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सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर 3 को खातेगांव बन्द, अधिकारी को सोपेंगे ज्ञापन

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Anil Upadhyay

अनिल उपाध्याय

देवास।जिले के तहसील मुख्यालय खातेगांव पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विगत कई वर्षों से अव्यवस्था एवं समस्याओं से जूझ रहा है, स्थिति यह है कि अव्यवस्था के चलते कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक चपत भी उठानी पड़ती है।

सरकारी अस्पताल में डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी के साथ ही यहां भारी अव्यवस्था बनी रहती है, किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो लेकिन खातेगांव अस्पताल के आज तक दिन नहीं फिर पाए हैं, यह अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था एवं स्टाफ की कमी को लेकर कई बार आंदोलन धरना प्रदर्शन एवं नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया, उसके बावजूद भी इस अस्पताल की व्यवस्था में आज तक कोई सुधार नहीं हो पाया है !

इतना ही नहीं इमरजेंसी केस के दौरान आए दिन अस्पताल में विवाद भी होते रहते हैं, ऐसा ही एक मामला 28 जनवरी को सामने आया घायल मरीज को प्राथमिक उपचार देने मे लापरवाही बरतने को लेकर मंडी अध्यक्ष दिनेश यादव से मौजूद डॉक्टर का विवाद हो गया विवाद इतना बढ़ा कि अस्पताल के कर्मचारियों ने मंडी अध्यक्ष दिनेश यादव एवं उनके साथ पहुंचे साथियों के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी जीवन रजक एवं थाना प्रभारी तहजीब काजी को एक आवेदन सौंपा जिसमें उन्हें असामाजिक तत्व बताया गया !इसी बात के विरोध में खातेगांव मंडी के  तुलावटी हम्माल  व्यापारीगण मण्डी व्यवसाय के साथ ही नगर बंद का आह्वान कर अनुविभागीय अधिकारी जीवन सिंह रजक को ज्ञापन सौंपेगे।

उल्लेखनीय है कि करीब 1 लाख से अधिक आवादी वाले तहसील  के 172 गांव के ग्रामीणो के लिए स्वास्थ्य सेवाऐ उपलब्ध कराने वाले खातेगांव के सरकारी अस्पताल के हाल-वेहाल है।

यहा अस्पताल तो है, लेकिन उनमें उपचार नही मिलता, यहा डाक्टर उपकरणो के अभाव के चलते सरकारी अस्पताल मरीजों का रैफर सेंटर बन गया है।

नगर सहित नेमावर. संदलपुर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाऐ देने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य कैन्द्र ,वही 26 उपस्वास्थ्य कैन्द्र बनाए गये है।

एक ओर तो शासन द्वारा जन,-जन तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के दावे किए जाते हैं !दूसरी ओर आज भी कई ऐसे ग्राम हैं !जहां प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं तक के लाले पड रहे हैं। ये ग्राम पक्की सडकों से जुडने, स्वास्थ्य केन्द्र भवन उपलब्ध होने, शासन की विभिन्न योजनाएं संचालित होने के बाद भी डॉक्टर के अभाव में बेकार साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा इस ओर ध्यान दिलाने के बाद भी डॉक्टर और समचित स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

खातेगांव में सरकारी अस्पताल को इलाज की जरूरत है।
खातेगांव के सरकारी अस्पताल में मरीजों की जान पर आ पड़ती है दुर्घटना एवं कई इमरजेंसी मामलों में समय पर डॉक्टर एवं स्टाफ के नहीं पहुंचने पर कई बार घायलों की हालत नाजुक हो जाती है, उस समय घायल को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता होती है। लेकिन ना तो समय पर डॉक्टर पहुंच पाते हैं और ना ही मरीज का समय पर इलाज हो पाता है !ऐसी स्थिति में खातेगांव के सरकारी अस्पताल का इलाज होना भी अत्यंत जरूरी प्रतीत होता है।

स्वीकृत पद पडे हैं रिक्त।
स्वास्थ्य केन्द्र में पीजीएमओ शिशु रोग विशेषज्ञ, पीजीएमओ निश्चेतना,पीजीएमओ सर्जरी, नेत्र विशेषज्ञ, सहायक नेत्र चिकित्सक, सहायक शल्य चिकित्सक के स्वीकृत पद खाली पडे हैं जब कि स्वास्थ सुपरवाइजर,स्टोरकीपर,लेखापाल, स्वास्थ्य शिक्षक ट्रकोमा, ओपी अटेंडर, वार्ड वाय, भृत्य,बीईई, बीसीएम, एलएचबी आदि पदों में से भी अनेक पद खाली पडे हैं।

आज तक अस्पताल में नहीं बढ़ा है स्टाफ।
सबसे बडी विडंबना यह है कि जब से उक्त पद स्वीकृत हुए हैं तभी से ये खाली पडे हैं! जबकि वर्तमान में नगर व क्षेत्र का काफी विस्तार हुआ है और उसी मानसे मरीजों की सख्या में भी इजाफा हुआ है। यही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्यकेन्द्र का दर्जा मिलने के बाद भी यहां पद नहीं भरे जाना आश्चर्य का विषय है। दूसरी ओर मरीजों के साथ आने वाले अटेंडर को रुकने के लाले पडरहे हैं। उनके रुकने की यहां कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ब्लड स्टोरेजयुनिट, सोनोग्राफी जैसी सुविधाएं भी यहां उपलब्ध नहीं है।

