BREAKING NEWS
Search
sidhi school

स्कूल आगनवाड़ी केन्द्रों के पास खुले आम बिक रहे धूम्रपान की सामग्री, पढ़ने को मजबूर नौनिहाल व छात्र

696
Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न शासकीय स्कूलों के आसपास स्कूल परिसर से लगकर तंबाकू उत्पादों की खुलेआम बिक्री की जा रही है। स्कूल परिसर के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी प्रशासन इसका सख्ती से पालन नहीं करा रहा है। लिहाजा नाबालिग छात्र बेधड़क नशे की गिरफ्त में हैं।
स्कूल के आसपास ही उन्हें नशे की सामान आसानी से उपलब्ध हो रही है जो इनके बुरे लत को बढ़ा रही है। शहर के हजारों नौनिहाल तंबाकू, सिगरेट की जद में पढें जा रहे हैं। किसी भी शिक्षण संस्थान के 100 मीटर के दायरे में धूम्रपान की दुकान नहीं होना चाहिए लेकिन खुद सरकारी स्कूलों व आंगनवाड़ियों के संचालन में इस कानून का ध्यान नहीं रखा जा रहा।
अधिकारियों ने कुछ दिनों पहले निजी स्कूलों, शिक्षण संस्थानों के पास की दुकानों पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था दिखावे के लिये अभियान चंद दिनों तक चला फिर न जाने क्या हुआ कि नशें के इस कारोवार की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जा है।
तंबाकू नियंत्रण और धूम्रपान रोकथाम के नाम पर सरकारी महकमे बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि शहर के कई स्कूल, कॉलेज और दूसरे शिक्षण संस्थान इसकी जद में चल रहे हैं। शिकायत के बाद भी सरकारी महकमा की नींद नहीं खुल रही है। आलम यह हो गया है कि जहां भी सरकारी या निजी स्कूलों का संचालन होता है।
वहां नशे की दुकाने खुल जाती है लेकिन सरकारी स्कूलों व आंगनवाड़ियों के पास खुली ये दुकानें किसी को दिखाई नहीं दे रही। नियमानुसार स्कूल व आंगनवाड़ी केन्द्रों से 300 फीट के दायरे में कोई भी तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकान नहीं चलाई जा सकती लेकिन शहर में ही इसका पालन नहीं होता तो गांव व कस्बों की दुकानों की ओर कौन देखता होगा शहर ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
आसानी मिल रहे तम्बाकू युक्त गुटखे पाउच
स्कूलों आंगनवाड़ियों के पास चल रही बड़ी संख्या में इन दुकानों की सुध नहीं ली जा रही। पान तंबाकू की दुकानों पर तो सिगरेट और दूसरे नशे का सामान मिलता ही है। साथ ही किराना की दुकान पर भी गुटखा-पाउच और सिगरेट बेची जा रही है। अवैध कॉलोनियों से लेकर बस्तियों तक उड़ रहा नियमों का धुआं शहर का कोई इलाका ऐसा नहीं है, जहां चलने वाले स्कूल, कॉलेजों के पास गुटखा, पाउच और सिगरेट नहीं मिलती हो। स्कूलों व आगनवाड़ियों के पास तंबाकू बेचे जाने का मामला शहर भर का नही है।
कॉलोनियों से लेकर छोटी बस्तियों तक में सभी जगह इस तरह की दुकानें खोल ली गई हैं। यहां आने-जाने वाले लोग आसपास खड़े होकर ही नियमों का धुआं उड़ा रहे हैं और इन्हें देखने वाले बच्चों पर भी बुरा असर हो रहा है। एक ओर लिखे-छपे पर प्रतिबंध लगाया गया है ताकि प्रचार न हो, लेकिन खुद लोगों द्वारा धूम्रपान करने से परहेज नही करते है।
एक भी दुकान में नहीं लगा बोर्ड…
तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों की बिक्री को कम करने के लिए कई तरह के नियम बनाए गए हैं। उनमें यह भी शामिल है कि दुकानदारों द्वारा बोर्ड लगाकर चेतावनी दी जाना चाहिए कि धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक है लेकिन इसका पालन कही नही किया जा रहा है। 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को इनकी बिक्री नहीं की जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
हैरत की बात यह है कि कई दुकानों पर सामग्री बेचने वाले भी नाबालिग हैं। दुकानदार खुद भी स्वीकार कर रहे हैं कि स्कूल के कई बच्चें यहां आकर सिगरेट खरीदते हैं। सबकुछ आंखों के सामने है लेकिन न ही प्रशासन, न स्वास्थ्य विभाग और पुलिस किसी कार्रवाई के लिए कदम उठाते हैं। कई बार दुकानों से गुटखा, पाउच और सिगरेट जब्त कर दुकानदार पर कार्रवाई होती रही है लेकिन बीते कई बर्षो से अव कार्यवाही नही की जा रही है इसके कारण हर तीसरे घर के पास व हर स्कूल कॉलेज आगनवाड़ी केन्द्र के पास दुकाने सजाई जा रही है।
देखकर प्रभावित होते हैं नाबालिग
बुजुर्गों व नशेड़ियों को नशापान करता देखकर ज्यादातर नाबालिग प्रभावित होते हैं। जानकारी के कन्या हायर सैकण्ड्री अमहा शासकीय उत्कृष्ठ हायर सेकण्ड्री क्रमांक 1 व 2 के सामने व दीवार से लगकर कई पान ठेले संचालित हैं। इन सभी पानठेलों में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादन बेधड़क बेचे जा रह हैं। पान दुकान संचालक इसे व्यवस्कों के साथ.साथ नाबालिगों को भी बेच रहे हैं। बड़ों को बीड़ी सिगरेट पीते हुए तंबाकू खाते देखकर स्कूली विद्यार्थियों पर बूरा प्रभाव पड़ रहा है।
उत्कृष्ठ शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की दीवार से लगकर करीब आधा दर्जन पान ठेले संचालित है। इन पान ठेलों में तंबाकू युक्त गुटखाए जर्दा व पाउच खुले आम बिकते देखा गया। वहीं ज्यादातर विद्यार्थी पान ठेले में खड़े रहे। इनमें से कई विद्यार्थी हाथों में पाउच और तंबाकू मलते नजर आए। कुछ छात्र ठेले के किनारे खड़े होकर सिगरेट पीते नजर आए।
स्कूल प्रबंधन को लेना-देना नहीं…
स्कूलों के आसपास नशा को बढ़ावा देने वाली कई दुकानें संचालित है। विद्यालय प्रबंधन और स्टाफ इन दुकानों को देखते हुए स्कूल में प्रवेश करते हैं। बावजूद स्कूल की दीवार से लगे ऐसे नशे के ठिकानों के विरुद्ध शाला प्रबंधन संज्ञान नहीं ले रहे हैं। शाला प्रबंधन की ओर से प्रशासनिक अमले को ऐसे ठिकानों की शिकायत नहीं की जाती। लिहाजा विद्यार्थियों को स्कूल परिसर के आसपास ही गुटखे तंबाकू और सिगरेट उपलब्ध हो जाते हैं। यहां तक की स्कूलों के आसपास मुनक्का नशे की टेबलेट जैसे सामान भी बेचे जा रहे हैं।