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प्रशासन की अनदेखी से नदियों का अस्तित्व खतरें में, कोई भी नहीं ले रहा सुध

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Saurav Saxena

सौरव सक्सेना

गंजबासौदा। शहर की प्राचीन पाराशरी नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है ,जो एक कुचली  हुई जान बनकर रह गई है ,नदी में घरों का गंदा पानी भी मिल रहा है जिससे अब वह गंदे नाले में तब्दील हो गई है जिस नदी के पानी से लोगों की प्यास बुझती थी और खाना पकाया जाता था अब स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के चलते नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

जहां एक तरफ  मध्य प्रदेश सरकार नदियों के संरक्षण के लिए कई योजनाएं चला रही है ,नदी को  साफ स्वच्छ रखने के लिए करोड़ बजट पास किए जा रहे है लेकिन शहर के बीचो बीच स्थित पाराशरी नदी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है ,यह नदी पहले कल कल पानी से बहती थी और उसका पानी लोगों की प्यास बुझाता था, वही इस पानी से खाना भी पकाया जाता था लेकिन अब यह पानी गंदा और काईनुमा दिखाई पड़ता है | बताया जाता है कि यहां भुजरिया पर्व पर और जवारे विसर्जित की जाती  थी |

नदी का अस्तित्व अतिक्रमणकारियों ने भी नहीं छोड़ा ,पाराशरी नदी  जिसकी चौड़ाई कभी 80 फीट हुआ करती थी अतिक्रमण के चंगुल में फस कर अब महज 20 फीट ही रह गई है , साथ ही लोगों के घरों का गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है जिससे नदी का पानी गंदा हो गया है नदी के पास रहने वाले लोगों को नदी में जहरीले कीट आए दिन परेशान करते रहते हैं वहीं जागरुक लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को पाराशरी नदी की सुध लेना चाहिए जिससे प्राचीन नदी  साफ सफाई करके आसपास पनप रहे अतिक्रमण से मुक्ति दिला कर कारगर पहल की जाना चाहिए जिससे नदी का अस्तित्व बच सके |

पारासरी नदी की सफाई करायी जाएगी और बहती हुई नदी के गेट भी खेलें जाएंगे, वहाँ पर अतिक्रमण भी जल्द हटाया जायेगा।
“झानेद्र यादव – सीएमओ नगर पालिका गंजबासौदा”

प्राचीन पारासरी नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है, नगर का गन्दा पानी इसी में आता है। अगर प्रशासन चाहे तो इसकी सफाई कर यंहा पर एक हॉलीडे स्पॉट भी बनाया जा सकता है।
“शैलेन्द्र सक्सेना-समाजसेवी, गंजबासौदा”