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ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाई कोर्ट का झटका

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

ग्वालियर। सिंधिया राजवंश के संपत्ति विवाद मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के उस आवेदन को कोर्ट ने खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव को देखते हुए जनवरी में कथन कराए जाने का निवेदन किया था। साथ ही न्यायालय ने सिंधिया की गवाही ग्वालियर में ही ३० नवंबर से ३ दिसंबर तक कराए जाने के निर्देश दिए हैं। गवाही कोर्ट कमिश्नर के जरिए होगी।अपर सत्र न्यायाधीश सचिन शर्मा ने कहा कि यह मामला 27 साल से लंबित है।

उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से दस से बीस साल पुराने मामलों का निराकरण 31 दिसंबर 2017 तक करने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक दल के स्टार प्रचारक होने के आधार पर २७ साल पुराने मामलों पर स्थगन के पर्याप्त व समुचित न्यायसंगत आधार नहीं माने जा सकते। पक्षकारों से यह अपेक्षा है कि वह सकारात्मक व सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए निराकरण सुनिश्चित करें। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से हरिशंकर पचौरी शपथ पत्र पर बताया कि वह चुनाव में स्टार कैंपेनर के रूप में व्यस्त हैं।

इसलिए पूर्व में साक्ष्य के लिए तय २३ से २५ नवंबर की तिथि को निरस्त कर जनवरी 18 में तारीख लगाई जाए। इस मामले में यशोधरा राजे के अधिवक्ता दीपक खोत का कहना था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का ग्वालियर में निरंतर आना होता है इसलिए उनके ग्वाालियर में ही कथन कराए जाएं। इससे सिंधिया के बयान कोर्ट कमिश्नर के जरिए दिल्ली में कराए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह नहीं हो पाए थे।

तीन नाम किए गए तय। ज्योतिरादित्य के साक्ष्य के लिए तीन अधिवक्ताओं पर सभी पक्षों में सहमति बनी हैं। इनमें एडवोकेट बीडी जैन, एमएल बंसल तथा बीबी शुक्ला के नाम शामिल हैं। तीनों द्वारा न्यायालय में अपनी सहमति दे दी है। न्यायालय ने आगामी आदेश तक तीनों के नाम रिजर्व रख लिए हैं। इससे पहले किसी भी नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी। फिर एचडी गुप्ता के नाम पर सहमति हुई थी लेकिन उनके अस्वस्थ होने से उनके नाम पर विचार नहीं किया गया।

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