Narendra Modi

मोदी ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस की शुरुआत की, कहा- प्रयोगशालाओं में प्लास्टिक का विकल्प खोजना होगा

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New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को 107वीं ‘भारतीय विज्ञान कांग्रेस’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए दुनिया के वैज्ञानिकों को प्रयोगशालाओं में प्लास्टिक का विकल्प खोजना होगा। खेती के विकास के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के उत्पादन पर बल देने की जरूरत है। इस 5 दिवसीय आयोजन में 2 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के अलावा दुनियाभर के 15 हजार विशेषज्ञ शामिल होंगे। साइंस कांग्रेस में हर साल किसी समस्या पर विमर्श और समाधान खोजने की कोशिश की जाती है। इस बार की थीम कृषि विकास रखी गई है।

  • मोदी ने कहा- ”बीते पांच सालों में ग्रामीण विकास को लोगों ने महसूस किया है। स्वच्छ भारत से आयुष्मान तक भारत की सबसे बड़ी योजनाओं को दुनिया में सराहा जा रहा है। इसका कारण साइंस एंड टेक्नोलॉजी है। देश के 6 करोड़ किसानों को पीएम किसान योजना की राशि ट्रांसफर कर एक नया रिकार्ड बनाया है। गांवों तक बिजली और अन्य विकास कार्य पहुंचे हैं। यह सब टेक्नोलॉजी से ही संभव हुआ है। आज गांव में सड़कें समय पर पूरी हो रही हैं। गरीबों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा समय पर तैयार हुए हैं। जियो टेकिंग के कारण प्रोसेस गति तेज हुई है। समय पर काम पूरा होने से सभी शिकायतें खत्म हो रही हैं।”
  • ”टेक्नोलॉजी के कारण आज किसान सीधे बाजार से लेनदेन कर रहे हैं। आज किसानों को खेती, मौसम से संबंधित हर जरूरी जानकारी मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्र में हमें टेक्नोलॉजी को और भी मजबूत बनाना है। आप सभी को यह भी जानकारी है कि ग्रामीण क्षेत्र में हर घर में जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। आपका दायित्व है कि पानी को री-साइकिल करने के लिए सस्ती टेक्नोलॉजी कैसे इस्तेमाल करें।”
  • “सप्लाई चेन में जो नुकसान होता है, उसे रोकने के लिए टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी है। हमें मध्यम और लघु उद्योगों को भी मजबूत करना है। देश ने सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प लिया है, ताकि हमारे पशु, मछलियों और मिट्टी को बचाया जा सके। लेकिन, प्लास्टिक का विकल्प तो आपको ही खोजना होगा। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से मेटल निकालने के लिए भी नई तकनीक की जरूरत है। आप जो समाधान देंगे, उसे हम बाजार में उतार पाएंगे, जिसे मध्यम और लघु उद्योगों का विकास होगा।”
  • “फसलों के अवशेष और घरों से निकलने वाला कचरा भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। इसको वेल्थ में बदलने के लिए हमें मेहनत करनी होगी। 2020 तक कच्चे तेल का आयात कम करने का लक्ष्य है, इसके कई विकल्प हमें तलाशने होंगे। आपका यही सब योगदान देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।”

साइंस कांग्रेस की थीम कृषि विकास, 15 हजार लोग शामिल होंगे

  • साइंस कांग्रेस के लिए नोबेल विजेता स्टीफन हेल (मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट, जर्मनी) और अडा ई योनथ (वाइज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, इजराइल) बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट और भौतिक वैज्ञानिक सुब्रा सुरेश, हृदय रोग विशेषज्ञ सीएन मंजूनाथ भी शामिल होंगे।
  • अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में फसल उत्पादन में बढ़ोतरी, किसानों की बाजार तक पहुंच में सुधार, गांवों में रोजगार के अवसरों में विविधता लाने जैसे कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन किसानों को इनका पूरा फायदा नहीं मिल पाया। इसीलिए साइंस कांग्रेस की थीम ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर रूरल डेवलपमेंट’ रखी गई है।
  • इसमें उद्योग और किसानों के बीच संचार की कमी पर दुनिया के नामी वैज्ञानिक और विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। खेती पर संभावित खतरे को कम करने के उपायों का रोडमैप तैयार किया जाएगा। आयोजन में देशभर के शिक्षाविद, वैज्ञानिक और नीति निर्माताओं समेत 15,000 लोग शामिल होंगे। नवाचार करने वाले किसान भी बुलाए गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी कर्नाटक के दौरे पर
नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तुमकुरु में पीएम किसान योजना की तीसरी किश्त जारी की। इसके बाद बेंगलुरु में राज्यों को कृषि कर्मण पुरस्कार वितरित किए थे। उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की 5 युवा वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं का शुभारंभ किया था। इसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और राज्यपाल वजुभाई वाला से राजभवन में मुलाकात भी की। मोदी तुमकुरु में सिद्धगंगा मठ में प्रार्थना करने भी गए।