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अब तय होगा, भाजपा नेताओं ने बाबरी ढांचा गिराने की साजिश रची थी या नहीं?

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शबाब ख़ान,

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के बाहर गुरुवार को सुबह से ही मीडिया का जमवाड़ा था। मौका था बीजेपीे के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित हज़ारों कारसेवकों के खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस केस पर दायर की गई एक याचिका पर फैसला सुनाने का। लेकिन देशी विदेशी चैनलों की ओटी वैन में चिपके टेक्नीशियनस्, हाथो में विभिन्न चैनलों का माईक थामें न्यूज एकंरस् एवं बाजूका से लैस कैमरा संभाले खड़े प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के हाथ कुछ खास हाथ नही लगा।

उच्चतम न्यायालय ने आज उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा जिसमे बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप बहाल करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में आज विवादित ढांचा विध्वंस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत केस चलाने की मांग की गयी। सीबीआई ने रायबरेली कोर्ट के फैसले को रद्द करके नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के केस को लखनऊ में चलाए जाने की मांग की है। दरअसल रायबरेली कोर्ट की ओर से तकनीकी आधार पर इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामला चलाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया गया था। जिसे वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से सही ठहराया गया था।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने  विवादित ढांचा विध्वंस मामले को दो हफ्तों के लिए टाल दिया था और भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य नेताओ से मामले में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। जिसके जवाब में आडवाणी के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि अगर आपराधिक केस का ट्रायल फिर से शुरु किया जाएगा, तो 183 गवाहों को दोबारा से बुलाया जाएगा। जिनकी निचली अदालत में गवाही हो चुकी है।

बता दें कि रायबरेली की कोर्ट में 57 गवाहों के बयान दर्ज किये जा चुके हैं और अभी 100 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज करने बाकी हैं। वहीं लखनऊ कोर्ट में 195 गवाहों की पेशी हो चुकी है। जबकि 300 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किये जाने हैं। गौरतलब है कि अयोध्या में स्थित 16वीं शताब्दी की  विवादित ढांचा को वर्ष 1992 में हिंदू एक्टिविस्ट के द्वारा गिरा दी गयी थी।

शीर्ष अदालत इस बारे में भी फैसला करेगी कि वीवीआईपी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई रायबरेली की एक अदालत से लखनऊ स्थानान्तरित की जा सकती है या नहीं।

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