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महात्मा ज्योतिराव फुले की 194 वी जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

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राजापाकर (वैशाली)। महात्मा ज्योतिराव फुले की 194 जयंती समारोह राजापाकर प्रखंड अंतर्गत अहिआई गांव में सामुदायिक भवन के परिसर में समाजसेवी अजय मालाकार के नेतृत्व में आयोजन की गई।

सर्वप्रथम उपस्थित शिक्षाविद, समाजसेवी, बुद्धिजीवियों ने महात्मा ज्योतिराव फुले के तैल चित्र पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धा सुमन माला एवं पुष्प अर्पित किए। श्री अजय मालाकार ने उनके कृत्यों पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि फूले दंपत्ति को भारत रत्न दिया जाए और सावित्रीबाई फुले के जयंती को शिक्षिका दिवस घोषित किया जाए।

ज्योतिबा फुले देश के अद्वितीय समाज सुधारक, महान शिक्षाविद एवं कवि थे। सबसे पहले उन्होंने ही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठायी थी। और कहा कि मनुष्य के लिए समाज सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं है। इसके कारण महात्मा गांधी और अंबेदकर भी उन्हें अपना आदर्श मानते थे।फुले दंपति ने ही नारी शिक्षा की अलख जगाई थी।

ज्योतिबा फुले ने बालिकाओं के लिए देश का पहला विद्यालय खोला था मगर उस समय उनके इस प्रयास का ना सिर्फ विरोध किया गया बल्कि सामंती व्यवस्था से ग्रसित लोगों ने उस दौर में उन्हें काफी यातनाएं देने का भी प्रयास किया।

वहीं उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने संघर्ष में उनका जीवन पर्यंत साथ दिया और वह देश की प्रथम शिक्षिका बनी। सामाजिक कुरीतियों और नारी शिक्षा के क्षेत्र में फूले दंपत्ति के योगदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है और इतिहास के पाठ्यक्रम में इसे शामिल कर स्कूलों में बच्चों को फूले दंपत्ति के प्रयासों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। उपस्थित सभी लोगों ने महात्मा फूले के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

मौके पर विचार प्रकट करने में सुधीर भगत, राजू मालाकार, लक्ष्मी भगत, विशुनदेव भगत, मोहन मालाकार, प्रेम भगत, कमलेश कुमार, संजय पासवान, रत्नेश भगत, ओम प्रकाश कुमार, गोलू मालाकार, धर्मेंद्र कुमार, अजय मालाकार, रामइकबाल भगत, मोहन भगत एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

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