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आफाक अहमद

ठगी करने का नायाब तरीका, व्यक्ति नें बलिया में खोला कर्नाटक बैंक की नकली शाखा

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कर्नाटक बैंक के दिल्ली शाखा के महाप्रबंधक को फोन पर बलिया शाखा की शिकायत मिली, जांच करने पर पता चला कि ऐसी कोई शाखा वास्तव में है ही नही…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

बलिया: हाल के दिनों में देश भर से बैंक धोखाधड़ी की सूचना मिलती रही हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक नायाब तरह की धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ है। एक व्यक्ति नें ठगी करने की नीयत से बलिया जिले के फेफना इलाके के मुलायम नगर में कर्नाटक बैंक की नकली शाखा ही खोल डाली। पुलिस ने बुधवार को शाखा खोलने वाले उस ठग को गिरफ्तार कर लिय है।

कर्नाटक बैंक

Fake Branch of Karnataka Bank Limited found running in Ballia District of Uttar Pradesh…

मूल रूप से यूपी के बदायूं जिले का आफाक अहमद नाम का व्यक्ति विनोद कुमार कंबाली के नाम से प्रबंधक बनकर इस नकली शाखा का संचालन कर रहा था। अहमद के पास से फर्जी नाम के फर्जी आधार और अन्य पहचान पत्र बरामद हुये हैं। आईडी मुंबई पश्चिम के किसी पते पर बनाई गयी है। पुलिस ने बताया कि अहमद ने कुल 15 बचत खाते और स्थानीय लोगों की फिक्स्ड डिपॉजिट खोलकर 1.37 लाख रुपयों की ठगी की है।

नकली शाखा से बैंक स्टेशनरी का एक विशाल जखीरा भी बरामद हुआ है- खाता खोलने के फार्म सहित, पासबुक, तीन कंप्यूटर, लैपटॉप, फर्नीचर और अन्य डॉक्युमेंट्स भी पुलिस ने जब्त किया है।

दिल्ली के कर्नाटक बैंक की शाखा के अतिरिक्त महाप्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने बलिया की इस नकली शाखा पर छापेमारी की। सीओ सिटी हितेंद्र कृष्णा ने बताया कि दिल्ली में कर्नाटक बैंक लिमिटेड के अतिरिक्त महाप्रबंधक बीबीएच उपाध्याय नें वाराणसी कार्यालय के अपने अधीनस्थों के साथ बलिया पहुंचकर पुलिस को नकली शाखा के ऑपरेशन के बारे में सूचित किया। उनकी सूचना पर कर्नाटक बैंक के अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल ने ‘नकली बैंक’ पर रेड मारा जो मुलायम नगर में पूर्व सेना अधिकारी के घर से चलाया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, घर प्रति माह 32,000 रुपये पर किराये पर लिया गया था।

जब पुलिस शाखा पहुँची तो अहमद अपने कक्ष में बैठा था, जबकि पांच अन्य कर्मचारी विभिन्न कॉउंटरों पर बैठकर कंप्यूटर पर काम करते मिले। पुलिस की उपस्थिति में, उपाध्याय ने अहमद की नियुक्ति पत्र की मांग की, साथ ही आरबीआई बैंक के मुख्यालय से लाइसेंस और प्राधिकरण दस्तावेज भी मांगा, जब वह आवश्यक दस्तावेज दिखाने में विफल रहा तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

अन्य कर्मचारियों, जो स्थानीय थे और 5000 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर रखे गये थे, यह निर्धारित किए जाने के बाद कि उन्हें इस घोटाले का कोई ज्ञान नहीं था, उनके बयान रिकॉर्ड करके उन्हे छोड़ दिया गया। पुलिस ने अहमद के दस्तावेजों और सामान की जांच शुरू की तो यह पता चला कि उसने एक महीने पहले इस शाखा को खोला था। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने घर के मालिक को किराए का भुगतान भी नहीं किया था, यहाँ तक की फर्नीचर का भुगतान भी नहीं किया गया था। अभियुक्त को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज करके जेल भेजने की कार्यावाही की जा रही थी।

सीओ नें बताया कि शाखा में 15 बचत खाते खोले गए थे। खाता खोलने के लिए 1000 रुपये का न्यूनतम बैलेंस आवश्यक था। इसके अलावा, स्थानीय लोगों से 30,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये तक की फिक्स्ड डिपॉजिट किया गया था। पुलिस अहमद से घोटाले में और कौन शामिल है यह निर्धारित करने के लिए पूछताछ कर रही है।

दिल्ली में कर्नाटक बैंक लिमिटेड शाखा के एजीएम ने इस बात का खुलासा किया कि कैसे इस प्लॉट का उन्हे पता चला। उन्होंने कहा कि दिल्ली की शाखा को एक व्यक्ति ने फोन किया और बलिया जिला शाखा की गतिविधियों पर संदेह व्यक्त किया, जिसके बाद बैंक के अधिकारियों ने इस मामले की जांच करने का फैसला किया। फिर जल्द ही यह समझ मे आ गया कि बैंक की ऐसी कोई शाखा रिकॉर्ड में नहीं थी। उन्होंने तब उस व्यक्ति से पहले व्हाट्सएप पर ‘नकली’ शाखा की एक तस्वीर भेजने को कहा। तस्वीरों को देखने के बाद एजीएम तुरन्त वाराणसी के लिए रवाना हो गये, जहां से वे वाराणसी शाखा के प्रमुख के साथ बलिया पहुँचे। एजीएम ने कहा कि बलिया पुलिस ने उनका पूरा सहयोग किया।