Kriket Film

वर्ल्ड कप विजेता क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने बनाई फिल्म ‘किरकेट’, फिल्म का ट्रेलर लांच

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मुंबई। बॉलीवुड और क्रिकेट का नाता शुरू से रहा है और इन दिनों यह ज्यादा गहरा हो गया है टीम इंडिया की पहली वर्ल्ड कप जीत पर तो रणवीर सिंह की फिल्म ’83’ आ रही है। अब उसी 1983 की विश्वकप विजेता टीम के खिलाड़ी रहे कीर्ति आजाद भी इस खेल से जुड़ी एक फिल्म लेकर आ रहे हैं। उसका नाम ‘किरकेट’ है। फिल्म में देश के क्रिकेट जगत में होने वाली पॉलिटिक्स का विषय उठाया जाएगा।

कीर्ति ने ट्विटर पर शेयर किया फिल्म का ट्रेलर…

असल जिंदगी का किरदार निभाएंगे कीर्ति….

मूल रूप से इसका प्लॉट बिहार क्रिकेट संघ के बंटवारे और उसकी रणजी टीम की मान्यता रद्द करने के इर्द-गिर्द घूमेगा और इसी के जरिए देश की क्रिकेट पर हावी राजनीति को सामने लाया जाएगा। इसमें बिहार के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में खेलने के लिए मौके नहीं दिए जाने जैसे संजीदा विषय को भी उठाया जाएगा। इसका निर्माण‌ येन मूवीज के बैनर तले किया गया है जबकि इसके निर्माण में ए स्क्वेयर प्रोडक्शन्स, धर्मराज फिल्म्स, जेकेएम फिल्म्स ने सहयोग दिया है। निर्माता टीम में आरक जालान, सोनू झा, विशाल तिवारी और यूसुफ़ शेख हैं।

कैसे मिला कीर्ति को रोल…

कीर्ति आज़ाद इस फिल्म में खुद अपनी असल जिंदगी का किरदार निभाते नजर आएंगे। उन्होंने यह रोल कैसे मिला, इस बारे में वह बताते हैं कि- “नरेशन के दौरान मेरी आंखें नम हो जाया करती थीं। ऐसे में डायरेक्टर ने कहा कि क्यों ना मैं ही खुद मुख्य भूमिका निभाऊं। मुझे भी बात सही लगी, क्योंकि मैंने इस पूरी जद्दोजहद को 10 साल तक जिया था, तो मैं इस रोल को कर सकता था। इस तरह से मेरा एक्टिंग डेब्यू हो रहा है।”

सेंसर बोर्ड के फैसले ने किया निर्माताओं को हैरान…

जब यह फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड के पास गई, तो बोर्ड ने मेकर्स से शुरू में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर में से फिल्म के सत्य घटनाओं से प्रेरित होने वाली लाइन हटाने को कहा। जबकि सच यह है कि यह फिल्म बिहार के क्रिकेट जगत और उसके पीछे की राजनीति की सत्य घटनाओं पर ही बनाई गई है। बहरहाल, निर्माता इस मुद्दे को लेकर सेंसर बोर्ड से लड़ने के मूड में नहीं हैं क्योंकि उन्हें दर्शकों पर यकीन है, जो इन घटनाओं की हकीकत से अच्छी तरह से वाकिफ हैं।

मैंने सारी रिसर्च मुहैया करवाई – कीर्ति

एक तो मैं खुद बिहार से हूं। दूसरा क्रिकेटर भी रहा हूं। ऐसे में बिहार क्रिकेट की दयनीय दशा देखकर मैं हमेशा से भावुक रहा हूं। तो जब इस फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर तीन साल पहले मेरे पास आए और ख्वाहिश जताई कि इस विषय पर फिल्म बनानी है तो मैं खुद को रोक नहीं सका। मैंने उन्हें सारी रिसर्च मुहैया करवाई। राजनीति के साथ-साथ क्रिकेट भी मेरा पहला प्यार रहा है। डीडीसीए में दिवंगत अरुण जेटली के प्रमुख रहते हुए जो वित्तीय अनियमितता हुई वह मेरे लिए नागवार गुजरी थी। मैंने जो आरोप लगाए, वे सब बाद में जांच एजेंसी, और फोरेंसिक रिपोर्ट द्वारा सही साबित हुए। फिर भी मेरी पार्टी द्वारा मुझे ही बागी करार दिया।

मैंने अरुण जेटली जी पर कोई आरोप निजी तौर पर नहीं लगाया था। उनके साथ मेरे संबंध अच्छे थे। बहरहाल फिरोज शाह कोटला उनके नाम पर हो गया है। क्या यह अच्छा नहीं होता कि स्टेडियम का नाम टाइगर पटौदी, बिशन सिंह बेदी या फिर आज के कप्तान विराट कोहली के नाम पर डेडिकेट कर दिया जाता?

देखिए यह विडियो…