आमला में अस्पताल है, डॉक्टर नही।
आमला में भी एक ऐसा ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन है जिसे लाखों रुपए खर्च कर बनया गया है, लेकिन यहां आज तक डॉक्टर की सुविधा नहीं मिल पाई है। मात्र एएनएम के कंधां पर इस अस्पताल की जिम्मेदारी है।39 लाख का भवनराष्ट्रीय ग्रमीण स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत वर्ष 2007-08 में उक्त भवन निर्माणकी स्वीकृति मिली थी जिसकी की लागत 39 लाख रुपए बताई जाती है।यहांनिर्धारित पदो के रिक्त पडे होने से ग्रामीणों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब 4 हजार कीआबादी वाले इस ग्राम के अलावा समीप में सागोन्या, उमरिया, पटरानी, उमेडा,मनोरा, लिली, भीमताल खेडा, लाल पठार, कुमनगांव, कालीबाई, ककडदी, बीड,सातल, बरखेडी, मोला आदि गांवों का वास्ता इसी गांव से है। यदि आमला अस्पताल में डॉक्टर की सुविधा मिले तो इन सभी ग्रामों के मरीज लाभांवित हो सकते है।

संदलपुर में नहीं महिला। चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ।
करीब 8 हजार की आबादी वाले ग्राम संदलपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रडॉक्टर एवं स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। शासन ने लाखों रुपए की लागत से सुविधायुक्त भवन तो बना दिया लेकिन महिला डॉक्टर नहीं होने से मरीज बिना इलाज के लौट रहे हैं।यहां केवल कंपाउंडर है। मरीजों को बुखार,खांसी,सर्दी की दवा दे दी जाती है जबकि टिटनेस जैसे मामलों में यदि अस्पताल मेंइंजेक्शन होगा तो लगा देंगे नही तो बाजार से लाने का कह देंगे। सबसे बडी समस्य गर्भवती महिलाओं की है। उन्हें यहां से करीब 5 किमी दूर खातेगांव अस्पताल जाना पडता है। वहां भी वे देर तक खडे रहती हैं।सिस्टरों के पास कई बार जाने के बाद वे मरीज को देखती हैं। संदलपुर से आसपास के अनेक गांव जुडे हैं। अस्पताल के आसपास साफ-सफाई का भी अभाव है। आस-पास पशु बांध दिए जाते हैं। यहां तक कि अस्पताल परिसर मेंबच्चों को शौच के लिए बैठा दिया जाता है। अस्पताल में प्रतिदिन बडीसंख्या में मरीज यहां आते हैं। गांव वाले चाहते हैं कि यहां जच्चा वार्ड हो,  लेडी डॉक्टर भी हो।इसी प्रयास में यह भवन तो बना है किंतु मात्र यह भवन देखकर मरीज अच्छे नहीं हो सकते जब तक कि पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था न हो।‘संदलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर नहीं है एएनएम न एमपीडब्ल्यू

ग्रामीणों को तत्काल उपचार देने के उद्देष्य से स्वास्थ्य विभाग ने गांवोंमें उपस्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की है ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की बिमारी का प्राथमिक उपचार मिल सकें। इसके लिये केन्द्रों पर महिला एएनएम एवं पुरूष एमपीडब्ल्यू के पद स्वीकृत किये गये हैं। लेकिन ब्लॉकके उप स्वास्थ्य केन्द्रों में ग्रामीणों को समुचित ईलाज नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिती अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रो पर बनी हुई है। इसके अलावा कई केन्द्रों पर एएनएम तथा एमपीडब्ल्यू के पद रिक्त होने से ग्रामीणों कोवस्वास्थ्य लाभ के लिये बंगाली डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता हैं !खातेगांव ब्लॉक में 26 उपस्वास्थ्य केन्द्र बनाए गए है। इन केंन्द्रो से,आसपास के गॉव को जोड़ा गया है। केन्द्रों में पदस्थ एएनएम को फील्ड परपहॅुचकर ग्रामीणों   को ईलाज मुहैया कराने निर्देष है। लेकिन जिन केन्द्रों पर वर्षों से एनएम का पद रिक्त है !वहां के ग्रामीणों को कौन स्वास्थ्य मुहैया कराएगा।

इन गॉवों में है उप स्वास्थ्य केन्द्र।
अजनास, चीचली,उमरिया, बरवई, गोलपुरा, चंदवाना, सोमगॉव, खिरनीखेड़ा,गनोरा, बछखाल, तिवड़िया, सन्नौद, बड़दा, सुकर्ड़ी, मुरझाल , बिजलगॉव,खारदा, बुराड़ा, इकलेरा, कोलारी, हरणगॉव, निवारदी, पटरानी, सुलगॉव,मचवास, ओंकारा। इन उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर नहीं है एएनएमखातेगांव ब्लॉक के खिरनीखेड़ा, तिवड़िया, बड़दा, मुरझाल, मचवास में लंबे समय से एएनएम के पद रिक्त पड़े हैं जिसके चलते ग्रामीणोंएवं महिलाओं को ईलाज के लिये ईधर उधर भटकना पड़ रहा है। खास कर महिलाओं के उनके स्वास्थ्य संबंधी बिमारी एवं उपचार में तो परेषानीआती ही है! साथ ही टीकाकरण , खून की जांच भी प्रभावित होती है।केन्द्रो पर नहीं मिलती एएनएम प्रत्येक केन्द्र पर महिला एएनएम की पदस्थापना है महिला एएनएम को केंन्द्रो पर ही निवास करने के निर्देष दिये है ताकि महिलाओं तथा बच्चों काईलाज प्राथमिकता से हो सकें। एएनएम के केन्द्र पर निवास करने से गर्भवती महिलाओं को अचानक होने वाली तकलीफ में तत्कल ईलाज मिल सकें। लेकिन अनेक केन्द्रो पर महिला एएनएम निवास ही नहीं करती है।

 

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