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संगीतकार रवींद्र जैन जिसने अपनी निःसक्तता को प्रगति की राह में कभी बाधक नहीं बनने दिया

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Pankaj Pandey

पंकज पाण्डेय

मनोरंजन डेस्क। “जिस देश में गंगा बहती है”, फिल्म बनाने के बाद “राम तेरी गंगा मैली” फिल्म कैसे बनाई जाए इस उलझन में डूबे राजकपूर साहब को भँवर से निकालने का श्रेय जाता है रवींद्र जैन को। पलभर में ही रवींद्र जैन ने “गंगा हमारी कहे,बात यह रोते-रोते” मुखड़ा लिखकर राजकपूर की उलझन को पल भर में दूर कर दिया।

एक शादी समारोह में “एक राधा एक मीरा दोनों ने कृष्ण को चाहा” गीत रवींद्र जैन से सुनकर राजकपूर काफी प्रभावित हुए।उसी समय सवा रुपया जेब से निकाल कर इस गीत को उन्होंने रवींद्र जैन से खरीद लिया और रवीन्द जैन को अपनी फिल्म “राम तेरी गंगा मैली” में संगीत देने के लिए साईन कर लिया। 

संस्कृत के प्रखर विद्वान इन्द्र्मनी जैन और माता किरण जैन के सात संतानों में तीसरे संतान के रूप में जन्मे रवींद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ में हुआ था। जन्मजात नेत्रहीन रवींद्र को उनके माता पिता ने कभी हीन भावना से नही देखा। उनके पिताजी ने उनको बचपन से ही भजन गाना सिखाया। वे बचपन से इतने कुशाग्र बुद्धि के थे कि एक बार सुनी गई बात को कंठस्थ कर लेते, जो हमेशा उन्हें याद रहती। परिवार के धर्म, दर्शन और अध्यात्ममय माहौल में उनका बचपन बीता। वे प्रतिदिन मंदिर जाते और वहाँ एक भजन गाकर सुनाना उनकी दिनचर्या में शामिल था। बदले में पिताजी एक भजन गाने पर  1 रुपया इनाम भी दिया करते थे।

थोड़े बड़े होने के बाद उनके पिताजी ने प्रखर संगीतकारो से उन्हें संगीत की शिक्षा दिलवाई।प्रारम्भ में वह भजन कार्यक्रमो में गाते थे |1974 में आई अमिताभ, नूतन और पदमा खन्ना की फिल्म “सौदागर” से उन्होंने अपने फिल्मी सफर का आगाज किया। “सजना है मुझे सजना के लिए” जैसे गीतों को उन्होंने न केवल लिखा, बल्कि मधुर मनभावन संगीत से सजाया भी। राजश्री बैनर और रवींद्र जैन का यह साथ आगे भी बना रहा। राजश्री का सरगम का कारवाँ आगे बढ़ता गया। ‘तपस्या’, ‘चितचोर’, ‘सलाखें’, ‘फकीरा’ के  सभी गाने बेहद लोकप्रिय हुए और मुंबइया संगीतकारों में रवीन्द्र का नाम स्थापित हो गया।

उनके लोकप्रिय गीतों में- गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल (गीत गाता चल), जब दीप जले आना (चितचोर), ले जाएँगे, ले जाएँगे, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे (चोर मचाए शोर), ले तो आए हो हमें सपनों के गाँव में (दुल्हन वही जो पिया मन भाए), ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए (पति, पत्नी और वो), एक राधा एक मीरा (राम तेरी गंगा मैली), अँखियों के झरोखों से, मैंने जो देखा साँवरे (अँखियों के झरोखों से),सजना है मुझे सजना के लिए (सौदागर), हर हसीं चीज का मैं तलबगार हूँ (सौदागर), श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम (गीत गाता चल),वृष्टि पड़े टापुर टूपुर (पहेली),सुन सहिबा सुन, प्यार की धुन (राम तेरी गंगा मैली) है।

1985 में राम तेरी गंगा मैली के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड मिला। वर्ष 2015  में उनको पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 9 अक्टूबर 2015 को उनकी मृत्यु हो गई।

अपनी निः सक्तता को प्रगति की राह में कभी बाधक नहीं बनने देने वाले, लोक संगीत को जनमानस में स्थापित कर उसे बुलंदियों पर ले जाने वाला यह  गीतकार/संगीतकार हमारे हृदय के तारों को अपने मधुर संगीत से हमेशा झंकृत करता रहेगा।