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मंत्री आर्य की बड़ी राहत, सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई पर लगाई रोक

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

भिण्ड। कांग्रेस के पूर्व विधायक माखनसिंह जाटव हत्याकांड में घिरे मंत्री लालसिंह आर्य को शुक्रवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से बड़ी राहत मिल गई। कोर्ट ने भिंड सेशन कोर्ट में चल रही जाटव हत्याकांड की सुनवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने यह आदेश 2011 से  लंबित  सीबीआई की रिविजन की सुनवाई करते हुए दिया। सेशन ट्रायल पर स्टे होने से आर्य के खिलाफ सेशन कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट स्वत: ही निरस्त हो गया।

मामला भिंड का है, लेकिन सीबीआई का न्याय क्षेत्र इंदौर होने की वजह से तत्कालीन सीबीआई मजिस्ट्रेट शुभ्रासिंह की कोर्ट में इस मामले में चालान पेश किया। 10 जनवरी 2011 को मजिस्ट्रेट शुभ्रासिंह ने इस केस को कमिट करते हुए इस केस को सुनवाई के लिए भिंड की सेशन कोर्ट भेज दिया। सीबीआई ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को चुनौती देते हुए 2011 में हाई कोर्ट में रिविजन प्रस्तुत की।

इसमें कहा कि सीआरपीसी के प्रावधानों के मुताबिक इस मामले की सुनवाई इंदौर के सेशन कोर्ट में ही होना चाहिए। शुक्रवार को जस्टिस वेदप्रकाश शर्मा ने रिविजन पर सुनवाई करते हुए जाटव हत्याकांड की भिंड सेशन कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। सीबीआई के वकील दीपक रावल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सेशन कोर्ट की सुनवाई पर स्टे होने से आर्य के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट स्वत: ही निरस्त हो गया है।

सुनवाई के दौरान बनाया आर्य को आरोपी…

मंत्री लालसिंह आर्य इस केस में शुरू में आरोपी नहीं थे। प्रकरण की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों में उनका उल्लेख होने के बाद अभियोजन की तरफ से प्रकरण में लालसिंह आर्य को आरोपी बनाए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत हुआ। सेशन कोर्ट ने 24 अगस्त को आवेदन स्वीकारते हुए हत्याकांड में आर्य को आरोपी बना दिया। आर्य के खिलाफ 6 बार जमानती वारंट जारी हुए लेकिन वे कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इस पर 6 दिसंबर को भिंड के स्पेशल जज ने आर्य का गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

क्या है मामला…

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक माखनलाल जाटव की गोहद के छरेंटा गांव में 13 अप्रैल 2009 को रात करीब 8 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त वे कांग्रेस प्रत्याशी भागीरथप्रसाद के समर्थन में हुई सभा से लौट रहे थे। इस मामले में गार्ड शिवराजसिंह की रिपोर्ट पर नारायण शर्मा, शेरा उर्फ शेरसिंह, पप्पू उर्फ मेवाराम, सेठी कौरव सहित अन्य को आरोपी बनाया। केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लालसिंह आर्य को भी प्रकरण में आरोपी बनाने के आदेश दे दिए। मामले की जांच सीबीआई ने की थी।

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