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JNU में बढ़ सकती है सीटें, 300 प्रोफेसर की नियुक्ति होना तय

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निशांत सुमन,

नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रिसर्च सीटों में भारी कटौती करने के मामले को जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह राज्य सभा सांसद शरद यादव ने बुधवार को शून्यकाल में उठाया था. तो दूसरी तरफ सरकार ने राज्यसभा में कहा कि इस सत्र में पिछले बार के मुकाबले पीएचडी-एमफिल की सीटें ज्यादा होंगी.

एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने जवाब देते हुए कहा कि जेएनयू में अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग कैटिगरी में प्रोफेसर के पद पिछले कई साल से भरे नहीं गए है. उन्होंनें कहा कि अब इन खाली पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया और इसके लिए इंटरव्यू शुरु कर दिया गया है. एचआरडी मिनिस्टर ने कहा कि दो-तीन महीने में करीब 300 पदों पर नियुक्तियां की जाएगी. उन्होंने कहा कि पिछले साल एमफिल और पीएचडी के लिए 970 स्टूडेंट्स ने नामांकन कराया था लेकिन इस साल यह संख्या इससे भी अधिक रहेगी.

UGC के नये नियम के अनुसार एक प्रोफेसर 8 स्टूडेंट्स को करा सकते हैं PhD

UGC के नियम के अनुसार एक प्रोफेसर 8 स्टूडेंट्स और असिस्टेंट प्रोफेसर 6 स्टूडेंट्स को पीएचडी करा सकता है. लेकिन जेएनयू में एक प्रोफेसर 20 से 22 स्टूडेंट्स को पीजी करवा रहे थे. जेएनयू प्रॉस्पेक्ट्स 2017-18 में भी UGC के इस फैसले को आधार मान कर सींटे कम की गयी है.

300 प्रोफेसर्स की नियुक्ति होती है, तो करीब 2000 हो जाएगी सींटे

अगर जेएनयू में 300 प्रोफेसर्स की नियुक्ति होती है तो रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स को बहुत राहत मिल जाएगी. UGC के नियम के अनुसार यहाँ करीब 2000 स्टूडेंट्स पीएचडी-एमफिल कर सकेंगे. लेकिन अभी पीएचडी और एमफिल के पाठ्यक्रमों में नामांकन की संख्या 970 से घटा कर 102 कर दी गई है जिससे स्टूडेंट निराश हैं.

यूनिवर्सिटी में एडमिशन की नई नीति के विरोध में हो रहा आंदोलन

अब तक जो एंट्रेंस एग्जाम हो रहे थे, उसमें 70% मार्क्स लिखित के लिए रखे गए थे और 30% इंटरव्यू के लिए. लेकिन अब पहला पेपर सिर्फ 50% मार्क्स के साथ क्वालीफाई करना है और उसके बाद सेलेक्शन सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर होगा. यानी एक तरह से मौखिक परीक्षा के लिए 100% मार्क्स रखे गए हैं. इस नीति के विरोध में आंदोलन किया जा रहा है.