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दवाओं के भ्रामक विज्ञापन दिखाने से बाज़ आयें टीवी चैनल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की चेतावनी

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पूरे विश्व में आजतक ऐसी कोई दवा या तकनीकी नही बनी, जिसके प्रयोग से मानव शरीर की लंबाई एक इंच भी बढाई जा सके…

Shabab Khan

शबाब ख़ान

नई दिल्ली: केन्द्र सरकार ने टीवी चैनलों को चेतावनी दी है कि आयुर्वेदिक सिध्द युनानी और होम्योपैथिक दवाओं और स्वास्थ संबंधित उत्पादों के बारे में अनुचित या बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों वाले विज्ञापन का प्रसारण न किया जाए।

सुचना प्रसारण मंत्रालय के निदेशक (प्रसारण) अमित कटोच द्वारा परार्मश के अनुसार चैनलों को केवल उन उत्पादों और दवाओं का विज्ञापन करना चाहिए जिनके पास वैध लाईसेंस हो, ऐसा नही होने पर कार्रवाई की जा सकती है।

आयुष मंत्रालय ने सुचना और प्रसारण मंत्रालय से कहा था कि कुछ चैनल इस तरह की दवाओं के अतिशयोक्ति या अनुचित दावे वाले विज्ञापन चला रहे इसके बाद सुचना और प्रसारण मंत्रालय ने यह परामर्श जारी कर दिया।

इसमें कहा गया है कि इस तरह के इश्तेहार उपभोक्ता को गुमराह कर रहे हैं और खुद ही दवा लेने के चलन के साथ स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी पैदा कर रहे हैं। इसके अनुसार इस तरह के विज्ञापन या कार्यक्रमो मे स्वघोषित डाक्टर, गुरु और वैध सभी तरह की स्वास्थ्य समस्याओ के चमत्कारिक समाधान सुझाते हैं, और दर्शक टीवी पर दिखाये गये उत्पाद के फायदे सुनकर फौरन उन स्वास्थ उत्पाद का सेवन करनें लगता है। ऐसे ज्यादातर मामलों में उपभोक्ता के स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मिसाल के तौर पर कई बड़े समाचार पत्रों और चैनलों पर युवक/युवती की तीन महीने में लंबाई बढ़ानें का टॉनिक और टैबलेटस् के विज्ञापन धडल्ले से चल रहे है। विज्ञापनों पर अधिक खर्च करनें वाली यह कंपनियॉ अपनें लंबाई बढ़ानें वाले उत्पाद को काफी हद तक मंहगा बेचती हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पूरे विश्व में आजतक ऐसी कोई दवा या तकनीकी नही बनी, जिसके प्रयोग से मानव शरीर की लंबाई एक इंच भी बढाई जा सके। 

इसी तरह लगभग हर टीवी चैनल कुछ दिनों से लेकर कुछ घण्टों में ही मोटापा घटाने की दवा, लोशन वाले विज्ञापनों से मोटी कमाई करते हैं। समाचार पत्रों के कर्ताधर्ता भी यह सच्चाई जानते हैं लेकिन मुनाफे के लिए वह लंबाई बढ़ानें या मोटापा घटाने के दावे वाले विज्ञापन प्रकाशित कर देते है।

हॉं, अपने बचाव के लिए किसी अंदर के पेंज पर यह सूचना जरूर छाप दी जाती है कि ‘समाचार पत्र में दिए गये उत्पादो के विज्ञापन में किये गये दावों की जिम्मेदारी समाचार पत्र की नही होगी।’ इसी तरह चैंनल पर दिखायें जानें वाले इस प्रकार के विज्ञापन के नीचे स्क्रॉल करती पट्टी पर अंग्रेजी में डिस्क्लेमर दिया गया होता है।

उल्लेखनीय है कि इन उत्पादों और दवाओं के गुमराह करने वाले विज्ञापन दवाओं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 और ड्रग्स और कॉस्मेटिक एक्ट 1940 का उल्लंघन करने वाले है।

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