Sand mafia

एनजीटी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लीज धारी

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- विधानसभा चुनाव के पूर्व तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में गौण खनिज अधिनियम में संशोधन करके पंचायतों को रेत की लीज देकर उत्खनन कराने की छूट क्या दे दिया, मानो उपभोक्ताओं को लूटने और गांव के संपदा को ओने पौने दाम में भेजकर मनमाने दाम वसूलने की छूट दे दी हो ऐसा ही वाक्य इन दिनों  सीधी जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायतों में चल रही रेत की लीजो में देखने को मिल रहा है. 

जहां ग्राम पंचायत लीज की रेत को बेचने की जिम्मेदारी अपने चहेते लोगों को सौंप दी है. वहीं एनजीटी और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के खुली अवहेलना करने की छूट दे दी है. जिसके कारण लीज वाले स्थान में यहां मजदूरों को काम देने के बजाय मशीनों से रेड की निकासी करा कर छोटे वाहनों से रेत भेजने के अलावा फाइबर वाहनों में सीधे रेत सप्लाई कराई जा रही है.

जिसके चलते लीज नियमों का ना तो पालन हो रहा है और ना ही पंचायतों के आर्थिक संकट दूर हो पा रहे हैं यदि कुछ हो रहा है तो सरपंच सचिव और उनके द्वारा चयनित किए गए ठेकेदार जरूर अपनी माली हालत सुधार रहे बताया गया है कि जिले के गोतरा, टिकरी, डोल ग्राम पंचायतों को गौण खनिज अधिनियम के तहत रेत की लीज दी गई है.

इसके अलावा गोपद नदी से खनिज विभाग ठेके से रेट निकासी की लीज दे रखी है. इन चारों स्थानों पर खुलेआम मशीनों से रेट की निकासी की जा रहे शुरू शुरू में तो कलेक्टर सीधी भी इस ओर ध्यान दे रखे थे. कई वाहनों को पकड़ कर कार्रवाई भी किए थे.

लेकिन, जैसे जैसे दिन बीते वैसे ही कलेक्टर की सख्तता भी शिथिल पड़ती गई और खनिज विभाग अनदेखी करना जारी रखें आलम यह हो गया है कि 21सो की रसीद काटकर 12000 रूपये वसूल किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं छोटे वाहनों से भी 5 गुना ज्यादा रकम वसूली जा रही है. जिसके कारण स्थानीय लोगों को मजबूरी में रेत की मुंहमांगी रकम  चुकानी पड़ रही है.

आम‌ जनता को‌ नहीं खनिज माफियाओं को मिला लाभकारी-

आमदमी की पहुंच से दूर होती जा रही रेत की समस्या को देखते हुए भले ही राज्य सरकार ने रेत की उपलब्धता के लिए पंचायत स्तर पर खदानों के संचालन की योजना लागू कर दी है. लेकिन, स्थित जस की तस बनी हुई है.

उल्लेखनीय हैं कि पंचायतो को दी गई रेत खदानें माफियाओं का शिकार हो गई हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण डोल पंचायत में चल रही रेत खदान में देखा जा सकता हैं, यहां पंचायत से जुडे लोगों को किनारे कर दलालो का बोलबाला है.

बताया जा रहा है कि इन दिनों डोल रेत खदान का संचालन रीवा के ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है. जिसके द्वारा सासन के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए जमकर उगाही की जा रही हैं, रेत खदान में पंचायत प्रतिनिधि के बजाय ठेकेदार के गुर्गे पीटपास काट रहे हैं. जिनके द्वारा निर्धारित कीमत से ज्यादा रकम एठी जा रही हैं.

खनिज विभाग की भूमिका संदिग्ध-

नियम के अनुसार रेत खदान का संचालन ग्राम पंचायत को करना है. लेकिन, यहां रेत खदान ठेकेदार चला रहे हैं. पंचायत तो नाम मात्र है. रेत खदान संचालन के लिए पर्यावरण विभाग के नियमों का पालन करने ग्राम पंचायत को खनिज विभाग ने निर्देशित किया था. रेत खदान में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है.

मिली जानकारी अनुसार खदान क्षेत्र में सीमांकन, सीसीटीवी कैमरा, बोर्ड आदि नहीं लगाए गए हैं. मशीन के जरिए ओवरलोडिंग कर रेत भरा जा रहा है। जिसकी शिकायत भी ग्रामीणों द्वारा कई बार की जा चुकी हैं. लेकिन, न तो जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा न ही खनिज विभाग.

यही नहीं पीटपास को पंचायत प्रतिनिधि के बजाय ठेकेदार के गुर्गे बना रहे हैं. अब तक कितने पीटपास जारी हुए, कितने उपयोग हुए, इसकी जानकारी पंचायत के जनप्रतिनिधि और कर्मचारी को भी मालूम नही हैं. ओवर लोडिंग कर प्रति हाइवा 2000 से 2200 रुपए लिया जा रहा है.