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आईआरएनएसएस-1एच हुआ लांच, बढ़ेगी देश की जीपीएस की क्षमता

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Kirti mala

कीर्ति माला

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में अपनी कामयाबी का लोहा मनवा चुके इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) प्राइवेट कंपनी की मदद से अंतरिक्ष की दुनिया में एक और बड़ी छलांग लगाया है।

इसरो गुरुवार को श्रीहरिकोटा से जिस स्वदेशी नेवीगेशन प्रणाली इंडियन रीजनल नेवीगेशनल सैटेलेइट सिस्टम (आईआरएनएसएस यानि नाविक) श्रृंखला का आठवां उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच आज शाम सात बजे लांच किया है।

उसे पीएसएलवी-सी39 से लांच किया गया। बेंगलुरू की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी ने नाविक श्रृंखला का एक उपग्रह बनाया है- आईआरएनएसएस-1एच। ऐसा माना जा रहा है इससे देश की जीपीएस की क्षमता बढ़ जाएगी।

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1425 किलोग्राम भार वाले आईआरएनएसएस-1 एच इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का आठवां सैटेलेइट है जो आईएसएनएसएस-1ए की जगह लेगा, जिसकी तीन रूबीडियम परमाणु घड़ियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था।

आईआरएनएसएस-1ए ‘नाविक’ श्रृंखला के सात उपग्रहों में शामिल हैं। भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जिसे भारत ने अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर विकसित किया है।

बीते तीन दशकों में इसरो के लिए यह पहला मौका है जब उसने नेविगशन सैटेलाइट बनाने का मौका निजी क्षेत्र को दिया है। इसरो प्रमुख एएस किरण कुमार ने बताया कि हमने सैटेलाइट जोड़ने में निजी संस्थानों की मदद ली है। इसके लिए रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाले बेंगलुरु के अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी को पहला मौका मिला है।

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70 इंजीनियरों ने कड़ी मेहनत के बाद इस सैटेलाइट को तैयार किया है। यह सेवा स्मार्टफोन पर एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के द्वारा उपलब्ध होगी।अप्रैल 2018 में ईसका दूसरा हिस्सा लांच किया जाएगा।