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women victim in hospital

गर्भ में बच्चे की मौत, महिला दर्द से कराहती रही, डॉक्टर साहब नशे में धुत

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सर्वेश त्यागी की रिपोर्ट

भिण्ड। जिले में मानवता को शर्मसार करने का मामला हुआ जहाँ शासकीय अस्पताल में महिला के पेट मे बच्चा फसा होने के कारण महिला दर्द से कराहती रही और डॉक्टर साहब शराब में धुत सोते रहें, परीजन द्वारा डॉक्टर साहब को जगाने की कोशिश भी की गई मगर वो टस से मस नहीं हुए।जिस कारण नबाजात बच्चे की मौत हो गई।

भिण्ड जिले के मेहगाँव तहसील के अमायन गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मंगलवार की लगभग सुबह 10.00 बजे सिंगापुरा निवासी संगीता पत्नी लोकेंद्र सिंह राजपूत को भर्ती कराया गया उनके साथ आशा कार्यकर्ता मानकुंवर भी थी, परन्तु अस्पताल में कोई डॉक्टर न होने कारण प्रसव कार्य को नर्स और एक महिला सफाई कर्मचारी कर रही थी। उस बीच बच्चा मां के पेट में फंस गया, जैसे तैसे मेहनत करे बच्चा को निकाला गया और आधा घण्टे तक प्रसूता तड़पती रही, लेकिन इस केस ओर अस्पताल के मेडीकल ऑफीसर डॉ एम के लाल नहीं आये।

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वह अस्पताल परिसर में ही अपने आवास में सोते रहें, उन्हें महिला के परिवार वालों  ने जगाया भी, लेकिन वो नहीं आये। इसके बाद परिजनों ने गांव के सरपंच अनिल प्रकाश सिंह चौहान को फोन करके बुलाया उन्होंने भी डॉक्टर एम के लाल को जगाया लेकिन वह नहीं आये, जिस कारण नबज़ात बच्ची को मौत हो गई।

सरपंच का कहना है कि डॉक्टर साहब  सुबह सुबह ही शराब पीकर सो गये थे, साथ ही इस अस्पताल में ज्यादातर डॉक्टर्स आते नहीं हैं और जो आते है वो अस्पताल में बैठने की जगह अपने आवास में ही रहते हैं, पुलिस ने नवजात की मौत का मामला दर्ज कर उसका पोटमार्टम कराया है। वैसे इस अस्पताल में ये पहला केस नहीं है सोमवार को भी यहां एक नवजात कन्या की मौत प्रसव के दौरान हो गयी थी। दोनों मामलों को लेकर सीएचएमओ डॉ. जेपीएस कुशवाह को कई बार मोबाइल पर कॉल किया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। 

पुलिस को दिए आवेदन में भी डॉक्टर के शराब पिए होने का जिक्र किया गया है, पुलिस ने इस मामले में सरपंच व संगीता के परिजन ने अमायन पुलिस थाने जाकर डाक्टर की लापरवाही व अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रसव न कराए जाने व भिंड रैफर न किए जाने का आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने नवजात कन्या का पोस्टमार्टम कराया है।

एक तरफ तो केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार शासकीय अस्पताल में प्रसव कराने हेतु जोर देती ओर इसके ऊपर काफी प्रचार प्रसार में शासकीय धन लगाया जा रहा है और दूसरी तरफ शासकीय अस्पताल में इस तरफ के मामले देखने को मिलते है। वैसे खबर लिखे जाने तक इन मामलों को लेकर किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं ली और न ही किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है।

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