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डी कंपनी में दरार, छोटा शकील ने छोड़ा दाऊद का साथ: आईबी

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आईबी के अनुसार पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के बीच सुलह करानें की कोशिश में है ताकि भारत के खिलाफ डी कंपनी का इस्तमाल किया जा सके…

आईएसआई नें डी कंपनी का इस्तमाल 1993 के मुबंई सीरियल बम ब्लास्ट करानें में किया था, उस मामले में छोटा शकील मुख्य अारोपियों में से एक है…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

मुंबई: अगर भारत की खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का मानें तो गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम का लंबे समय से सहयोगी रहा छोटा शकील नें उसका साथ छोड़ दिया है। छोटा शकील को डॉन का राइट हैण्ड माना जाता रहा है। शकील नें कराची के क्लिफ्टन क्षेत्र में बनें दाऊद के आलीशान बंगले को भी छोड़ दिया है, जहॉं वह 1980 के दशक में मुबंई से फरार होनें के बाद से दाऊद के साथ रहता था। शकील फिलहाल किसी अज्ञात जगह पर शिफ्ट हो गया है।

बताया जा रहा है कि दाऊद और छोटा शकील के अलगाव का मुख्य कारण दाऊद का भाई अनीस इब्राहिम है जो दाऊद के साथ पाकिस्तान में रहता है। हाल ही में अनीस इब्राहिम ने गिरोह के संचालन में कथित रूप से हस्तक्षेप किया था जो दाऊद के सबसे विश्वसनीय लेफ्टिनेंट के रूप में पहचाने जाने वाले 54 वर्षीय शकील को पसंद नही अाया।

शकील पिछले तीन दशकों से गिरोह की गतिविधियों को संभालने में एक प्रमुख भूमिका निभाता चला आया है, सूत्रों का दावा है कि अनीस ने कई बार गिरोह में शकील से ऊपर उठने की कोशिश की थी, वह बार-बार खुद को शकील से सुपीरियर दिखाने की कोशिश में लगा रहता था।

हालांकि दाऊद नें अपनें भाई को स्पष्ट कर दिया था कि वह शकील के रास्ते में न अाये और न ही उसके काम में हस्तक्षेप करे, बावजूद इसके अनीस नें हाल ही में अपनी सारी हदे पार करते हुए गिरोह के काम में हस्तक्षेप किया नतीजतन डॉन और शकील में अनीस को लेकर बहस हो गई, जिसके बाद दाऊद नें शकील को गिरोह और उसके कामों से दूर रहने का आदेश दे दिया, और उसी समय शकील ने दाऊद का साथ छोड़ दिया।

खुफिया एजेंसी के सूत्रानुसार दुबई में अपने विश्वासपात्रों से मुलाकात करके शकील ने हाल ही में एक पूर्व एशियाई देश में कुछ सहयोगियों के साथ एक बैठक आयोजित की थी, इस बैठक का मकसद क्या था फिलहाल इसकी जानकारी हमें नही दी गई, लेकिन अनुमान लगाया जा सकता है कि यह मीटिंग दाऊद गैंग को तोड़कर अपना गिरोह बनानें के लिए हुई होगी।

आईबी के अनुसार पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई दाऊद और छोटा शकील का अलगाव नही चाहती, क्योकि ऐसे में दाऊद का गिरोह काफी हद तक कमजोर हो जाएगा और वह डी कंपनी का इस्तमाल करके भारत के खिलाफ रचे जाने वाले अनेक षडयंत्रों को अमल में नही ला पाएगें जिसमें अांतकी हमले भी शामिल होते हैं। 1993 का मुबंई सीरियल बम ब्लास्ट आईएसआई नें ही दाऊद का इस्तमाल करके करवाया था, जिसमें छोटा शकील नें मुख्य भुमिका निभाई थी। पाकिस्तानी एजेंसी हर हाल में दोनों के बीच सुलह-समझौता कराना चाहती है।

खुफिया सूत्र बताते हैं कि डॉन और शकील के बीच बढ़ती दूरियों के बारें गिरोह के सदस्य कुछ नही जानते। मुबंई, पाकिस्तान और दुबई में गिरोह के कुछ खास लोगों को ही इस बारे में पता है। गिरोह के जो सदस्य मुंबई में हैं वे कथित तौर पर चिंतित हैं क्योंकि अब तक गिरोह के सभी सदस्य यहां से शकील के आदेशों पर दाऊद का काम करते आये हैं, अब उन्हे नही पता कि किसकी बात को माना जाए और किसकी नही। चिंता के लिए उनके अन्य कारण यह है कि दाऊद शकील का अलगाव ड्रग्स कारोबार, हवाला व्यापार, कांट्रैक्ट किलिंग और जबरन वसूली सहित उनकी सभी गतिविधियों को प्रभावित करेगा।

इससे पहले गैंगस्टर अबू सलेम, छोटा राजन, फहीम मचमच और कुछ अन्य ने दाऊद से अलग होकर अपने स्वयं के प्रतिद्वंद्वी गिरोह बनाए थे। लेकिन जहॉं तक शकील की बात है तो वास्तव में शकील ने दाऊद के चरम प्रतिद्वंद्वी राजन पर वर्ष 2000 में बैंकाक में हमला किया था। दुबई से निर्वासित एक गैंगस्टर नें अाईबी सूत्र को बताया कि शकील दाऊद को छोड़ देगा यह “लगभग नामुमकिन” है। “यहां तक ​​कि दाऊद के भाई उसे धोखा दे सकते हैं, लेकिन शकील नहीं। वह दाऊद के प्रति जीवनभर वफादार रहा हैं, और अगर दोनो के बीच कुछ मतभेद पैदा हो रहे हैं तो यह केवल अनीस के कारण होगा।”