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Water War: इतिहास में पहली बार राजस्थान में नहरों की निगरानी को बिठाए मप्र के कर्मचारी

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

ग्वालियर/श्योपुर। चंबल नहर के पानी को लेकर मप्र राजस्थान के बीच शुरू हुई खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। मप्र को राजस्थान से अब भी उसके हिस्से का पूरा पानी तो दूर 3000 क्यूसेक भी नहीं मिल पा रहा है, जबकि गांधीसागर से पानी लेते वक्त राजस्थान द्वारा मप्र को 10 नवंबर बाद ही 3000 क्यूसेक पानी देने का आश्वासन दिया गया था।

बावजूद इसके मप्र को राजस्थान द्वारा महज 2766 क्यूसेक ही पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे तंग आए मप्र के अफसरों ने जहां रविवार को पानी बढ़वाने की खातिर कोटा पहुंचकर वहां के अफसरों के समक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा। चंबल कैनाल से पानी लेने के लिए पहली बार राजस्थान की शाखाओं पर अपने कर्मचारियों को बिठाकर निगरानी कराना शुरू किया।

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दरअसल दोनों राज्यों के अफसरों के बीच हुई बातचीत में राजस्थान द्वारा पूरा प्रयास करने के बाद भी पानी न बढ़ पाने की बात रखी। इसके बाद दोनों राज्यों के अफसरों ने राजस्थान क्षेत्र की कैनाल का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण में पानी कम किए जाने की स्थितियां साफ नजर आईं।

जिस पर मप्र के अफसरों ने राजस्थान कोटा बैराज से छोड़े जा रहे पानी का हिसाब रखने के लिए राजस्थान की पांच बड़ी कैनालों पर मप्र श्योपुर के१० लोगों की ड्यूटी लगा दी है। जिनके द्वारा इन कैनालों में चल रहे पानी की मॉनिटरिंग की जा रही है। बताया गया है कि अब अगर इन कैनालों में राजस्थान अधिक पानी छोड़ेगा तो, मप्र के यह कर्मचारी उसकी रिपोर्ट यहां के अफसरों को देंगे।

दोंनो ईई करेंगे मोनिटरिंग…

उनकी मॉनिटरिंग के लिए श्योपुर और कोटा में मौजूद मप्र के कार्यपालन यंत्रियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि श्योपुर के कार्यपालन यंत्री राजस्थान के अंता तक मॉनिटरिंग करेंगे, जबकि कोटा में मौजूद मप्र के कार्यपालन यंत्री नवीन गौड़ कोटा से अंता तक की नहर की मॉनिटरिंग करेंगे। यहा बता दें कि करार अनुसार मप्र को राजस्थान से चंबल दाहिनी मुख्य नहर में 3900 क्यूसेक पानी लेना होता है।

निरीक्षण में तो राजस्थान की शाखाओं में तय सीमा में ही पानी चलता मिला, मगर यह साफ दिख रहा था कि उसे निरीक्षण के मद्देनजर कम किया गया है। जिस पर हमने राजस्थान की पांच बड़ी शाखाओं पर श्योपुर की आवदा कैनाल का स्टाफ लगाया है।

आरपी झा, एसई, जल संसाधन विभाग मुरैना