BREAKING NEWS
Search

तीन तलाक के विरोध में मुस्लिम लड़कियां बदल रही हैं अपना धर्म!

627

नई दिल्ली, डेस्क। तीन तलाक मामले पर एक के बाद एक मुस्लिम लड़कियों द्वारा धर्म परिवर्तन का मामला बढ़ता जा रहा है। यूपी चुनाव से पहले मोदी सरकार द्वारा गंभीरता से तीन तलाक का मुद्दा उठाया गया था। उसके बाद बहुत से मुस्लिम संगठन, उलेमाओं ने इसका विरोध किया और ऐसी बातों को सार्वजनिक तौर पर उठाना इस्लाम के खिलाफ भी बताया। लेकिन अब मुस्लिम महिलाओं ने जब स्टैंड लेना शुरू किया तो बहुत से मुस्लिम संगठन भी नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। इस बीच तीन तलाक के डर से मुस्लिम युवतियों द्वारा का धर्म परिवर्तन का मामला बढ़ता जा रहा है।

आइए हम आपको ऐसे ही कुछ घटनाओं के बारे बताते हैं जहां मुस्लिम युवतियों ने तीन तलाक के विरोध में कट्टरता के ठेकेदार के सामने ही अपना धर्म बदल लिया।

Photo Courtesy: NDTV

1. जोधपुर में युवती ने धर्म बदल की शादी

राजस्थान के जोधपुर शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित एक फलोदी क्षेत्र है। जहां की एक मुस्लिम लड़की ने भी तीन तलाक का विरोध किया। इस लड़की ने तीन तलाक तीन तलाक के विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिससे कई कट्टर मुस्लिमों को दिक्कत हो गई। क्योंकि इस लड़की ने अपना धर्म तो बदला ही साथ ही एक हिंदू लड़के से शादी कर ली। वह भी एक मंदिर में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ।

इस बारे में तस्लीमा ने मीडिया को बताया था कि हिंदू धर्म में पुरूष की केवल पत्नी होती है। साथ ही वहां जीवनभर अपनी पत्नी के अलावा दूसरी महिला पर बुरी नियत नहीं रखी जाती है। जबकि मुस्लिम समाज में अक्सर लड़की की मर्जी पूछे बगैर ही उसकी शादी कर दी जाती है। साथ ही एक पत्नी के अलावा भी शादी कर लेते हैं। वहीं तस्लीमा की शादी का यह मामला राजस्थान के अलावा पूरे देश में भी चर्चा का विषय बन गई है।

Photo Courtesy: ABP

2. सुर्खियों में रहा बागपत का मामला

पश्चिमी यूपी का बागपत जिले पिछले दिनों खुब सुर्खियों में रहा। दरअसल बागपत के दोघट थाना क्षेत्र के फौलाद नगर गांव में एक सम्प्रदाय विशेष की एक युवती ने भी अपना धर्म परिवर्तन कर लिया। जिसका कारण उसने भी तीन तलाक को ही बताया। युवती के मुताबिक उसने तीन तलाक से खौफ से ही अपना धर्म ही बदल डाला। साथ ही घर से भागकर अपने ही गांव के हिंदू युवक से मंदिर में जाकर शादी कर ली।

धर्म बदल कर शादी करने के बाद युवती ने बताया कि उनके संप्रदाय में सात जन्मों का रिश्ता तीन तलाक बोल कर एक ही झटके में तोड़ दिया जाता है। जबकि अब उसका पति दीपक सात जन्मों के लिए उसका है। उसने बताया कि वह तीन तलाक को लेकर हमेशा भयभीत रहती थी और मेरा धर्म परिवर्तन करने के पीछे की वजह भी यही है। जिसके बाद युवक और युवती के उपर कचहरी में युवती के परिजनों द्वारा भी किया गया था। बाद में उन्हें पुलिस सुरक्षा के बीच दिल्ली में छोड़ दिया गया।

Photo Courtesy: Patrika

3. हलाला के नाम पर वेश्यावृति करवाई

यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गाजियाबाद में एक मुस्लिम महिला ने अपने धर्म परिवर्तन की जो वजहें बताई उसे जानकर पूरे देश एक बार फिर से तीन तलाक का मुद्दा गरमा गया था। उसने साफ लफ्जों में कहा कि तीन तलाक के बाद हलाला के नाम पर वेश्यावृति करवाई गई। यह मामला दिसंबर 2016 का है। धर्म परिवर्तन करने से पहले संपद्राय विशेष द्वारा इस महिला का काफी विरोध किया गया है। वहीं इस महिला ने अपने धर्म परिवर्तन के लिए जय शिवसेना का सहारा लिया था। अब वह मुस्लिम महिला शबनम से सीमा बन गई।

इस महिला ने तीन तलाक को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। साथ ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि हलाला की आड़ में महिला से वेश्यावृत्ति कराई गई। क्योंकि इस महिला के पति ने 2014 में उसे तीन तलाक बोलकर तलाक दे दिया। उस वक्त महिला के 2 छोटे बच्चे थे। पीड़िता का आरोप है कि उसके पति ने गुमराह करके उसे वापस बुला लिया और हलाला की आड़ में महिला से वेश्यावृत्ति कराई।

तीन तलाक कोई मुद्दा नहीं

वहीं एक नीजी बेवसाइट के हवाले से लिखा गया कि बीते दिन जयपुर में आॅल ​इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अस्मा जोहरा ने दावा करते हुए कहा है कि तीन तलाक और शरीयत के समर्थन में पूरे देश से करीब 3.50 करोड़ फार्म मिले हैं।

ये महिला संगठन करती है तीन तलाक का विरोध

तीन तलाक के विरोध ये मुस्लिम महिला संगठन भी करती हैं। मुस्लिम महिला फाउंडेशन और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर कई बार तीन तलाक के विरोध में आयोजन कर चुकी हैं। वहीं इनका कहना है कि तीन तलाक का विरोध जारी रखेंगी।

केंद्र सरकार की मांग

तीन तलाक को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं के हक की तरफदारी की है। केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि मुसलमानों में प्रचलित तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला से मुस्लिम महिलाओं को संविधान में मिले बराबरी के हक का हनन होता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अब 11 मई से तीन तलाक मामले पर सुनवाई करेगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह में लिखित दलील दाखिल करने की छूट दी थी।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, तीन तलाक इस्लाम विरोधी

बीते दिनों ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी तीन तलाक को इस्लाम विरोधी करार दिया है। वहीं शिया पर्सनल बोर्ड ने इस आशय का प्रस्ताव पारित कर कहा है कि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले को उच्चतम न्यायालय में भी कहा जाएगा।