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अपने लेखन से समाज में जन जागरूकता लाना चाहती है लेखिका प्रीति कुमारी

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पटना. देश में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए हालातों से मजदूरों की समस्याओं और संघर्ष को बयां करती छलके छाले छल के नामक पुस्तक आपको देश के वास्तविकता से रूबरू कराएगी।

युवा लेखिका प्रीति कुमारी लगातार सामाजिक एवं जनसरोकार मुद्दों पर लिखती रही है। बिहार के पूर्णिया जिले की रहने वाली प्रीति कुमारी हिन्दी में स्नातकोत्तर एवं बी.एड की शिक्षा ग्रहण की है। प्रीति कुमारी अपने माता-पिता से प्रेरणा लेकर समाज में जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से सामाजिक मुद्दों पर आधारित “मेरे सपने हुए सच” एवं “मैली जिंदगी” नामक दो पुस्तक भी लिख चुकी है।
लेखिका प्रीति कुमारी की नई कृति छलके छाले छल के नामक पुस्तक में देश में कोरोना महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर मजदूरों के पलायन संघर्ष की कहानी है। इस पुस्तक में लेखिका प्रीति कुमारी ने कोरोनाकाल में लॉकडाउन के समय मजदूरों के पलायन की आपबीती और रोजी-रोटी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए अपने गांव छोड़कर शहर में आने वाले उन हजारों मजदूरों की स्थिति को केंद्रित कर पुस्तक में कई शीर्षकों के माध्यम से मजदूरों के पीड़ा को संवेदनशीलता से लिखी है।
कुल 178 पृष्ठों की यह पुस्तक सिर्फ एक पुस्तक नहीं बल्कि भारत जैसे विकासशील देश में कोरोना प्रलय से उत्पन्न जन समस्याओं पर आधारित वास्तविक कथा है।

सामाजिक समस्या एवं समाज की दशा एवं दिशा पर अपनी रचनाओं के माध्यम से जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से लेखिका प्रीति कुमारी संकल्पित है। पुस्तक को जे जे कम्युनिकेशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है। इसे आप ऑनलाइन माध्यम से भी खरीद सकते हैं।

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