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मां का दूध अमृत

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Kirti mala

कीर्ति माला

लाइफ डेस्क। कहते है माँ का दूध हर बच्चे के लिए अमृत के समान होता है। ये बात वाकई में सच है क्योंकि मां का दूध केवल बच्चों के पोषण के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी बीमारियों से सुरक्षा क लिहाज से भी जरूरी है क्योंकि मां के दूध में पाई जाने वाली एक खास किस्म की शुगर नवजात को एक बेहद खतरनाक जीवाणु के जानलेवा संक्रमण से बचाता है। हाल में हुए एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है।


अध्ययन में पाया गया कि मां के दूध में पाई जाने वाली एक खास किस्म की शुगर ‘लैक्टो-एन-डिफ्यूकोहेक्सोज 1’ नवजातों में मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) और अन्य खतरनाक संक्रमण के लिए जिम्मेदार आई ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया को खत्म करता है। वैसे शिशु जिनकी मां के दूध में लैक्टो-एन-डाईफ्यूकोहेक्सोज होता है, उनके शरीर में मौजूद जीवाणु जन्म के 60-89 दिनों के भीतर खत्म हो जाते हैं।


मां के दूध में मौजूद ओलिगोसैकेराइड्स पचता नहीं है बल्कि यह बच्चे की आंत में मौजूद गुड बैक्टीरिया के लिए खाद्य पदार्थ का काम करता है। अध्ययन के मुताबिक, मां के दूध में मौजूद शर्करा गुड बैक्टीरिया के पोषण में मदद करता है और हानिकारक बैक्टीरिया का सफाया करता है। शोध  में यह बात भी सामने आई है कि मां के दूध में मौजूद शुगर (ह्यूमन मिल्क ओलिगोसैकेराइड्स) रोटावायरस और ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस के संक्रमण से भी बचाव करता है।

इतना ही नही प्रीमैच्योर बच्चों के लिए तो ये और भी लाभदायक है उनके ग्रोथ में ओषधि का काम करती है मां का दूध। शुरूआती दौर में जिस बच्चे को मां का दूध नही मिल पाता वो बच्चे कमजोर होते है। मां का दूध रोग प्रतिरोधक होता है। अत: हरेक मां को अपने बच्चे को अपना दूध जरूर पिलाना चाहिए ताकि बच्चे का सही से ग्रोथ भी हो सके और बच्चा स्वस्थ भी रह सके।

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