किस छोटे से आश्रम में स्वामी जी पधारे हैं। मेरे छोटे से कार्य से अगर सनातनी धर्म और संस्कृति के प्रति थोड़ा सा भी लोगों का विश्वास और बढ़ेगा तो मुझे काफी सुख की अनुभूति होगी और मैं अपने आप को धन्य मान लूंगा।उन्होंने आगे कहा कि  आज से 10 वर्ष पूर्व अपने पिता की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने काशी आए थे। मानिए जैसे यहां आने के बाद पिता ने हमसे कहा कि पुत्र इस स्थान पर ऐसा संग्रहालय होना चाहिए जिसमें हमारे धर्म-संस्कृति की विरासत संचित हो। बस क्या था मैने काशी में ऐसा संग्रहालय बनाने का संकल्प ले लिया। सन 2015 में जगह मिली और अपने निजी सहयोगियों संग पिता के सपने और अपने संकल्प को साकार रूप देने में जुट गए। चार साल की कड़ी मेहनत और विपरित परिस्थितियों के बावजूद उन्होेंने काशी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अनोखा और अद्भुत संग्रहालय का निर्माण करा दिया है। जो हमारी आने वाली पीढीयों का पथ प्रदर्शन करने के साथ पावन विरासत की झलक दिखाने वाला होगा।

नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य व पार्षद अजीत सिंह ने कहा कि ‘देवपुरूष संजीवजनार्दन किणी एवं मां वैजयंती के सुपुत्र जयेश किणी ने न केवल हमारी अनमोल विरासत को संजोने का काम किया है बल्कि एक नया इतिहास लिख दिया है। उन्होने वाराणसी आकर इस ऐतिहासिक कार्य के लिए राजमंदिर के इस ऐतिहासिक स्थल का चुनाव किया जो पर्यटकों के आकर्षण का एक बड़ा केन्द्र बनेगा। काशीधाम की बदौलत गंगा तट का यह ऐतिहासिक क्षेत्र राजमंदिर देशभर में पर्यटन के मानचित्र पर अंकित होगा। जिसके माध्यम से हमारे पूरे क्षेत्र का ऐतिहासिक विकास होना तय है।’

उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व पुराण विभागाध्यक्ष पंडित श्याम गंगाधर जी, सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना अतिथि चटर्जी, भारतेंदु जी के वंशज रितेश अग्रवाल, कुमार ईशान, अखिलेश यादव, बनारसी यादव, सुनील सूर्य, अखिलेश यादव घनश्याम सिंह,  सहित सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रीय लोग शामिल रहे। अतिथियों का स्वागत जयेश किणी ने, संचालन चक्रवर्ती विजय नावण ने और धन्यवाद ज्ञापन पार्षद अजित सिंह ने किया।