Kumar Mangalam Birla

कुमार मंगलम बिड़ला की नेटवर्थ 2 साल में 21500 करोड़ रु घटी, मोबाइल वॉर का ज्यादा असर

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New Delhi: आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला (52) की नेटवर्थ बीते 2 साल में 3 अरब डॉलर (21,528 करोड़ रुपए) घट गई। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 2 साल पहले 9.1 अरब डॉलर थी, अब सिर्फ 6 अरब डॉलर (43,056 करोड़ रुपए) है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट की वजह से ऐसा हुआ। टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटीशन का ज्यादा असर पड़ा। बिड़ला की कंपनी वोडाफोन-आइडिया का शेयर दिसंबर 2017 से अब तक 90% गिर चुका है।

वोडाफोन-आइडिया को सितंबर तिमाही में 50921 करोड़ का घाटा

  1. टेलीकॉम सेक्टर में मुकेश अंबानी की जियो के आने के बाद से बाकी कंपनियों के लिए कॉम्पिटीशन काफी बढ़ गया। इसका असर ये हुआ कि अनिल अंबानी की आरकॉम को दिवालिया होना पड़ रहा है। वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर को मर्जर का फैसला लेना पड़ा, फिर भी दिक्कतें कम नहीं हो रहीं। वोडाफोन-आइडिया ने पिछले हफ्ते बताया कि जुलाई-सितंबर में उसे 50921 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। यह किसी भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा तिमाही नुकसान है। वोडाफोन ने तो इतना कह दिया कि अब कारोबार करना मुश्किल लग रहा है।
  2. आदित्य बिड़ला ग्रुप को टेलीकॉम सेक्टर के हालातों से ही नहीं बल्कि देश की जीडीपी ग्रोथ घटने और अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर जैसी वजहों से भी नुकसान हुआ। ग्रुप की हिस्सेदारी वाली हिंडाल्को इंडस्ट्रीज दुनिया की प्रमुख एल्युमिनियम कंपनी है। ग्रुप के पास देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट भी है, लेकिन कंस्ट्रक्शन सेक्टर में पिछले कुछ समय से मांग कम रही है।
  3. हिंडाल्को का मुनाफा जुलाई-सितंबर तिमाही में 33% घट गया। एल्युमिनियम और कॉपर की कीमतें घटने की वजह से कंपनी को नुकसान हुआ। हिंडाल्को का शेयर दिसंबर 2017 की प्राइस के मुकाबले अब 31% नीचे है। इस दौरान आदित्य बिड़ला ग्रुप की एक और कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर में 33% गिरावट आई।
  4. एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) पर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से भी टेलीकॉम कंपनियों की मुश्किलें बढ़ीं, क्योंकि उनकी सरकार को देनदारियां बढ़ गईं। बकाया राशि की प्रोविजनिंग की वजह से ही वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल ने जुलाई-सितंबर तिमाही में रिकॉर्ड घाटा दिखाया। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियों को कुछ राहत देने के लिए सरकार ने बुधवार को कहा कि अगले दो साल उन्हें स्पेक्ट्रम फीस की किश्त नहीं भरनी पड़ेगी, सिर्फ ब्याज चुकाना काफी होगा। दो साल की बकाया रकम बाद की किश्तों में एडजस्ट की जा सकेगी। इससे वोडाफोन-आइडिया, भारती एयरटेल और जियो को अगले 2 वित्त वर्षों में 42,000 करोड़ रुपए के भुगतान से राहत मिलेगी।