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मानसिक रोगों की महामारी का सामना कर रहा है भारत: राष्ट्रपति कोविंद

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महामारी से निपटनें के लिए इसे राष्ट्रीय मिशन के रूप में लेना होगा…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

बेंगलूरः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि भारत एक ‘मानसिक रोगों की महामारी’ का सामना कर रहा है, और 2022 तक इस महामारी के निदान और इसके इलाज की सुविधा को लोगों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय मिशन के तौर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित पेशेवरों को काम करना होगा। उन्होने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पेशेवरों की कमी को भी पूरा करनें का आह्वान किया।

वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS निम्हान्स) के 22 वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। राष्ट्रपति कोविंद नें जोर दिया कि देश में लगभग 5,000 मनोचिकित्सक और 2,000 से कम क्लिनिकल ​​मनोवैज्ञानिक हैं, उन्होंने कहा कि यह संख्या बहुत कम है, खासकर मानसिक बीमारियों की महामारी के निदान के उद्देश्य के लिए।

“दीक्षांत समारोह में अपनी डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए, असली चुनौती अभी शुरू हुई है। वे एक ऐसी दुनिया में जा रहे हैं जहां उनके कौशल की जरूरत पहले से बहुत अधिक हो चुकी है, देश में सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती नहीं है, बल्कि संभवत: मानसिक रोगों की महामारी फैल चुकी है,” कोविंद ने कहा।

उन्होंने कहा, देश में तकनीकी, आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिवर्तन बीमारियों की प्रकृति को बदल रहे हैं।

2022 में, जब भारत अपनी आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाये, देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकारों से पीड़ित लोगों का निदान किया जा रहा हो और उन्हें इलाज की सुविधा आसानी से मिल रही हो “हम इसे एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में लेते हैं। सरकार और गैर सरकारी क्षेत्र और बाकी सभी को इस प्रयास में योगदान देने की जरूरत है और NIMHANS को इसके लिए एक रोडमैप तैयार करना चाहिए।”

इस साल के शुरू में Nimhans द्वारा जारी एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए, कोविन्द ने कहा कि “निष्कर्ष खतरनाक निकले है, मानसिक स्वास्थ्य समस्या युवाओं को भी प्रभावित कर रही है, जो अपने जीवन के प्रमुख चरण में हैं। सर्वे कहता है कि देश में 1.3 अरब लोगों में 10% भारतीयों में एक या अधिक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। यह एक चौंकाने वाला आंकड़ा है। इस आंकड़े के संदर्भ में यदि आप देखें तो मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से पीड़ित भारतीयों की संख्या जापान की कुल आबादी से भी अधिक है,” उन्होंने कहा।

राष्ट्रपति कोविंद ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर और अधिक खुले तौर से चर्चा करनें की जरूरत को रेखांकित किया। उनके अनुसार अवसाद और तनाव जैसी बिमारियों को गुप्त रोग मानकर घबराने के बजाए उनका ईलाज कराना चाहिए।

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