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Balmiki singh memorial mokama

जिनकी कल कर रहे थे ग्रामीण आलोचना…आज हो रही है प्रशंसा

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Pankaj Pandey

पंकज पाण्डेय

मोकामा। गरीब लोगों की खुशहाली से ही दिवंगत की आत्मा को शांति मिलती है। गरीबों को इलाज की सुविधा मेरे लिए सबसे बड़ी खुशहाली साबित होगी। जिसको लेकर मैंने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का निर्णय लिया।

वहीं, जरूरत पड़ने पर मैं अपनी कमाई का समाज कल्याण के लिए खर्च करता रहूंगा। यह कहना है रिटायर्ड इंजीनियर बाल्मीकि सिंह का। जिन्होंने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद ब्रह्मभोज करने की जगह उसी पैसा से गांव में लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने के लिए पीएचसी में कमरें के निर्माण को प्राथमिकता दी।

मोकामा के मरांची गांव में रिटायर्ड इंजीनियर पचहतर वर्षीय बाल्मीकि सिंह की यह पहल आने वाले दिनों में समाज के लिए एक नजीर पेश करेगी। 

बाल्मिकी सिंह की पत्नी आनंदा देवी का निधन छह वर्ष पूर्व पुणे में हुआ था। श्राद्धकर्म बनारस में संपन्न कराया गया था। वहीं, श्राद्धकर्म के बाद गांव वापस लौटने पर इंजीनियर ने पत्नी के निधन के बाद ब्रह्मभोज की जगह उनकी याद में समाज कल्याण का काम करने का प्रस्ताव रखा था।  ब्रह्मभोज के बदले उन्होंने समाज के हित के लिए काम करने का वादा किया था। उस समय उनके इस निर्णय की काफी आलोचना हुई थी। पर उन्होंने आलोचना की परवाह किये बिना अपनी सोच के तहत उस समय उन्होंने दुर्गा मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए भी डेढ़ लाख रुपये दिये थे। बाद में उन्होंने बुद्धिजीवियों के कहने पर सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा दुरुस्त करने का प्रयास शुरू किया।

अब जाकर ग्रामीणों की बहुप्रतिक्षित अभिलाषा पूरी होती नजर आ रही है। पीएचसी में करीब सात लाख रुपये से तीन कमरों का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। ग्रामीणों को इलाज कराने में हो रही समस्या को लेकर उन्होंने यह सार्थक कदम उठाया। गरीब तबके के लोगों के लिए यह कार्य वरदान साबित होगा। कमरों के निर्माण के बाद चिकित्सा के जुड़े कई आधुनिक उपकरण स्थापित होंगे।

प्रर्याप्त जगह के अभाव में संसाधन के बावजूद अस्पताल में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रहे थे। वहीं निजी अस्पतालों में इलाज कराने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा था। कभी ब्रह्मभोज नहीं करने पर इंजीनियर की आलोचना करने वाले लोग आज उनकी सराहना करते नहीं थकते।

मरांची गांव में रिटायर्ड इंजीनियर बाल्मीकि सिंह की पहल के बाद समाज कल्याण कोष बनाने की कवायद तेज है। इस कोष में जमा राशि से सामाजिक हित से जुड़े कार्य कराये जायेंगे। वहीं विषम परिस्थति में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक मदद भी मिलेगी। समाजिक कार्य से जुड़े लोग आगे बढ़ कर योगदान कर रहे हैं।

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