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वाजपेयी जी के गृह जिले में कुपोषण फिर से, डेढ़ लाख बच्चे शिकार !

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सर्वेश त्यागी की रिपोर्ट

 ग्वालियर। शहर की यूं तो पहचान देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के गृहनगर के रूप में होती है, लेकिन अब इस जिले के नाम पर कुपोषण का कलंक जुड़ गया है। ग्वालियर संभाग में कुपोषण फिर से पैर पसारने लगा है। आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर संभाग में डेढ़ लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। 

ग्वालियर जिले में 6 साल उम्र तक कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 28,228 है, पोषण पुर्नवास और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए इन बच्चों की खुराक पर हर दिन लगभग 1 लाख 12 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं, इसके बावजूद कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

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इम्युनिटी पॉवर लगातार घटने के कारण लगभग हर तीसरा बच्चा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित है, सरकारी आंकड़ों में सब ठीक बताया जा रहा है, जबकि जमीनी धरातल पर कुपोषण में 20 फीसदी भी सुधार नहीं हुआ है।

ग्वालियर के बरई, भितरवार, डबरा और मुरार ब्लॉक के आदिवासी बाहुल्य गांवों में कुपोषण की स्थिति लगातार पैर पसार रही है और रूट लेबल पर काम करने वाले महिला बाल विकास विभाग के कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, सीडीपीओ बच्चे के जन्म से लेकर पांच साल तक टालमटोल में निकाल रहे हैं, इसके बाद भी बच्चा सरवाइव कर जाए तो आयु सीमा से बाहर होने का बहाना बनाकर बच निकलते हैं, ग्वालियर जिले में जन्म से 28 दिन के भीतर करीब 32 बच्चे, 1 साल की उम्र से पहले 48 और पांच साल की उम्र पूरा करने से पहले करीब 63 बच्चे दम तोड़ देते हैं।
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