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दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर नाराजगी जता रहे चीन को भारत ने दिया दो टूक जवाब

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भारत ने चीन को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि वह दलाई लामा को लेकर बेवजह का विवाद खड़ा न करे…

शबाब ख़ान,

नई दिल्ली। चीन के कब्जे में तिब्बत के आने के बाद से भारत में निर्वासित जीवन जी रहे अध्यात्मिक नेता और गुरू दलाई लामा 4 व 5 अप्रैल को पूर्वोत्तर भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर हैं। वयोवृद्ध दलाई लामा इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा कर चुके हैं, तब भी चीन ने ऐसी ही नाराजगी जतायी थी. यहॉ तक की भारतीय प्रधानमंत्री के अरुणाचल दौरे पर भी बीजिंग की गीदड़ भभकी कोई नई बात नहीं हैं।

दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का विरोध कर रहे चीन को जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत के कई राज्यों में उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों और दौरे पर कोई अतिरिक्त रंग नहीं भरना चाहिए। “अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए नई दिल्ली ने साफ किया कि चीन को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। भारतीय विदेश राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, “भारत उनकी पॉलिसी ‘वन-चाईना’ का सम्मान करता है। हम चीन से भी ऐसे ही सम्मानजनक व्यावहार की उम्मीद करते हैं।”

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Dalai lama- Photo Courtesy: Google

ज्ञात हो कि चीन दलाई लामा को खतरनाक अलगाववादी मानता है। उनकी अरुणाचल यात्रा का विरोध करते हुए चीन ने कहा कि भारत को “सीमा विवाद को और जटिल बनाने से बचने के लिए इस तरह के कदमों के दूर रहना चाहिए।” नई दिल्ली ने इसके जवाब में कहा कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता का दौरा धार्मिक है, उसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं है इसलिए चीन को दलाई लामा की इस यात्रा पर यूँ हायतौबा नही मचाना चाहिए।

चीन को लगता है कि दलाई लामा और अन्य प्रभावशाली हस्तियों की अरुणाचल यात्रा के जरिये भारत पूर्वोत्तर के राज्य में अपना दावा मजबूत कर रहा है। बीजिंग अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके को पूर्वी तिब्बत कहता है और इसी आधार पर उस पर अपना दावा करता आया है, ऐसे मे तिब्बती अध्यात्मिक नेता का वहॉ जाना चीन को तकलीफ देता नजर आ रहा है।

बता दें कि कई दशकों तक दलाई लामा ने भारत के हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर से तिब्बत की निर्वासित सरकार चलाई है, इससे पहले जब 1959 में तिब्बती जनता नें तिब्बत पर जबरिया काबिज चीनी सेना के खिलाफ विद्रोह कर दिया था तब दलाई लामा तवांग के रास्ते से भागकर भारत आ गये थे। तब से वह भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।

4 और 5 अप्रैल को अरुणाचल दौरे में दलाई लामा तवांग के बौद्ध मठ भी गए। 13 दिन तक पैदल चलने के बाद दलाई लामा सबसे पहले तवांग के मठ ही पहुंचे थे। तवांग मठ में उन्होने उपदेश भी दिया।

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Dalai lama- Photo Courtesy: Google

इस बीच भारतीय रेल एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत तवांग को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी बना रहा है। बीजिंग इसका भी विरोध कर रहा है। चीन पूरी दुनिया से वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करने को कहता है। इसके तहत ज्यादातर देश तिब्बत को चीन का हिस्सा मानते हैं। वहीं भारत का तर्क साफ है कि अगर चीन वन-चाइना पॉलिसी का सम्मान चाहता है तो उसे दूसरे देशों की संप्रभुता का भी सम्मान करना ही होगा।

बहरहाल 4000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी सीमा से जुड़े चीन और भारत के बीच जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर विवाद है। जिसके चलते दोनो देश 1962 में युद्ध के रूप में जोर आजमाईश कर चुके है। जवाहर लाल नेहरू के समय में जब भारत अंग्रेजों की लंबी गुलामी से आजाद होकर अपने आपको विकसित करने में लगा था, सीमा विवाद के चलते उस युद्ध में भारत को हालांकि हार का सामना करते हुए हजारो वर्ग किलोमीटर भूमि से हाथ धोना पड़ा था, लेकिन तब के भारत और आज के युवा भारत में जनीन-आसमान का फर्क है जिसे समय समय पर चीन मानता भी आया है, ऐसे में दलाई लामा को लेकर चीन यह आक्रामक रवैया हास्यपद है।

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