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नसों की जानलेवा बीमारी ‘एमएनडी’ के बारे में जागरूक करने के लिए डाक्युमेंट्री बनकर तैयार

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बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय नाथ मिश्र के शोध पर आधारित, जुलाई में होगी रिलीज…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: नसों को गला देने वाली भयावह बीमारी ‘मोटर न्यूरॉन डिजीज’ (एमएनडी) पर अभी तक दवा भले नहीं बन सकी लेकिन इसके खतरे से आगाह करने के लिए डाक्यूमेंट्री फिल्म बनकर तैयार है।

बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय नाथ मिश्र के शोध पर आधारित ‘मोटर न्यूरॉन डिजीज’ (नसों के गलने की बीमारी) पर बनी डाक्यूमेंट्री ‘द डाइंग मैन एंड हिज डाइंग सिटी’ जुलाई में रिलीज होगी। इस मौके पर कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और पद्मश्री प्रो. सुनील प्रधान के अलावा देश के जाने माने वैज्ञानिक मौजूद रहेंगे।

फिल्म निदेशक नरेंद्र आचार्य की ओर से निर्देशित इस फिल्म में यह बताया गया कि किस तरह से मनुष्य के शरीर की नसें गलती जाती हैं और इसका क्या असर उनके शरीर पर पड़ता है।

आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ल के साथ न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने केंद्रीय कार्यालय पहुंचकर कुलपति से इस बारे में बातचीत कर समारोह में आमंत्रित किया। प्रो. विजय नाथ मिश्र ने बताया कि इस भयावह बीमारी के बारे में, चिकित्सकों एवं न्यूरो वैज्ञानिकों में भी बहुत कम जागरूकता है।

बढ़ते प्रदूषण भी इस रोग के कारण हो सकते हैं। इस डाक्यूमेंट्री में मणिकर्णिका महाश्मशान पर मोक्ष की अवधारणा भी दिखेगी और रामनगर किले के वैभव से लेकर और महामना की कर्मस्थली बीएचयू में कर्तव्य पथ पर बढ़ने की प्रेरणा भी।