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Passport and tirupati balaji

क्या आपको वीजा नहीं मिल पा रहा?….तो परेशान न हो और जल्द मिलें चिलकुर बालाजी से

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Shikha Priyadarshni-Janmanchnews.com

शिखा प्रियदर्शिनी

लाइफ डेस्क। कभी कभी कुछ बातें काफी हास्यास्पद होते हुए भी चूंकि वो आस्था से जुड़ी होती हैं। हमें उनपे विश्वास करने पे मजबूर कर जाती हैं। ऐसा ही कुछ चिलकुर बालाजी। अक्सर देखा जाता है के युवाओं को विदेशों में नौकरी करना बहुत भाता है। आज हर तीसरा युवा अपना करियर बनाने के लिए विदेश जाना चाहता है।

जैसा की सभी जानते है कि विदेश जाने के लिए आपके पास पासपोर्ट होना आवश्यक और उससे भी ज्यादा आवश्यक उस देश का वीजा होता है जहां आप जाना चाहते है। अधिकतर युवाओं का सपना वीजा ना मिलने के कारण कभी पूरा नहीं हो पाता। अगर इस समस्या से आप भी गुजर रहें है तो ये आपके खुश होने का समय है क्यूंकि आज हम आपको बताएंगे 500 वर्ष पुराने एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां जाने से आपको जल्द ही वीजा मिल जाएगा। पढ़िए आगे….

चिलकुर बालाजी का मंदीर….

आंध्रप्रदेश के हैदराबाद से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर ओसमान सागर लेक के तट पर बसा चिल्कुर बालाजी का ये मंदिर वीजा दिलाने के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को वीजा वाले बाला जी के मंदिर से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस मं‌दिर की स्‍थापना 500 वर्ष पूर्व की गई और इस मंदिर में देखने के लिए हस्तकला और कारीगरी का समन्वय भी है।

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मान्यता है कि यहां भगवान वेंकटेश बालाजी के एक भक्त रहते थे, जो रोज पैदल चलकर कोसों दूर तिरुमल बालाजी के मंदिर आते थे। एक बार उनकी तबियत खराब हो गई, तबीयत इतनी खराब थी कि वे अपने भगवान से मिलने मंदिर तक यात्रा नहीं कर सकते थे। ऐसे में भगवान बालाजी ने सपने में आए और कहा कि तुमको मेरे दर्शन के लिए इतनी दूर आने की आवश्यकता नहीं है।

मैं तो यही तुम्हारे पास वाले जंगल में रहता हूं। सुबह भक्त भगवान की बताई हुई जगह पर जाते हैं जहां उन्हे उभरी हुई भूमि दिखाई पड़ती है। भक्त के द्वारा उस जमीन की खुदाई की जाती है जिससे वहां से रक्त निकलने लगता है, तभी एक आकाशवाणी होती है कि इस धरती को दूध से नहलाकर वहां एक मूर्ति की स्थापना कि जाए। जब भक्त वहां दुग्धाभिषेक कर रहा होता है तो वहां श्रीदेवी और भूदेवी की मूर्तियां भी अवतरित होती।

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प्राचीन काल से ही लोग इस मंदिर पर आकर अच्छी जॉब के लिए प्रार्थना करते है। ऐसी मान्यता है कि बालाजी की 11 परिक्रमा करके मांगी गई मन्नत कभी खाली नही जाती है और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो भक्त यहां आकर 108 बार परिक्रमा करते है। यहां पर लोग हवाई जहाज चढ़ाकर मन्नत मांगते है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि हवाई जहाज चढ़ाने से विदेश जाने के लिए वीजा जल्दी मिल जाता है।

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